विंटर एक्शन प्लान लागू होते ही चक्का जाम, दिल्ली की सीमाओं पर रेंगती जिंदगी, 198 दिनों में सबसे खराब AQI

Delhi Air Quality: दिल्ली में वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए लागू की गई नयी पाबंदियों के पहले ही दिन 1 नवंबर को शहर की सीमाओं पर भारी यातायात जाम देखने को मिला. इस बीच, वायु गुणवत्ता ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गई. यह इस मौसम का अब तक का सबसे खराब स्तर और पिछले 198 दिनों में सबसे खराब स्थिति है. यातायात पुलिस और प्रवर्तन दलों द्वारा राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश करने वाले वाहनों की जांच किये जाने के चलते दिल्ली-गुरुग्राम और दिल्ली-नोएडा सीमा सहित शहर के कई प्रवेश बिंदुओं पर भारी जाम लगा रहा.

दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के टोल बूथ और एनसीआर के अन्य प्रवेश बिंदुओं के पास वाहनों की लंबी कतारें देखी गईं. निर्धारित उत्सर्जन मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले वाहनों को अधिकारियों द्वारा रोके जाने के कारण यातायात जाम बढ़ता गया. ये पाबंदियां ऐसे समय लागू की गई हैं, जब रविवार को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 261 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है.

शहर के 57 निगरानी केंद्रों में से 22 में वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ श्रेणी में रही, जबकि 21 केंद्रों में यह ‘खराब’ और शेष 14 केंद्रों में ‘मध्यम’ श्रेणी में दर्ज की गई. वायु गुणवत्ता में गिरावट ऐसे समय आई है, जब सर्दियों के मौसम में प्रदूषण नियंत्रण के वास्ते विशेष उपाय लागू किए गए हैं. इनमें बीएस-4 या उससे पुराने उत्सर्जन मानकों वाले दिल्ली के बाहर पंजीकृत वाहनों पर प्रतिबंध, निर्माण गतिविधियों पर रोक, पार्किंग शुल्क दोगुना करना और सरकारी तथा निजी कार्यालयों में कर्मचारियों की भौतिक उपस्थिति 50 प्रतिशत तक सीमित करना शामिल है.

दिल्ली परिवहन विभाग ने पाबंदियों का पालन सुनिश्चित करने के लिए प्रमुख प्रवेश बिंदुओं, टोल प्लाजा और प्रदूषण के लिहाज से चिह्नित संवेदनशील स्थानों पर करीब 250 प्रवर्तन कर्मियों को तैनात किया है. डीएनडी, राष्ट्रीय राजमार्ग-48 पर रजोकरी, गाजीपुर, सिंघु बॉर्डर, टिकरी और बदरपुर सहित 13 प्रमुख टोल प्लाजा पर कुल 39 दल तैनात किए गए हैं.

यातायात जाम को लेकर सोशल मीडिया पर भी लोगों ने प्रतिक्रिया दी. कई यात्रियों ने सीमाओं पर लगी वाहनों की लंबी कतारों पर नाराजगी जताई और सवाल उठाया कि क्या इन पाबंदियों से वायु गुणवत्ता में वास्तव में सुधार होगा. सोशल मीडिया पर एक उपयोगकर्ता ने लिखा, “अगर आप अगले कुछ दिनों में दिल्ली जा रहे हैं, तो आपको इस तरह के यातायात जाम का सामना करना पड़ेगा. उसी के अनुसार अपनी यात्रा की योजना बनाएं. इस कदम से दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं होगा.”

एक अन्य यात्री ने लिखा, “दिल्ली की सीमा पर तीन घंटे से फंसा हूं. हमारे यहां आने का क्या फायदा? जिस कार्यक्रम में मुझे शामिल होना था, वह आधा बीत चुका. इन पाबंदियों का मकसद प्रदूषण कम करना है, लेकिन यात्रियों को लंबे ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ रहा है. और मजेदार बात यह है कि इससे वायु गुणवत्ता में सुधार भी शायद न हो.”

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *