दिल्ली यूनिवर्सिटी के हॉस्टल संकट की सच्चाई: 2.5 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स और रहने के लिए चंद कमरे

नई दिल्ली (Delhi University Hostel Crisis). देश के कोने-कोने से लाखों स्टूडेंट्स अच्छी पढ़ाई का सपना लेकर दिल्ली यूनिवर्सिटी पहुंचते हैं. इन स्टूडेंट्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है रहने के लिए सुरक्षित और किफायती ठिकाना खोजना. महंगे प्राइवेट पीजी और फ्लैट्स का खर्च हर परिवार के बस की बात नहीं होती. ऐसे में यूनिवर्सिटी के हॉस्टल ही स्टूडेंट्स और उनके अभिभावकों का सबसे बड़ा सहारा बनते हैं. लेकिन सीटों की भारी कमी के कारण यह सहारा हर किसी को नसीब नहीं हो पाता है.

हाल ही में दिल्ली विश्वविद्यालय ने अपने हॉस्टल की उपलब्धता और क्षमता को लेकर जो आंकड़े सामने रखे हैं, उनसे समस्या काफी गंभीर नजर आती है. हाल ही में दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी की बिल्डिंग ढहने से कई स्टूडेंट्स की जान चली गई. इसके बाद से स्टूडेंट्स की सुरक्षा और आवास की भारी किल्लत पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं. जानिए डीयू प्रशासन हॉस्टल संकट से निपटने के लिए क्या योजना बना रहा है और क्यों यह नया विस्तार भी स्टूडेंट्स की कुल मांग के मुकाबले ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है.

Delhi University Hostel Crisis: कुल मांग का सिर्फ 5% हिस्सा ही पूरा कर पाएगा डीयू का नया हॉस्टल प्लान

दिल्ली विश्वविद्यालय की तरफ से जारी किए गए नए आंकड़ों के अनुसार, यूनिवर्सिटी कैंपस में हॉस्टल सीटों को बढ़ाने की योजना पर काम चल रहा है. जानिए इस योजना और आंकड़ों का हर पहलू.

मौजूदा स्थिति और प्रस्तावित हॉस्टल विस्तार

डीयू के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, फिलहाल यूनिवर्सिटी और उसके कॉलेजों को मिलाकर कुल 7,210 हॉस्टल सीटें उपलब्ध हैं. इनमें से 3,422 सीटें यूनिवर्सिटी लेवल के हॉस्टल में और 3,788 सीटें अलग-अलग कॉलेजों के पास हैं. अब दिल्ली यूनिवर्सिटी ने कुल 5,544 नई सीटें जोड़ने का प्रस्ताव रखा है. इनमें 3,922 सीटें यूनिवर्सिटी स्तर पर और 1,622 सीटें विभिन्न कॉलेजों में बनाई जाएंगी. इन नए और पुराने आंकड़ों को मिला लें तो आने वाले समय में कुल 12,754 सीटें हो जाएंगी.

नया विस्तार भी क्यों नाकाफी है?

दिल्ली यूनिवर्सिटी की लेटेस्ट एनुअल रिपोर्ट के अनुसार, डीयू में नियमित (Regular) स्टूडेंट्स की कुल संख्या 2,51,474 है (इसमें ओपन और डिस्टेंस लर्निंग के स्टूडेंट्स शामिल नहीं हैं). अगर स्टूडेंट्स की इतनी बड़ी संख्या से तुलना की जाए तो प्रस्तावित 12,754 सीटें कुल जरूरत का बमुश्किल 5 प्रतिशत हिस्सा ही पूरा कर पाएंगी. इसका मतलब है कि भारी-भरकम विस्तार के बाद भी 95 प्रतिशत से ज्यादा स्टूडेंट्स को बाहर ही रहना पड़ेगा, जो बहुत बड़ी चिंता का विषय है.

पाइपलाइन में कौन-से बड़े प्रोजेक्ट्स हैं?

राहत की बात है कि कई बड़े हॉस्टल प्रोजेक्ट्स पर काम तेजी से चल रहा है. ढाका कॉम्प्लेक्स में 1,450 सीटों वाला ‘इंस्टीट्यूट ऑफ एमीनेंस’ हॉस्टल लगभग बनकर तैयार है. इसके अलावा महिलाओं के लिए 1,000 सीटों वाला ‘निर्भया रेजिडेंशियल अकोमोडेशन’ और 1,050 सीटों वाला स्टूडियो अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स भी तैयार किया जा रहा है. इन प्रोजेक्ट्स के पूरा होने से कुछ हद तक राहत जरूर मिलेगी.

सुरक्षा को लेकर कॉलेजों को सख्त निर्देश

हाल ही में एक दर्दनाक इमारत ढहने की घटना में डीयू के 5 स्टूडेंट्स समेत 7 लोगों की जान चली गई थी. इसके बाद स्टूडेंट्स आवास की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे हैं. इसे देखते हुए दिल्ली यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सभी कॉलेज प्रिंसिपल्स को सख्त निर्देश दिए हैं. उन्हें अपने कैंपस में मौजूदा आवासीय सुविधाओं की सुरक्षा जांच करने, चल रहे हॉस्टल प्रोजेक्ट्स को जल्द पूरा करने और नए हॉस्टल बनाने की संभावनाओं पर काम करने को कहा गया है.

सरकार को भेजे जाएंगे और नए प्रस्ताव

दिल्ली यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि आने वाले दिनों में स्टूडेंट्स की आवास समस्या को दूर करने के लिए केंद्र और संबंधित विभागों को कुछ और नए प्रोजेक्ट्स के प्रस्ताव भेजे जा सकते हैं. हालांकि, जब तक डीयू में सीटों की संख्या और प्राइवेट पीजी के बढ़ते किराए पर लगाम नहीं लगती, तब तक बाहर से आने वाले छात्रों के लिए दिल्ली में रहना बड़ा संघर्ष बना रहेगा.

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