नई दिल्ली. एशियाई खेल 2026 में भारतीय हॉकी के लिए एक नया सवेरा होने जा रहा है. भारत की पुरुष और महिला हॉकी टीमें रविवार से अपने-अपने अभियानों की शुरुआत करेंगी. दोनों ही टीमों का लक्ष्य एशियाई खेलों में दबदबा कायम करने के साथ-साथ 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक का सीधा टिकट हासिल करना है. एक तरफ जहां पुरुष टीम अपने हालिया निराशाजनक प्रदर्शन को भुलाकर वापसी के इरादे से उतरेगी, वहीं महिला टीम अपने शानदार फॉर्म को बरकरार रखते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाना चाहेगी.
काकामिगाहारा स्थित गिफू प्रेफेक्चरल ग्रीन स्टेडियम में भारतीय महिला टीम का सामना पूल बी के अपने पहले मुकाबले में उज्बेकिस्तान से सुबह 7:30 बजे होगा. इसके बाद इसी मैदान पर दोपहर 11:30 बजे पुरुष टीम पूल ए के अपने शुरुआती मैच में इंडोनेशिया से भिड़ेगी. दोनों ही टीमों के लिए यह प्रतियोगिता बेहद खास है क्योंकि एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम को 2028 ओलंपिक खेलों का सीधा प्रवेश पत्र मिलता है.
कमियों को दूर कर वापसी की फिराक में पुरुष टीम
हरमनप्रीत सिंह (Harmanpreet Singh) की अगुआई वाली भारतीय पुरुष हॉकी टीम के लिए यह टूर्नामेंट किसी परीक्षा से कम नहीं है. 2026 विश्व कप में आठवां स्थान हासिल करने के बाद टीम के प्रदर्शन पर कई सवाल खड़े हुए थे. विश्व कप के सेमीफाइनल में जगह बनाने में नाकाम रही भारतीय टीम अब उन कमियों को दूर कर नए सिरे से शुरुआत करना चाहती है. मुख्य कोच क्रेग फुल्टन ने भी माना है कि टीम ने पिछली गलतियों से सीखा है और इस महाद्वीपीय आयोजन में एक नए जज्बे के साथ उतरेगी.
पुरुष टीम का दबदबा और एशियाई खेलों का इतिहास
पुरुष टीम का एशियाई खेलों में बेहद शानदार इतिहास रहा है. भारत ने 1966, 1998, 2014 और 2022 में चार बार एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक अपने नाम किया है. इसके अलावा, लगातार दो बार की ओलंपिक कांस्य पदक विजेता होने के नाते भारत को इस बार भी खिताब का प्रबल दावेदार माना जा रहा है.
पूल ए की चुनौतियां और प्रतिद्वंद्वी
भारतीय पुरुष टीम को पूल ए में इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया, जापान, बांग्लादेश और श्रीलंका के साथ रखा गया है. हालांकि शुरुआती मुकाबले आसान लग सकते हैं, लेकिन आगे चलकर भारत को चार बार के एशियाई चैंपियन दक्षिण कोरिया और 2018 के विजेता जापान से कड़ी टक्कर मिलेगी. भारतीय टीम की कोशिश होगी कि वह बिना किसी उलटफेर के अपने सभी मैच जीतकर पूल में शीर्ष स्थान हासिल करे.
विश्व कप की सफलता से लबरेज महिला टीम
दूसरी ओर, सलीमा टेटे (Salima Tete) के नेतृत्व में भारतीय महिला हॉकी टीम जबरदस्त आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतर रही है. 2026 के विश्व कप में भारतीय महिला टीम ने इतिहास रचते हुए पांचवां स्थान हासिल किया था, जो बीते 52 वर्षों में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था. हालांकि वे विश्व कप के सेमीफाइनल में नहीं पहुंच सकी थीं, लेकिन उनके खेल के स्तर ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा था.
पुरानी यादें और स्वर्ण पदक का सूखा
महिला टीम के कोच मारिजने का मानना है कि विश्व कप की सफलता अब बीती बात हो चुकी है और पूरी टीम का ध्यान एशियाई खेलों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने पर केंद्रित है. भारतीय महिलाओं ने अब तक एशियाई खेलों में केवल एक बार 1982 में स्वर्ण पदक जीता है. 2023 के हांगझोउ एशियाई खेलों में टीम को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा था.
2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक का सीधा टिकट
2020 टोक्यो ओलंपिक में ऐतिहासिक चौथा स्थान हासिल करने वाली महिला टीम 2024 पेरिस ओलंपिक में जगह बनाने से चूक गई थी. यही वजह है कि 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक का टिकट हासिल करना इस बार सलीमा टेटे की टीम की सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी.
चीन की कड़ी चुनौती और पूल बी का समीकरण
महिला टीम के लिए यह राह आसान नहीं रहने वाली है. पूल बी में भारत के साथ उज्बेकिस्तान, इंडोनेशिया, थाईलैंड, जापान और सिंगापुर की टीमें शामिल हैं. भारत को मुख्य चुनौती चीन से मिलेगी, जो चार बार की एशियाई खेल विजेता, मौजूदा डिफेंडिंग चैंपियन और ओलंपिक की रजत पदक विजेता है.
