Agriculture Tips: केले के तने को कचरा समझकर न फेंकें, 45 दिन में ऐसे बनाएं ‘सुपर खाद’, जानें पूरी प्रक्रिया

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केले के तने को कचरा समझकर न फेंकें, 45 दिन में ऐसे बनाएं सुपर खाद, जानें…

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Banana Waste Organic Fertilizer: क्या आप जानते हैं कि केले के वेस्ट (अवशेष) से भी वर्मी कंपोस्ट बनाया जाता है? करीब 45 दिनों की प्रक्रिया के बाद तैयार होने वाली इस खाद की बाजार में काफी अच्छी मांग है. रिटेल में इसकी कीमत ₹15 प्रति किलो तक बताई जा रही है. आखिर केले के वेस्ट से कैसे बनती है यह खाद और क्या है इसकी पूरी प्रक्रिया? जानिए इस रिपोर्ट में.

बेगूसराय: क्या आप जानते हैं ? केले के वेस्टेज से भी सुपर खाद बनाया जा सकता है जो यूरिया तो छोड़िए NPK को टक्कर देती है. लोकल 18 पर जानिए केला के पेड़ या खेत में पड़े केले के तने से खाद बनाने की विधि. बिहार के बेगूसराय में इसी केले के वेस्ट से ऐसी खाद तैयार की जा रही है. जिसकी खेती और गार्डनिंग में अच्छी मांग बताई जा रही है. खास बात यह है कि केले के फाइबर निकालने के बाद बचने वाले वेस्ट को करीब 45 दिनों की प्रक्रिया से गुजारकर वर्मी कंपोस्ट तैयार किया जाता है. केले के पौधे की खासियत है कि इसके फल से लेकर तना और जड़ तक अलग-अलग तरीके से इस्तेमाल किए जा सकते हैं.

फाइबर निकालने के बाद बचता है वेस्ट
लोकल 18 पर राकेश कुमार बताते हैं कि केले के पौधे से फाइबर निकालने के दौरान बड़ी मात्रा में वेस्ट निकलता है. सामान्य तौर पर यह वेस्ट बेकार समझा जा सकता है, लेकिन इसे सही तरीके से प्रोसेस कर वर्मी कंपोस्ट बनाने में इस्तेमाल किया जाता है. उनके मुताबिक केले के वेस्ट से तैयार खाद को खेती के लिए काफी उपयोगी माना जाता है. इसका इस्तेमाल केला समेत दूसरी फसलों और गमलों में भी किया जा सकता है. जैविक खेती और गार्डनिंग का चलन बढ़ने के साथ ऐसी खाद की मांग भी बढ़ रही है.

45 दिन में तैयार होती है खाद
केले के वेस्ट से वर्मी कंपोस्ट तैयार करने की पूरी प्रक्रिया करीब 45 दिनों की बताई गई है. इसे अलग-अलग चरणों में तैयार किया जाता है. सबसे पहले केले के वेस्ट को प्री-स्टेज में रखा जाता है. इस चरण में वेस्ट को करीब 15 दिनों तक धूप में रखा जाता है, ताकि उसमें आवश्यक गर्मी पैदा हो सके और आगे की प्रक्रिया के लिए यह तैयार हो जाए. इसके बाद इसे अगले चरण में ले जाकर वर्मी कंपोस्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की जाती है. निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद खाद को छानकर यानी फिल्ट्रेशन करके तैयार किया जाता है, ताकि इस्तेमाल के लिए उपयुक्त खाद मिल सके. पूरी प्रक्रिया आप लोकल 18 पर देखकर समझ सकते हैं.

खेती से लेकर गमले तक में इस्तेमाल
राकेश के मुताबिक तैयार वर्मी कंपोस्ट का इस्तेमाल खेती के साथ-साथ घर की बागवानी में भी किया जा सकता है. आजकल शहरों और गांवों में गार्डनिंग का चलन बढ़ा है. लोग घर की छत, बालकनी और छोटे गार्डन में सब्जियां, फूल और दूसरे पौधे लगा रहे हैं. ऐसे में जैविक खाद की मांग भी बढ़ी है. केले के वेस्ट से बनने वाली इस खाद को फसलों के लिए उपयोगी जैविक खाद के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है. खासकर उन किसानों और लोगों के लिए यह विकल्प आकर्षक हो सकता है, जो रासायनिक खाद के साथ जैविक खाद का इस्तेमाल करना चाहते हैं.

₹7 से ₹12 किलो तक होलसेल कीमत
राकेश कुमार ने लोकल 18 पर बताया बाजार में इस खाद की अच्छी मांग है. उन्होंने बताया कि इसकी होलसेल कीमत करीब ₹7 से ₹12 प्रति किलो तक हो सकती है, जबकि रिटेल बाजार में यह करीब ₹15 प्रति किलो तक बिकती है. यानी केले के फाइबर प्रोसेसिंग से निकलने वाला वेस्ट सिर्फ कचरा नहीं रह जाता, बल्कि उसे सही तरीके से प्रोसेस कर अतिरिक्त उत्पाद और कमाई का जरिया बनाया जा सकता है. इतना ही नहीं इस खाद के खरीदारों की बात करें तो मुख्य रूप से दो तरह के ग्राहक सामने आते हैं. एक तरफ किसान हैं, जो खेती में जैविक खाद के तौर पर इसका इस्तेमाल कर सकते हैं. वहीं दूसरी तरफ गार्डनिंग करने वाले लोग भी इसके संभावित खरीदार हैं.

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Amit Ranjan

अमित रंजन वर्तमान में News18 में बिहार, झारखंड और दिल्ली से जुड़ी खबरों के समन्वय और संपादन का कार्य देख रहे हैं. खोजी पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है. राजनीति, शिक्षा, खेल, क्राईम और मौसम जैसे विषयों …

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