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RBI Monetary Policy-. आखिरी बार फरवरी, 2023 में केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में परिवर्तन किया था. तब से रेपो दर 6.5 फीसदी के उच्चस्तर पर बना हुआ है.
भारत ने पिछले वर्ष मजबूत आर्थिक विकास दर्ज किया है.
नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee Meeting) की 6 अगस्त से चल रही बैठक आज खत्म हो जाएगी. सुबह 10 बजे रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास (RBI Governor Shaktikanta Das) मौद्रिक नीति समिति द्वारा लिए गए निर्णयों की घोषणा करेंगे. विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई दर और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए RBI द्वारा इस बार भी रेपो रेट (Repo Rate) में बदलाव करने की संभावना बहुत कम है. यानी आपके होम और कार लोन की ईएमआई बढने की आशंका नहीं है. आखिरी बार फरवरी, 2023 में केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में परिवर्तन किया था. तब से रेपो दर 6.5 फीसदी के उच्चस्तर पर बना हुआ है.
भारत ने पिछले वर्ष मजबूत आर्थिक विकास दर्ज किया है. भारतीय रिजर्व बैंक ने भी वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए अपने जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान को पिछली मौद्रिक नीति समिति बैठक के 7 फीसदी से बढ़ाकर 7.2 फीसदी कर दिया था. हां, महंगाई के मोर्चे पर स्थिति थोड़ी चिंताजनक है. जून में सीपीआई (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक) मुद्रास्फीति चार महीने के उच्चतम स्तर 5.08 फीसदी पर पहुंच गई. इसी तरह खाद्य मुद्रास्फीति छह महीने के उच्चतम स्तर 9.36 फीसदी पर पहुंच गई.
क्या है विशेषज्ञों को उम्मीद
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस को उम्मीद है कि आरबीआई ब्याज दरों में किसी प्रकार का बदलाव नहीं करेगा. महंगाई दर आज भी ऊंचाई पर बनी है. आने वाले महीनों में इसमें संख्यात्मक रूप से कमी आएगी, लेकिन आधार प्रभाव के कारण यह अधिक बनी रहेगी.
इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर का कहना है कि वित्त वर्ष 2023-24 में उच्च वृद्धि, चालू वित्त वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही में 4.9 फीसदी की महंगाई दर के साथ मिलकर ब्याज दर में बदलाव नहीं करने के पक्ष में रुख बना रही है. उन्होंने कहा कि अगस्त, 2024 की बैठक में ब्याज दर में कटौती की गुंजाइश नहीं लग रही है.
अक्टूबर में घट सकती है ब्याज दर
अदिति नायर का कहना है कि अच्छे मानसून और वैश्विक या घरेलू झटकों की अनुपस्थिति में खाद्य मुद्रास्फीति अगर अनुकूल हो जाती है, तो अक्टूबर, 2024 में हम रेपो रेट में कटौती की उम्मीद कर सकते हैं. इसके बाद दिसंबर, 2024 और फरवरी, 2025 में ब्याज दरों में 0.25-0.25 फीसदी की कटौती हो सकती है.
