नई दिल्ली. दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव के परिणाम सामने आने के बाद राजधानी में सियासी पारा चढ़ गया है. बीजेपी में जहां जश्न का महौल है तो वहीं कांग्रेसी नेताओं ने इस जीत पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं. डूसू चुनाव 2026 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पद पर 3-0 से जीत दर्ज की है, जबकि एक सीट निर्दलीय के खाते में गई है. वहीं डूसू चुनाव 2026 में एनएसयूआई का खाता तक नहीं खुल पाया. इस प्रदर्शन के बाद कांग्रेस ने डीयू प्रशासन और सत्ता पक्ष पर बड़ा हमला बोला है. कांग्रेस ने दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन पर EVM में गड़बड़ी और पक्षपातपूर्ण रवैया का आरोप लगाया है.
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने डीयू प्रशासन पर पक्षपात और दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया ने लोकतांत्रिक मूल्यों और निष्पक्षता के सिद्धांतों को भारी चोट पहुंचाई है. देवेंद्र यादव ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान एबीवीपी और एनएसयूआई उम्मीदवारों के साथ अलग-अलग व्यवहार किया गया.
दिल्ली यूनिवर्सिटी चुनाव में क्या क्या हुआ?
एनएसयूआई की हार पर दिल्ली में महाभारत शुरू
देवेंद्र यादव ने कहा, एनएसयूआई के उम्मीदवारों को कई कॉलेज परिसरों में प्रवेश करने और प्रचार करने से कथित तौर पर रोका गया. दूसरी ओर, ABVP के प्रत्याशियों को प्रचार के लिए जगह और सुविधाएं आसानी से उपलब्ध कराई गईं. इस चुनाव में आचार संहिता लागू होने के बावजूद कॉलेज परिसरों और विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल ABVP की बैठकों के लिए कैसे करने दिया गया?’
लिंगदोह समिति के नियमों और EVM पर खड़े किए सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करते हुए लिंगदोह समिति के दिशा-निर्देशों के खुले उल्लंघन की शिकायत की. उन्होंने कहा, ‘यूनिवर्सिटी के तय मानदंडों और लिंगदोह कमेटी के नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले उम्मीदवारों को भी कथित रूप से चुनाव लड़ने और प्रचार करने की अनुमति दी गई. इसके अलावा, EVM मशीनों के इस्तेमाल और वोटों की गिनती में पारदर्शिता को लेकर जो आशंकाएं छात्रों और उम्मीदवारों ने उठाई हैं, उनका जवाब विश्वविद्यालय प्रशासन को देना ही होगा.’
कांग्रेस की 3 मांग, क्या होगा?
डूसू चुनाव परिणाम आने के बाद कांग्रेस ने 3 मांगों को सामने रखा है, पहला, डीयू चुनाव के दौरान मिली सभी शिकायतों की स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए. दूसरा, भविष्य में सभी छात्र संगठनों और उम्मीदवारों के लिए एक समान नियम और निष्पक्ष अवसर लागू किए जाएं. तीसरा, चुनाव आचार संहिता और नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों और उम्मीदवारों पर सख्त कार्रवाई हो.
सांकेतिक तस्वीर.
दिल्ली कांग्रेस ने क्या-क्या आरोप लगाए?
देवेंद्र यादव ने साफ किया कि छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों और छात्रसंघ चुनाव की विश्वसनीयता से खिलवाड़ को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि चुनावी नियम किसी एक संगठन के लिए अलग और दूसरे संगठन के लिए अलग क्यों दिखाई दिए. डीयू प्रशासन पर लगे इन आरोपों ने चुनाव नतीजों के बाद भी विवादों को बढ़ा दिया है. हालांकि, एवीबीपी ने इसे कांग्रेस की हताशा करार दिया है.
कुलमिलाकर इस साल DUSU चुनाव के नतीजे पूरी तरह से चौंकाने वाले रहे. सोशल मीडिया और प्रचार के दौरान एनएसयूआई को कोई बड़ी कामयाबी का अंदेशा जताया जा रहा था. क्योंकि जंतर-मंतर वाली घटना और और दिल्ली पीजी हॉस्टल हादसा ने एबीवीपी को डरा दिया था. लेकिन बीजेपी के स्थानीय नेताओं की सक्रियता और प्रचार ने एबीवीपी को हीरो बना दिया. जबकि कांग्रेस का कोई भी बड़ा नेता एनएसयूआई का हौसला बढ़ाने तक नहीं आया. रही सही कसर विशेष यादव जैसे कैंडिडेट ने कर दिया, जिसको एनएसयूआई ने टिकट नहीं दिया.
