नई दिल्ली: दिल्ली के सरकारी स्कूल की छात्राओं ने अपनी प्रतिभा से कमाल कर दिखाया है. उन्होंने एक ऐसी ‘मैजिकल कॉपी’ तैयार की है, जिसमें लिखने के बाद उसे मिटाकर दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है. खास बात यह है कि यह कॉपी कभी खत्म नहीं होगी. इस पर एक व्यक्ति ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियां भी लिख सकती हैं. यह सुनकर आपको हैरानी हो सकती है. लेकिन यह सच है. दिल्ली के सर्वोदय कन्या विद्यालय, अशोक नगर की चार छात्राओं ने करीब एक साल की रिसर्च के बाद यह अनोखी कॉपी तैयार की है.
बाजार में बेचने की शुरुआत
यह कॉपी पूरी तरह इको फ्रेंडली है. छात्राओं ने इसे बाजार में बेचने की शुरुआत भी कर दी है. इससे उन्हें अच्छी कमाई भी होने लगी है. वेस्ट विनोद नगर स्थित राजकीय सर्वोदय कन्या विद्यालय में इनोवेशन और क्रिएशन पर आधारित एक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया था. छात्राओं ने इसमें अपनी मैजिकल कॉपी का प्रदर्शन किया. उनके इस क्रिएटिव आइडिया को देखकर हर कोई प्रभावित हुआ. प्रदर्शनी में मौजूद लोगों ने छात्राओं के प्रयास की जमकर तारीफ की.
छात्राओं ने शुरू किया स्टार्टअप
सर्वोदय कन्या विद्यालय की छात्राएं मानवी चौहान, जिया, पूजा, वंशिका और परी इस अनोखे स्टार्टअप से जुड़ी हैं. चारों छात्राएं 12वीं कक्षा में पढ़ती हैं और इस बार बोर्ड परीक्षा देने वाली हैं. मानवी चौहान ने बताया कि उन्होंने अपने ग्रुप का नाम ‘अल्ट्रा गैजेट ग्रुप’ रखा है. छात्राओं ने करीब एक साल तक इस बात पर विचार किया कि ऐसा कौन सा स्टार्टअप शुरू किया जाए, जो लंबे समय तक काम आए. साथ ही, जिसका इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा लोग कर सकें.
लिखावट मिटाकर दोबारा इस्तेमाल
इसी सोच के साथ चारों दोस्तों ने मिलकर रिसर्च शुरू की. रिसर्च के दौरान उन्होंने पाया कि आने वाले समय में कागज की खपत और उसके खत्म होने को लेकर चिंता बढ़ रही है. दूसरी तरफ, दुनिया तेजी से डिजिटल होती जा रही है. ऐसे में छात्राओं ने सोचा कि क्यों न ऐसी कॉपी तैयार की जाए, जिसे बार-बार इस्तेमाल किया जा सके. एक ही कॉपी पर कई लोग लिख सकें और उसे मिटाकर दोबारा इस्तेमाल किया जा सके. इसी विचार से उन्होंने ‘मैजिकल कॉपी’ बनाने का फैसला किया.
सभी पन्नों पर लेमिनेशन
इसके बाद छात्राओं ने 20 पन्ने लिए. सभी पन्नों पर लेमिनेशन करवाया गया. इसके बाद मार्कर की मदद से उन पर लिखने और डस्टर से मिटाने का प्रयोग शुरू किया गया. कई बार इस्तेमाल करने के बाद जब उन्हें लगा कि कॉपी ठीक तरीके से काम कर रही है, तो उन्होंने इसे बाजार में बेचने का फैसला किया. छात्राएं कॉपी-किताब बेचने वाली दुकानों पर पहुंचीं. उन्होंने दुकानदारों को अपनी बनाई हुई कॉपी दिखाई. कई दुकानदारों को उनका यह आइडिया पसंद आया. उन्होंने कॉपी को खरीदकर बेचने में रुचि दिखाई. इस तरह छात्राओं के स्टार्टअप की शुरुआत हो गई.
मैजिकल कॉपी में है मिनी वॉइस रिकॉर्डर
छात्राओं की बनाई यह मैजिकल कॉपी सिर्फ लिखने और मिटाने तक सीमित नहीं है. इसमें एक मिनी वॉइस रिकॉर्डर भी लगाया गया है. छात्रा मानवी चौहान के अनुसार, इसे खासतौर पर स्टूडेंट्स को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. उन्होंने बताया कि कई बार छात्रों को लंबे लेक्चर सुनने पड़ते हैं. ऐसे में स्टूडेंट इस मिनी वॉइस रिकॉर्डर को ऑन करके लेक्चर रिकॉर्ड कर सकते हैं. बाद में जरूरत के अनुसार रिकॉर्डिंग को दोबारा सुना जा सकता है. इससे पढ़ाई में भी मदद मिल सकती है.
कॉपी की कीमत 250 रुपये
मानवी ने बताया कि अब तक करीब 10 कॉपियां अलग-अलग दुकानों पर बेची जा चुकी हैं. इस कॉपी की कीमत 250 रुपये रखी गई है. छात्राओं के अनुसार, अब तक उन्हें करीब 3,000 से 5,000 रुपये तक का मुनाफा हो चुका है. चारों दोस्तों ने मिलकर इस मुनाफे को आपस में बांटा है. छात्राओं का कहना है कि उनका लक्ष्य केवल कॉपी बेचकर कमाई करना नहीं है. वे अपने इस इको फ्रेंडली आइडिया को आगे ले जाना चाहती हैं.
मैजिकल कॉपी का इस्तेमाल
छात्राओं को उम्मीद है कि आने वाले समय में उनकी मैजिकल कॉपी का इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा लोग करेंगे. इससे कागज की बचत होगी और बार-बार नई कॉपी खरीदने की जरूरत भी कम हो सकती है. अपने इनोवेशन के जरिए इन छात्राओं ने यह भी दिखाया है कि अगर सोच नई हो और मेहनत करने का जज्बा हो, तो स्कूल की पढ़ाई के साथ भी एक अच्छा स्टार्टअप शुरू किया जा सकता है.
