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Delhi Top 5 Famous Teachers: टीचर डे पर दिल्ली के 5 शिक्षकों की प्रेरणादायक कहानियां पढ़ने के बाद हर कोई उनकी तारीफ करेगा. थान सिंह, पूजा उदयन, कृष्ण कुमार, नमिता चौधरी और वृंदा खन्ना ने शिक्षा को बदलाव का जरिया बना दिया है. ये सभी लोग गरीब बच्चों को फ्री में पढ़ाते हैं.
शिक्षक सिर्फ वो नहीं, जो क्लासरूम में किताबों का ज्ञान दे, बल्कि वो है जो किसी की जिंदगी की दिशा बदल दे. कोई वर्दी की ड्यूटी के बाद गरीब बच्चों को पढ़ा रहा है, तो कोई अनाथ बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने में जुटा है. किसी ने संघर्ष के बीच पढ़ाने का सफर शुरू किया, तो कोई उम्र की परवाह किए बिना आज भी बच्चों को नई चीजें सिखा रहा है. इस टीचर डे पर आइए जानते हैं दिल्ली के ऐसे ही 5 शिक्षकों की प्रेरणादायक कहानियां, जिन्होंने पढ़ाई को सिर्फ शिक्षा नहीं, बल्कि बदलाव का जरिया बनाया.
दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल थान सिंह राजधानी में लाल किले के पास बच्चों को मुफ्त में पढ़ाते हैं. करीब 9 साल पहले, जब थान सिंह ने देखा कि बहुत से बच्चे सड़कों पर भीख मांग रहे हैं और काम कर रहे हैं, तब उन्होंने इसकी शुरुआत की. थान सिंह की शुरुआत आज एक बड़ा और पॉजिटव रूप ले चुकी है.
माता-पिता को महज 5 साल की उम्र में खोने वालीं पूजा उदयन ने अनाथालय से अपनी जिंदगी की नई शुरुआत की. आज वह अपने अनुभव के जरिए उन युवाओं को पढ़ाई, स्किल और रोजगार के लिए तैयार कर रही हैं, जिन्हें 18 साल की उम्र के बाद अक्सर सहारे की जरूरत होती है. पूजा ऐसे अनाथ और बेसहारा बच्चों को आगे बढ़ाने का काम कर रही.
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कृष्ण कुमार सुबह सरकारी स्कूल में बच्चों को पढ़ाते हैं और शाम को फुटपाथ पर रहने वाले बच्चों को शिक्षा देते है. उनका दिन सुबह 7 बजे शुरू होता है और रात देर तक चलता है. वह कहते हैं कि उनकी जिंदगी अब बेहद व्यस्त हो गई है, लेकिन रात को सोते समय यह संतोष रहता है कि वह किसी बच्चे का भविष्य बदलने की कोशिश कर रहे है.
नमिता चौधरी 13 साल से आर्थिक रूप से पिछड़े और बाहर से आए मज़दूरों के बच्चों को मुफ़्त में पढ़ा रही हैं. 5 बच्चों से शुरू हुई यह पढ़ाई अब 200 से ज़्यादा बच्चों की हो गई है. जिन बच्चों को उन्होंने पढ़ाया, वे अब MA कर चुके हैं और कॉम्पिटिटिव एग्ज़ाम की तैयारी कर रहे हैं. इसके अलावा, उन्होंने इन बच्चों की मांओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए पढ़ाया और मज़बूत बनाया है.
दिल्ली की वृंदा खन्ना न सिर्फ़ झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले ज़रूरतमंद बच्चों को पढ़ा रही हैं, बल्कि उन्हें सर्विस सेक्टर से जोड़कर आत्मनिर्भर भी बना रही हैं. वह झुग्गी-झोपड़ियों के उन बच्चों को स्कूल भेजने का काम करती हैं, जो गरीबी की वजह से स्कूल नहीं जा पाते हैं.
