संविधान सभा से अनुच्छेद 343 तक का सफर, शिवाजी कॉलेज में राजभाषा के इतिहास पर विमर्श

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संविधान सभा से अनुच्छेद 343 तक का सफर, शिवाजी कॉलेज में राजभाषा पर विमर्श

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शिवाजी कॉलेज में हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में ‘राजभाषा : संवैधानिक प्रावधान एवं राजनीतिक आकांक्षाएं’ विषय पर एक भव्य राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया. इस महामंथन में प्रख्यात शिक्षाविदों और विद्यार्थियों ने हिंदी की संवैधानिक यात्रा, 14 सितंबर 1949 के ऐतिहासिक फैसलों, संविधान के अनुच्छेद 343 और राष्ट्रीय एकता में भाषा की भूमिका पर बेहद सारगर्भित चर्चा की.

शिवाजी कॉलेज में ‘राजभाषा’ को लेकर वर्कशॉप के साथ हिंदी दिवस का आयोजन किया गया.

नई दिल्ली. प्रिंसिपल प्रो. वीरेंद्र भारद्वाज के मार्गदर्शन एवं संरक्षण में दिल्ली विश्वविद्यालय के शिवाजी कॉलेज द्वारा हिंदी दिवस के अवसर पर ‘राजभाषा : संवैधानिक प्रावधान एवं राजनीतिक आकांक्षाएँ’ विषय पर संगोष्ठी एवं कार्यशाला का आयोजन पेशवा बाजीराव सभागार में किया गया. इस कार्यक्रम का आयोजन आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के तत्वावधान में राजभाषा कार्यान्वयन समिति, बी.ए. कार्यक्रम तथा राजनीति विज्ञान विभाग के संयुक्त सहयोग से किया गया. कार्यक्रम में प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों ने भाग लिया. संगोष्ठी में राजभाषा के रूप में हिंदी की संवैधानिक स्थिति, उसके ऐतिहासिक एवं साहित्यिक विकास तथा भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय एकता और भाषायी विविधता के साथ उसके व्यापक संबंधों पर सार्थक विचार-विमर्श किया गया.

राजभाषा कार्यान्वयन समिति के आयोजक एवं संयोजक डॉ. तरुण ने हिंदी दिवस के महत्त्व पर अपने स्वागत एवं परिचयात्मक वक्तव्य में विचार व्यक्त किए. उन्होंने उपस्थित अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए प्राचार्य प्रो. वीरेंद्र भारद्वाज के मार्गदर्शन के प्रति आभार व्यक्त किया तथा डॉ. ओम जी उपाध्याय एवं प्रो. सुधा सिंह की गरिमामयी उपस्थिति का उल्लेख किया. उनके वक्तव्य ने आगे होने वाले अकादमिक विचार-विमर्श की पृष्ठभूमि तैयार की. अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. वीरेंद्र भारद्वाज ने प्रो. सुधा सिंह एवं डॉ. ओम जी उपाध्याय का सभा से परिचय कराया तथा राजभाषा के रूप में हिंदी के ऐतिहासिक एवं संवैधानिक महत्त्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने हिंदी दिवस एवं हिंदी माह के व्यापक संदर्भ में इस आयोजन की प्रासंगिकता को रेखांकित किया.

प्रो. भारद्वाज ने संघ की राजभाषा के संबंध में संविधान सभा में हुए ऐतिहासिक विचार-विमर्श तथा 14 सितंबर 1949 के निर्णय का उल्लेख किया. उन्होंने संविधान निर्माण की प्रक्रिया और के. एम. मुंशी की भूमिका का संदर्भ देते हुए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343 की ओर ध्यान आकृष्ट किया तथा राजभाषा के रूप में हिंदी को प्राप्त संवैधानिक स्थिति को स्पष्ट किया. प्रो. सुधा सिंह ने संस्कृति, परंपरा एवं राष्ट्रबोध के माध्यम के रूप में हिंदी की भूमिका पर सारगर्भित वक्तव्य दिया. कार्यक्रम को डॉ. ओम जी उपाध्याय के संबोधन से भी समृद्धि मिली. उन्होंने हिंदी से संबंधित विभिन्न संवैधानिक प्रावधानों पर चर्चा करते हुए समकालीन भारतीय अकादमिक एवं सार्वजनिक जीवन में हिंदी की स्थिति पर विचार व्यक्त किए. उन्होंने इस धारणा को दूर करने की आवश्यकता पर बल दिया कि हिंदी किसी भी प्रकार से गौण अथवा कमतर भाषा है.

इस प्रकार संगोष्ठी एवं कार्यशाला में राजभाषा, मातृभाषा, संवैधानिक प्रावधान, भाषायी विकास, साहित्यिक इतिहास, सांस्कृतिक अस्मिता, भाषायी बहुलता और राष्ट्रीय एकता जैसे विषयों के विभिन्न परस्पर संबद्ध आयामों पर विचार-विमर्श हुआ. विचार-विमर्श में हिंदी को केवल संप्रेषण के माध्यम के रूप में न देखकर भारत की विविध सांस्कृतिक एवं भाषायी परंपराओं में गहराई से अंतर्निहित एक निरंतर विकसित होने वाली भाषा के रूप में प्रस्तुत किया गया. कार्यक्रम का आयोजन डॉ. तरुण द्वारा किया गया. श्री स्कंद प्रिय एवं डॉ. रवि सह-आयोजक रहे.

कार्यक्रम का समापन डॉ. रवि द्वारा औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ. इस अवसर पर प्राचार्य, विशिष्ट वक्ताओं एवं अतिथियों, आयोजकों, संकाय सदस्यों, विद्यार्थियों तथा कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से सहयोग देने वाले सभी व्यक्तियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया गया. शिवाजी कॉलेज में हिंदी दिवस एवं हिंदी माह के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम ने हिंदी की संवैधानिक स्थिति, ऐतिहासिक विकास एवं समकालीन प्रासंगिकता पर अकादमिक एवं सांस्कृतिक विमर्श के लिए एक सार्थक मंच प्रदान किया. साथ ही, इस आयोजन ने भारत की समृद्ध भाषायी विरासत के सम्मान एवं संरक्षण के महत्त्व को पुनः रेखांकित किया.

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राकेश रंजन कुमार

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…

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