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Noida Cyber Crime News: नोएडा में साइबर ठगों ने बुजुर्ग दंपत्ति को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने का डर दिखाकर 58.30 लाख रुपये ठग लिए. ठगों ने पहले खुद को एयरटेल कर्मचारी बताया, फिर आधार कार्ड और बैंक खाते का इस्तेमाल अपराध में होने की बात कही.
नोएडा में साइबर फ्रॉड.
नोएडा: यूपी के नोएडा में साइबर अपराधियों ने एक बुजुर्ग दंपति को फंसाकर उनसे 58.30 लाख रुपये ठग लिए. आरोपियों ने पहले फोन कर डर का माहौल बनाया और फिर WhatsApp कॉल और मैसेज के जरिए दंपति को अपने कब्जे में रखा. आरोपियों ने बुजुर्गों से जांच के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में रुपए ट्रांसफर करवाए. यह खेल लगभग आठ दिनों तक चलता रहा. अपराधी इतने शातिर थे कि उन्होंने बुजुर्ग दंपत्ति को यह यकीन तक दिला दिया था कि जांच पूरी होते ही यह पैसे वापस कर दिए जाएंगे.
सबसे पहले लैंडलाइन पर फोन किया
मामला नोएडा के सेक्टर-137 स्थित पारस टियरा सोसाइटी का है. यहां रहने वाले बुजुर्ग दंपति में पति जूते बनाने वाली एक नामी कंपनी से वरिष्ठ पद से रिटायर हैं. बात है 11 अगस्त की जब उनके घर लैंडलाइन नंबर पर एक अनजान व्यक्ति का फोन आया. फोन उनकी पत्नी ने उठाया. कॉल करने वाले ने कहा कि मेरा नाम विजय कुमार वर्मा है और मैं एयरटेल कंपनी में कर्मचारी हूं. साइबर अपराधियों ने यहां से ठगी का जाल बिछाना शुरू किया. बातचीत करते-करते आरोपी ने महिला का नाम बताया और जब महिला ने इसकी पुष्टि कर दी तो उसे लगा कि सामने वाला कंपनी का कर्मचारी ही है.
आधार और बैंक खाते को मनी लॉन्ड्रिंग केस से जोड़ा
कॉलर ने महिला को बताया कि उनके आधार कार्ड और उनके नाम से जुड़े केनरा बैंक के एटीएम कार्ड का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में हुआ है. आरोपी ने दावा किया कि मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में 247 आधार कार्ड मिले हैं और उनमें से एक आधार कार्ड उनका भी है. इसके बाद उसने महिला से नरेश गोयल नाम के एक व्यक्ति के बारे में पूछा. महिला ने उसे पहचानने से इनकार कर दिया. यहीं से साइबर अपराधियों ने डर को और बढ़ा दिया. दंपति को यह भरोसा दिलाने की कोशिश की गई कि मामला बेहद गंभीर है और उनका नाम भी जांच में आ गया है.
फोन से WhatsApp तक पहुंच गए ठग
शुरुआत लैंडलाइन फोन से हुई थी, लेकिन इसके बाद साइबर अपराधियों ने WhatsApp का सहारा लिया. कॉल और मैसेज के जरिए दंपति से लगातार संपर्क किया गया. आरोपियों ने उन्हें इस तरह से डराया कि दंपति किसी दूसरे व्यक्ति से मदद लेने के बजाय उन्हीं लोगों के निर्देशों का पालन करते रहे. साइबर ठगों ने जांच के नाम पर दंपति को भरोसा दिलाया कि अगर वे बताए गए खातों में पैसे ट्रांसफर कर देंगे तो जांच पूरी होने के बाद रकम वापस कर दी जाएगी.
जांच के नाम पर खाते खाली करवाए
इसके बाद दंपति से एक बार में नहीं, बल्कि कई बार पैसे ट्रांसफर करवाए गए. 12 से 19 अगस्त के बीच कुल सात बार में 58.30 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में भेजे गए. पुलिस को दी गई जानकारी के मुताबिक, दंपति के एक एसबीआई खाते से कुल 44.50 लाख रुपये ट्रांसफर हुए. इसमें 12 अगस्त को 10 लाख, 13 अगस्त को 10 लाख, 14 अगस्त को दो अलग-अलग खातों में 10-10 लाख, 18 अगस्त को 10 लाख और 19 अगस्त को 4.50 लाख रुपये भेजे गए.
इसके अलावा संयुक्त एसबीआई खाते से 14 अगस्त को 10 लाख और 18 अगस्त को 3.80 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए. इस खाते से कुल 13.80 लाख रुपये गए. इस तरह कुल रकम 58.30 लाख रुपये पहुंच गई.
पैसा मिलते ही ठगों ने संपर्क तोड़ा
दंपति को लगातार यह भरोसा दिया गया था कि जांच पूरी होने के बाद उनका पैसा वापस कर दिया जाएगा. जब उन्होंने अपनी रकम वापस मांगी तो साइबर अपराधियों ने बातचीत बंद कर दी. इसके बाद बुजुर्ग दंपति को समझ आया कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं. उन्होंने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई. मामले में नोएडा साइबर थाना पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. पुलिस उन बैंक खातों की जानकारी जुटा रही है, जिनमें रकम ट्रांसफर की गई. खातों को फ्रीज कराने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है.
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अभिजीत चौहान, News18 Hindi के डिजिटल विंग में सब-एडिटर हैं. वर्तमान में अभिजीत उत्तर प्रदेश की राजनीति, सामाजिक मुद्दों, क्राइम, ब्रेकिंग न्यूज और वायरल ख़बरें कवरेज कर रहे हैं. AAFT कॉलेज से पत्रकारिता की मास्…
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