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दिल्ली पुलिस और यूपी पुलिस के इन दो अफसरों ने बनाया एक ऐसा ग्रुप, जिसमें उन्होंने जोड़ा ऑनलाइन 12 हज़ार देश के अलग-अलग पुलिस स्टेशनों का नेटवर्क. अपराधी भी अब इस ग्रुप से अब खा रहे हैं खौफ. जानिए कौन सा है यह ग्रुप और किस तरह का सिस्टम इन दो पुलिसकर्मियों ने मिलकर तैयार किया, जिसके माध्यम से अभी तक यह 4 हज़ार से ज्यादा केस सॉल्व कर चुके हैं.
दिल्ली: आमतौर पर पुलिस और उसके काम करने के तरीके को लेकर समाज में कई तरह के सवाल उठते रहते हैं. लेकिन एक पुलिसकर्मी का काम कितना चुनौतीपूर्ण और जिम्मेदारी भरा होता है, यह बहुत कम लोग समझ पाते हैं. ऐसे में जब कोई पुलिस अधिकारी अपनी ड्यूटी से आगे बढ़कर समाज और पुलिस व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नई पहल करता है और उसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आते हैं, तो ऐसे प्रयासों को सामने लाना जरूरी हो जाता है. इसी कड़ी में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के एसीपी राजपाल डबास और उत्तर प्रदेश पुलिस के सेवानिवृत्त डीएसपी विनोद सिंह ने वर्ष 2014 में एक अनोखी पहल की शुरुआत की. उन्होंने एक ऐसा नेटवर्क तैयार किया, जिसका उद्देश्य अपराध पर नियंत्रण पाना, अपराधियों को जल्द पकड़ना और देशभर की पुलिस व्यवस्था को एक मंच पर लाकर बेहतर समन्वय स्थापित करना था. आज यह पहल एक सफल मॉडल के रूप में सामने आ रही है.
नेशनल पुलिस ग्रुप: सोशल मीडिया से जुड़ा बड़ा नेटवर्क
एसीपी राजपाल डबास के अनुसार, वर्ष 2014 में उन्होंने ‘नेशनल पुलिस ग्रुप’ की शुरुआत की थी. उस समय व्हाट्सएप पर एक ग्रुप में सीमित संख्या में ही सदस्य जोड़े जा सकते थे, इसलिए उन्होंने अलग-अलग पुलिस स्टेशनों के पुलिसकर्मियों को जोड़कर कई ग्रुप बनाए. इसका उद्देश्य यह था कि यदि किसी क्षेत्र में अपराध होता है और आरोपी वहां से भाग जाता है, तो उसकी जानकारी तुरंत इन ग्रुप्स में साझा कर दी जाए, ताकि दूसरे जिलों या राज्यों की पुलिस भी सतर्क हो सके और आरोपी को पकड़ने में मदद मिल सके.
करीब 10 हजार पुलिसकर्मी शामिल
समय के साथ यह पहल तेजी से बढ़ती गई. आज इस नेटवर्क के अंतर्गत करीब 100 व्हाट्सएप ग्रुप और लगभग 77 टेलीग्राम ग्रुप सक्रिय हैं, जिनमें देशभर के हजारों पुलिसकर्मी जुड़े हुए हैं. इसके अलावा फेसबुक पर भी एक बड़ा ग्रुप संचालित किया जा रहा है, जिसमें करीब 50 हजार पुलिसकर्मी शामिल हैं. इस नेटवर्क की मदद से अब तक करीब 4 हजार से अधिक मामलों को सुलझाया जा चुका है. कई बड़े अपराधी और संगठित अपराध से जुड़े गिरोह भी इसी नेटवर्क के जरिए पकड़े गए हैं. यह पहल पुलिस के बीच बेहतर समन्वय और तेज कार्रवाई का एक प्रभावी उदाहरण बनकर सामने आई है.
12 हजार थानों को जोड़ने का लक्ष्य
एसीपी राजपाल डबास ने बताया कि शुरुआत में इस नेटवर्क में केवल दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत के कुछ अन्य राज्यों की पुलिस को ही जोड़ा गया था. लेकिन अब यह नेटवर्क देश के लगभग हर हिस्से तक फैल चुका है. दक्षिण भारत से लेकर पूर्वोत्तर राज्यों तक के पुलिसकर्मी भी इस प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं. उन्होंने बताया कि अब तक करीब 12 हजार पुलिस थानों को इस ऑनलाइन नेटवर्क से जोड़ा जा चुका है. उनका लक्ष्य है कि अगले एक वर्ष के भीतर देश के सभी पुलिस थानों को इस नेटवर्क से जोड़ दिया जाए, ताकि सूचना का आदान-प्रदान और भी तेज और प्रभावी हो सके.
बिना सरकारी मदद मिली सफलता
इस पहल की खास बात यह है कि इसे बिना किसी औपचारिक सरकारी मदद के शुरू किया गया और आगे बढ़ाया गया. हालांकि वरिष्ठ अधिकारी इस प्रयास से अवगत हैं और नैतिक समर्थन भी देते हैं, लेकिन यह पूरी तरह पुलिसकर्मियों के आपसी सहयोग और समन्वय से संचालित हो रहा है. एसीपी राजपाल डबास का कहना है कि इस सिस्टम को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य पुलिसकर्मियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना और अपराध पर तेजी से नियंत्रण पाना था. आज यह पहल न केवल पुलिस के काम को आसान बना रही है, बल्कि देशभर में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभा रही है.
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न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें
