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Ground Report: चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया में कई जगह लोगों के नाम गलत तरीके से काटे जाने की खबरें सामने आई हैं. लोग वर्षों से वोट दे रहे हैं और अचानक से उनके नाम काट दिए जा रहे हैं. इसके बाद लोगों को मिलने वाली तमाम सुविधाओं में दिक्कत हो रही है और सबसे बड़ा सवाल वोट का है. एक-एक वोट की कीमत है और ऐसे किसी का नाम काटकर उनसे वोट देने का अधिकार छीन लेना लोगों के संवैधानिक अधिकारों का हनन है. बड़ी समस्या यह भी है कि नाम जुड़वाना भी आसान नहीं है.
नई दिल्ली/अंजलि सिंह राजपूत: भारत और पाकिस्तान के विभाजन के बाद लाहौर से दिल्ली के विक्रम नगर में आकर अपना घर बसाने वाले हिंदू सिख शरणार्थियों में से 300 के नाम स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में काट दिए गए हैं. यहां पर कुल 500 परिवार रहते हैं, जिसमें की 300 वोटर काट दिए गए हैं. यानी 300 वोटर का नाम अभी तक काटा गया है, जिसमें एक 70 साल के बुजुर्ग भी शामिल हैं. 1990 में वह दिल्ली आए थे. उनका नाम सुशील आनंद है. आंख और पैरों से लाचार सुशील आनंद 1990 से लेकर 2025 तक दिल्ली में जितने भी चुनाव हुए उन सब में उन्होंने और उनके परिवार ने वोट दिया. अब एसआईआर प्रक्रिया के दौरान उनकी पत्नी ममता का नाम काट दिया गया है. अब यह बुजुर्ग दूसरों के कंधे पर चढ़कर लाजपत नगर तक जा रहे हैं ताकि पत्नी का नाम जुड़ सके लेकिन, तमाम हाथ-पांव मारने के बाद भी उनका नाम अभी तक दोबारा वोटर लिस्ट में नहीं जुड़ सका है.
बीएलओ नहीं दे रहे कोई जवाब
आपको बता दें कि दिल्ली में इन दिनों मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया काफी तेजी से चल रही है जिसके तहत दिल्ली के कोटला विक्रम नगर जिसे जंगपुरा इलाका कहते हैं. यहां पर लगभग 300 लोगों के नाम काटे जाने से हड़कंप मचा हुआ है. यहां के लोगों को नोटिस दिया गया है कि वो अब सारे सबूत यानी आधार कार्ड, पैन कार्ड और वोटर आईडी कार्ड लेकर लाजपत नगर के एमसीडी प्राइमरी स्कूल जाएं जहां पर एसआईआर कैंप लगा है. अब लोग विक्रम नगर से लाजपत नगर तक अपना नाम को जुड़वाने के लिए भाग दौड़ कर रहे हैं. इसी में 70 साल के बुजुर्ग सुशील आनंद भी शामिल हैं, जोकि अब रिटायर हैं. उनके परिवार में पांच सदस्य हैं जिसमें पत्नी ममता का नाम काटा गया है. एक बेटी की शादी हो गई है. शादी के बाद उसका नाम बदल जाने की वजह से भी इस प्रक्रिया में सवाल उठे हैं. जबकि शादी के बाद जाति बदलना आम बात है. जबकि वोटर लिस्ट में अभी सुशील आनंद उनके परिवार के दो अन्य सदस्यों का नाम शामिल है.
सारा काम छोड़कर लगा रहे चक्कर
यहां के आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष भारत भूषण मल्होत्रा से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि विक्रम नगर जंगपुरा में भारत-पाकिस्तान के विभाजन के बाद हिंदू शरणार्थी और जो सिख समुदाय के शरणार्थी हैं वो यहां पर आकर बस गए थे. उन्होंने यहां पर आधार कार्ड समेत राशन कार्ड सब कुछ बनवा लिया था और लगातार यहां पर वोट भी दे रहे थे. अब नई प्रक्रिया के दौरान 300 लोगों का नाम काटा गया है. ऑनलाइन करने की कोशिश की गई तो यह बार-बार रिजेक्ट हो रहा है. नोटिस में लाजपत नगर के कैंप सेंटर में जाने के लिए कहा गया है. वहां जा रहे हैं तो बीएलओ की ओर से कोई सही रिस्पांस नहीं मिल रहा है.
उन्होंने बताया कि इस पूरे इलाके में 1,45,000 वोटर थे जिसमें 42,000 वोट काटे गए हैं. इसमें इलेक्शन कमीशन और सरकार को हस्तक्षेप करके प्रक्रिया को आसान बनाना चाहिए ताकि जिनका नाम काटा गया है वह दोबारा अपना नाम जोड़ सके. उन्होंने बताया कि यहां पर सभी के पास आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड है. उन्होंने बताया कि कुछ लोग इस इलाके से जाकर दूसरी जगह घर ले चुके हैं, लेकिन वोट देने यहीं पर आते हैं. उन लोगों के नाम भी काट दिए गए हैं. अब नई जगह पर भी उन्होंने वोटर लिस्ट में अपना नाम नहीं जुड़वाया और यहां से भी कट गया अब वो लोग वोट कैसे देंगे.
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