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जेएनयू में 11 छात्राओं द्वारा एक प्रोफेसर पर लगाए गए यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों के बाद हड़कंप मच गया है. सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद दिल्ली महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन को कड़ा नोटिस थमाया है. आयोग ने तीन दिन के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगते हुए आंतरिक शिकायत समिति की मौजूदा जांच स्थिति पर जवाब तलब किया है.
जेएनयू प्रोफेसर पर यौन उत्पीड़न का आरोप. (File Photo : PTI)
नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में एक गंभीर विवाद खड़ा हो गया है. संस्थान के एक प्रोफेसर पर 11 छात्राओं ने यौन उत्पीड़न के संगीन आरोप लगाए हैं. छात्राओं का कहना है कि उन्होंने मई 2026 में ही कुलपति को लिखित शिकायत सौंप दी थी. इसके बावजूद महीनों बीत जाने के बाद भी आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. सोशल मीडिया पर छात्राओं का वीडियो वायरल होते ही मामला पूरी तरह गरमा गया. इस पूरे विवाद का दिल्ली महिला आयोग ने तुरंत स्वतः संज्ञान ले लिया. आयोग ने जेएनयू प्रशासन को सख्त नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर पूरी रिपोर्ट तलब कर ली है.
क्या आरोपी प्रोफेसर को बचाने की कोशिश कर रहा है प्रशासन?
पीड़ित छात्राओं ने जेएनयू प्रशासन पर आरोपी प्रोफेसर को बचाने का खुला आरोप लगाया है. छात्राओं का कहना है कि मई के महीने में शिकायत दर्ज होने के तुरंत बाद करीब 45 दिनों का सेमेस्टर अवकाश हो गया था. जुलाई के मध्य में कक्षाएं दोबारा शुरू होने के बाद भी मामले में चुप्पी साध ली गई. किसी भी स्तर पर छात्राओं को न्याय दिलाने के लिए ठोस कदम नहीं दिखे. इस सुस्त रवैये से नाराज होकर छात्राओं ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखी. इसके बाद पूरा मामला सार्वजनिक होते ही आयोग के संज्ञान में आ गया.
पॉश एक्ट के तहत क्या आईसीसी ने सही तरीके से जांच की?
दिल्ली महिला आयोग ने कुलपति को नोटिस भेजकर तीखे सवाल पूछे हैं. आयोग ने साफ तौर पर पूछा है कि क्या छात्राओं की शिकायत को ‘यौन उत्पीड़न की रोकथाम (पॉश) अधिनियम’ के तहत गठित आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) को भेजा गया था. अगर मामला आईसीसी के पास गया, तो अब तक की कार्यवाही की मौजूदा स्थिति क्या है. समिति ने किन गवाहों के बयान दर्ज किए और जांच कहां तक पहुंची है. आयोग ने तीन दिन के भीतर पूरी ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ सौंपने का अल्टीमेटम दिया है.
कार्रवाई में देरी हुई तो क्या जेएनयू को देना होगा जवाब?
आयोग की सदस्य लता गुप्ता ने कहा है कि ऐसे मामलों में बिल्कुल निष्पक्ष और बेहद तेज कार्रवाई की जरूरत होती है. आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर अब तक आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया गया है, तो प्रशासन को इसकी पुख्ता वजह बतानी होगी. महिला आयोग ने फिलहाल आरोपों को अंतिम सच नहीं माना है. आयोग जेएनयू प्रशासन से वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट मिलने के बाद ही तथ्यों के आधार पर आगे का एक्शन तय करेगा.
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दीपक वर्मा की गिनती डिजिटल मीडिया के सबसे तेज और उभरते हुए चेहरों में होती है. वह न्यूज18 हिंदी के साथ डिप्टी न्यूज एडिटर के तौर पर जुड़े हैं. दीपक ने अपने करियर में कई बड़े मुकाम हासिल किए हैं…
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