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Success Story: दिल्ली में द्वारका के रहने वाले असगर अली की किस्मत अचानक से बदल गई. उन्होंने ‘कलाभूमि’ स्टार्टअप से पेंटिंग में बहुत नाम कमा लिया है. उन्होंने अब वेगस मॉल में प्रदर्शनी लगा रहे हैं. जहां उनकी पेंटिंग लाखों में बिक रही है. आइये जानते हैं उनके संघर्ष की कहानी के बारे में.
नई दिल्ली: दिल्ली के द्वारका में जन्म लेने वाले असगर अली की कहानी बहुत ही दिलचस्प है. आज देश दुनिया में इनका पेंटिंग के क्षेत्र में जाना माना नाम है, लेकिन असगर अली के साथ एक वक्त ऐसा था, जब वह जमीन पर बैठ कर स्टूडेंट को पेंटिंग बनाना सीखाते थे. सिर्फ 5 या 8 बच्चे ही उनके पास थे. उनकी पेंटिंग को भी एक वक्त पर बहुत ज्यादा लोग पसंद नहीं करते थे, लेकिन वक्त बदला और उन्होंने कलाभूमि नाम से एक स्टार्टअप किया. साल 2008 से लेकर 2026 तक के सफर पर नजर डालें तो आज असगर अली की पेंटिंग नेशनल और इंटरनेशनल दोनों ही लेवल पर काफी पसंद की जाती है.
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कई कलाकार उनसे जुड़े हुए हैं. इन दिनों असगर अली इसलिए भी खूब वायरल हो रहे हैं, क्योंकि देश के सबसे बड़े वेगस मॉल के वाइस प्रेसिडेंट रविंद्र चौधरी ने उन्हें मॉल के अंदर प्रदर्शनी लगाने का मौका दिया है, जिसमें उनकी पेंटिंग लाखों में बिक रही है. अब तक 50,000 से ज्यादा लोग इस प्रदर्शनी को देख चुके हैं.
गुड़गांव तक जाते थे साइकिल से
असगर अली ने लोकल 18 से खास बातचीत में बताया कि वेगस मॉल के वाइस प्रेसिडेंट रविंद्र चौधरी ने उन्हें अब तक का सबसे बेहतरीन और शानदार मौका दिया है. जो इतने बड़े मॉल में उनको प्रदर्शनी लगाने का अवसर दिया है. इसकी वजह से उनसे बड़ी संख्या में और लोग जुड़ रहे हैं. कई स्टूडेंट्स आ रहे हैं और नेशनल इंटरनेशनल लेवल के सभी पेंटिंग को मिला दें तो यहां पर करीब 100 से ज्यादा पेंटिंग्स हैं. ये पेंटिंग हाथ की बनी हुई हैं, जो देखने में एकदम जीवंत लगती है. इसलिए ये लोगों को आकर्षित कर रही है.
उन्होंने अपने सफ़र के बारे में बताया कि एक वक्त ऐसा था जब वह तिहाड़ जेल में भी पेंटिंग बनाने की कला लोगों को सिखाते थे. गुड़गांव तक साइकिल से ही जाते थे. स्कूल में सबसे पीछे बैठते थे. क्योंकि उन्हें डर था कि वह आगे चलकर क्या करेंगे. उन्होंने यह भी बताया कि पढ़ाई में उनके सिर्फ इतने ही नंबर आते थे कि वह सिर्फ पास हो जाते थे. जबकि उनके दोस्त सभी टॉपर्स थे. इन सभी डर के बीच उन्होंने हार नहीं मानी और जामिया से पेंटिंग में पढ़ाई करने के बाद अपना खुद का स्टार्टअप 2008 में किया. जो 2026 तक नेशनल और इंटरनेशनल लेवल तक पहुंच चुका है.
कलाभूमि के जरिए होती है कमाई
असगर अली ने बताया कि फिलहाल जब उन्होंने अपने स्टार्टअप की शुरुआत की थी, तब 8 बच्चे थे. हर बच्चे से वह 100 रुपए लेते थे. आज आलम है कि द्वारका स्थित उनके संस्थान कलाभूमि में 20 राज्यों के बच्चे हैं. बड़ी संख्या में बच्चे यहां पर पेंटिंग करना और कला को सीख रहे हैं. हर बच्चे की फीस 5000 रुपए रखी गई है. जनवरी में यहां पर एडमिशन शुरू होते हैं. नवंबर तक एडमिशन चलते हैं.
उन्होंने बताया कि हर वह बच्चा जिसे अपने काबिलियत पर शक हो या पढ़ाई में कमजोर हो और उसके लिए कमाई का कोई साधन न हो तो वो कला को अपना सकता है. क्योंकि यह कला उसे काफी अच्छी कमाई भी देगी और पहचान भी देगी. उन्होंने बताया कि उनके पास कई ऐसे बैच हैं, जो शाम को 7:00 बजे से लेकर रात के 8:00 बजे से चलते हैं. सभी बैच पहले से उन्होंने डिवाइड कर रखे हैं. उन्होंने यह भी बताया कि उनके नाम पर कई रिकॉर्ड भी दर्ज हैं.
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बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत, दैनिक भास्कर के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से Hindi.News18.com<…
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