दिल्ली दंगा केस : शरजील इमाम को अदालत की फटकार, उधर ताहिर हुसैन दोषी करार; 12 आरोपी बरी

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वर्ष 2020 में हुए दंगों से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में शनिवार को अदालत के अहम फैसले और टिप्पणियां सामने आईं. एक ओर, दंगा मामले में आरोपी छात्र कार्यकर्ता शरजील इमाम को अदालत ने अंतरिम जमानत की शर्तों का उल्लंघन करने वाला बताया, लेकिन उनकी जमानत रद्द करने से इनकार कर दिया. दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को दयालपुर क्षेत्र से जुड़े एक मामले में दंगा करने के आरोपों में दोषी ठहराया गया, जबकि उनके 12 सह-आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया.

शरजील इमाम पर जमानत की शर्त तोड़ने का आरोप

दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को कहा कि 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की कथित बड़ी साजिश के मामले में आरोपी शरजील इमाम ने मीडिया के संपर्क में आकर अपनी अंतरिम जमानत की एक शर्त का पहली नजर में उल्लंघन किया है. हालांकि, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी ने दिल्ली पुलिस की ओर से जमानत रद्द करने के लिए दायर अर्जी खारिज कर दी.

अदालत ने यह फैसला इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए लिया कि इमाम अपनी अंतरिम जमानत की अवधि समाप्त होने पर आत्मसमर्पण करने के लिए पहले ही लौट रहा था.

चचेरे भाई की शादी के लिए मिली थी जमानत

अदालत ने 22 सितंबर के आदेश के तहत शरजील इमाम को अपने चचेरे भाई की शादी में शामिल होने के लिए 4 से 10 अक्टूबर तक सात दिन की अंतरिम जमानत दी थी. इस दौरान उन पर कई शर्तें लगाई गई थीं.

इन शर्तों के तहत उन्हें सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने, किसी मीडियाकर्मी से संपर्क करने और परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों तथा मित्रों के अलावा किसी अन्य व्यक्ति से मिलने की अनुमति नहीं थी.

यूट्यूब और एक्स पर उपलब्ध वीडियो का हवाला

अभियोजन पक्ष ने जमानत की शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए एक यूट्यूब चैनल और सोशल मीडिया मंच एक्स पर उपलब्ध वीडियो का हवाला दिया. अभियोजन के अनुसार, एक समाचार चैनल की ओर से अपलोड किए गए वीडियो में शरजील इमाम के भाई को इंटरव्यू देते हुए दिखाया गया, जबकि शरजील इमाम भी उसी कमरे में मौजूद था.

दिल्ली पुलिस ने इसी आधार पर उनकी अंतरिम जमानत रद्द करने की मांग की थी. अदालत ने मीडिया से संपर्क के मामले में पहली नजर में शर्त का उल्लंघन तो माना, लेकिन जमानत रद्द करने का आदेश नहीं दिया.

शरजील इमाम के खिलाफ यह मामला 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़ी उस प्राथमिकी का हिस्सा है, जिसमें कथित बड़ी साजिश के आरोप लगाए गए हैं. मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप शामिल हैं.

ताहिर हुसैन दंगा करने का दोषी करार

इसी दिन दिल्ली की एक अन्य अदालत ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े दयालपुर क्षेत्र के एक मामले में आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को दंगा करने के आरोपों में दोषी ठहराया. हालांकि, अदालत ने उसके साथ मुकदमे का सामना कर रहे 12 अन्य आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया.

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने ताहिर हुसैन को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147 के तहत दंगा करने और धारा 109 के तहत दंगे के लिए उकसाने के आरोप में दोषी पाया. वहीं, उसके खिलाफ लगाए गए अन्य आरोपों से उसे बरी कर दिया गया.

अदालत ने दोषसिद्धि के बाद सजा की अवधि पर दलीलें सुनने के लिए अगली सुनवाई 16 नवंबर तय की है. इस मामले में विस्तृत आदेश आना अभी बाकी है.

किन आरोपियों को किया गया बरी?

इस मामले में कुल 13 आरोपी थे. ताहिर हुसैन के अलावा मोहम्मद शादाब, शाह आलम, रियासत अली, गुलफाम, राशिद, मोहम्मद रिहान, मोहम्मद आबिद, अरशद कय्यूम, इरशाद अहमद, दीपक सिंह सैनी, नवनीत और महक सिंह आरोपी थे.

सभी पर दंगा करने, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, आग लगाकर नुकसान पहुंचाने और आपराधिक साजिश सहित विभिन्न अपराधों के आरोप लगाए गए थे. अदालत ने ताहिर हुसैन को दो आरोपों में दोषी ठहराया, जबकि 12 सह-आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया. हुसैन को भी बाकी आरोपों से राहत मिली.

आप से निष्कासन, फिर AIMIM के टिकट पर लड़ा चुनाव

ताहिर हुसैन को फरवरी 2020 में आम आदमी पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था. उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों में उसकी कथित संलिप्तता को लेकर प्राथमिकी दर्ज होने के कुछ घंटे बाद पार्टी ने यह कदम उठाया था.

इसके बाद 2024 में वह असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) में शामिल हो गया था. उसने 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में AIMIM के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन उसे हार का सामना करना पड़ा.

अंकित शर्मा हत्याकांड में भी दोषी करार

ताहिर हुसैन के खिलाफ उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से संबंधित अन्य मामले भी चल रहे हैं. जुलाई में दिल्ली की एक अदालत ने आईबी कर्मी अंकित शर्मा की हत्या से जुड़े मामले में हुसैन और चार अन्य लोगों को दोषी ठहराया था.

दयालपुर क्षेत्र का मौजूदा मामला भी अंकित शर्मा के पिता रविंदर कुमार की शिकायत पर दर्ज प्राथमिकी से संबंधित है. इस मामले में हुसैन का नाम सामने आने के बाद आम आदमी पार्टी ने उसे निलंबित कर दिया था.

गौरतलब है कि फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी. इस हिंसा में कई अन्य लोग घायल हुए थे और बड़े पैमाने पर संपत्ति को नुकसान पहुंचा था. इन दंगों से जुड़े विभिन्न मामलों की न्यायिक कार्यवाही अलग-अलग स्तरों पर जारी है.

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