दिल्ली में यमुना को साफ और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार ने नई कार्ययोजना पर काम तेज कर दिया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को यमुना पुनर्जीवीकरण परियोजना की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की. बैठक में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल, दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकारों के प्रतिनिधियों के साथ कई मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. बैठक में यमुना की सफाई को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए, जिनमें दिल्ली की गौशालाओं और डेयरियों से निकलने वाले गोबर को सीधे गैस और खाद संयंत्रों तक पहुंचाने की योजना प्रमुख रही.
बैठक में अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वच्छ और निर्मल यमुना सरकार का संकल्प है. उन्होंने जोर देकर कहा कि यमुना की सफाई का काम अलग-अलग विभागों या राज्यों के स्तर पर नहीं, बल्कि एकीकृत कार्ययोजना और टीम भावना के साथ किया जाना चाहिए. शाह ने कहा कि दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरकारों को सभी संबंधित मंत्रालयों के साथ मिलकर काम करना होगा, तभी यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने का लक्ष्य समय पर हासिल किया जा सकेगा.
क्या है सरकार का प्लान
यमुना प्रदूषण की सबसे बड़ी वजहों में डेयरियों और गौशालाओं से निकलने वाला अपशिष्ट भी शामिल है. इसे रोकने के लिए बैठक में तय किया गया कि दिल्ली नगर निगम (MCD) और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के बीच एक MoU साइन किया जाएगा. इसके तहत डेयरियों और गौशालाओं से निकलने वाले गोबर और अन्य जैविक कचरे को वैज्ञानिक तरीके से एकत्र कर गोबर गैस और जैविक खाद बनाने वाले संयंत्रों तक पहुंचाया जाएगा. इससे एक तरफ यमुना में गंदगी का प्रवाह कम होगा, वहीं दूसरी ओर कचरे से ऊर्जा और खाद तैयार की जा सकेगी.
अफसरों को दिए निर्देश
गृह मंत्री ने NDDB मॉडल को यमुना सफाई अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि इससे यमुना किनारे कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि डेयरी और गौशालाओं के अपशिष्ट का निस्तारण ऐसी व्यवस्था के तहत किया जाए, जिससे वह किसी भी स्थिति में नदी तक न पहुंचे. सरकार का मानना है कि यह मॉडल दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन में भी मददगार साबित होगा.
यमुना की डीसिल्टिंग की समीक्षा
बैठक में यमुना की डीसिल्टिंग यानी नदी की तलहटी में जमा गाद हटाने के काम की भी समीक्षा की गई. अमित शाह ने निर्देश दिए कि डीसिल्टिंग का काम तेजी से पूरा किया जाए और निकाली गई गाद का उपयोग विभिन्न निर्माण और विनिर्माण परियोजनाओं में किया जाए. उनका कहना था कि यदि गाद को किनारों पर छोड़ दिया गया तो बारिश के दौरान वह दोबारा नदी में पहुंच सकती है. इसलिए उसका वैज्ञानिक और व्यावहारिक उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए.
इसके अलावा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STPs), औद्योगिक अपशिष्ट और नालों से होने वाले प्रदूषण पर भी विशेष चर्चा हुई. गृह मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जमीन पर परिणाम दिखाई देने चाहिए. उन्होंने कहा कि STPs की कार्यक्षमता, उद्योगों से निकलने वाले अपशिष्ट और नालों के डिस्चार्ज की लगातार निगरानी की जाए ताकि यमुना में प्रदूषित पानी पहुंचने से रोका जा सके.
बैठक में यह भी तय किया गया कि यमुना पुनर्जीवीकरण परियोजना की प्रगति की समीक्षा हर 20 दिन में की जाएगी. केंद्र सरकार चाहती है कि सभी विभाग तय समयसीमा के भीतर अपने लक्ष्य पूरे करें और परियोजना की रफ्तार बनी रहे. अधिकारियों को नियमित रिपोर्टिंग और प्रगति मूल्यांकन के निर्देश दिए गए हैं.
यमुना की सफाई लंबे समय से दिल्ली और आसपास के राज्यों के लिए बड़ी चुनौती रही है. अब केंद्र सरकार की नई रणनीति में सीवेज, औद्योगिक कचरे, गाद और डेयरियों के अपशिष्ट जैसे सभी प्रमुख प्रदूषण स्रोतों को एक साथ संबोधित करने की कोशिश की जा रही है. सरकार को उम्मीद है कि राज्यों और एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के जरिए यमुना को फिर से स्वच्छ और जीवंत बनाया जा सकेगा.
