दिल्लीवालों! ‘कुर्सी की पेटी बांध लीजिए मौसम बिगड़ने वाला है’, दीपके का प्लान-A फेल, शिंदे के हाथ में CJP की कमान, अब प्लान-C क्या होगा? क्या दिल्लीवालों को अगले कुछ और दिन सीजेपी प्रोटेस्ट के साये में रहना होगा? सीजेपी यानी कॉकरोच जनता पार्टी का 10 अक्टूबर 2026 वाला प्लान फेल हुआ तो क्या हुआ, प्लान-B भी तुरंत समाने आ गया. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर सीजेपी का जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट को दिल्ली पुलिस ने तहस-नहस कर दिया. लेकिन सवाल यह है कि क्या 56 मेट्रो स्टेशन, कई ट्रेनों को बंद कब तक सरकार करती रहेगी. क्योंकि सीजेपी नेताओं ने जो बताया है, उससे दिल्ली में अगले 30 दिनों तक ‘महाभारत’ के आसार हैं. सीजेपी का एक प्लान नहीं बल्कि प्लान- B और प्लान- C भी पहले बनकर तैयार है. सीजेपी समर्थकों का दावा है कि कई प्लान पर कॉकरोच जनता पार्टी काम कर रही है. 10 अक्टूबर 2026 का प्लान फेल तो हो गया लेकिन, अब प्लान- B और प्लान- C भी तैयार हो गया है. जानिए अगले 30 दिनों में सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके का दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर राज्य के राजधानियों में सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रोटेस्ट को लेकर क्या-क्या प्लान हैं?
शनवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से पहले ही सीजेपी के बड़े नेताओं को हिरासत में लिया गया. अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका के दिल्ली पहुंचते ही पुलिस की कार्रवाई के बीच अब आंदोलन की कमान अजिंक्य शिंदे के हाथ में है. सवाल है कि क्या सीजेपी का प्लान-B पुलिस की रणनीति पर भारी पड़ेगा और अगर अजिंक्य शिंदे भी रोके गए तो प्लान-C क्या होगा?
10 अक्टूबर के बाद भी सीजेपी करेगी प्रोटेस्ट?
दिल्ली के जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन ने सियासी और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर बुलाए गए इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके अपने साथियों के साथ दिल्ली पहुंचे थे. लेकिन प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से पहले ही दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को विमान के भीतर से हिरासत में ले लिया गया.
सीजेपी का प्लान- A हुआ फेल तो B और C क्या है?
इसके बाद सवाल उठा कि जब पार्टी के प्रमुख चेहरे ही हिरासत में हैं, तो प्रदर्शन का नेतृत्व कौन करेगा? इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए दीपके ने पहले से रिकॉर्ड किया गया वीडियो जारी किया. इसमें उन्होंने साफ कहा कि जब तक वह, सौरव दास और आशुतोष रांका हिरासत में रहेंगे, तब तक सीजेपी के राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे आंदोलन की कमान संभालेंगे. यानी पार्टी ने नेतृत्व का विकल्प पहले से तैयार रखा था.
कौन हैं अजिंक्य शिंदे, जो प्लान-B में फिट बैठे हैं?
महाराष्ट्र के लातूर से आने वाले 35 वर्षीय अजिंक्य शिंदे सीजेपी के राष्ट्रीय संगठन प्रभारी हैं. उनके पास कंप्यूटर साइंस की डिग्री है. वह पहले एक अंतरराष्ट्रीय आईटी कंपनी में काम कर चुके हैं. इसके बाद उन्होंने आम आदमी पार्टी के लिए पूर्णकालिक काम किया. रिपोर्टों के मुताबिक, वह महाराष्ट्र में आम आदमी पार्टी की टीम से भी जुड़े रहे और बाद में अभिजीत दीपके के करीबी सहयोगी के रूप में सीजेपी में सक्रिय हुए.
सीजेपी के संगठनात्मक काम और अभियानों में शिंदे की भूमिका रही है. सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के उद्देश्य से चलाए गए ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान और मुंबई में पार्टी के प्रदर्शन के आयोजन में भी उनका नाम सामने आया. अगस्त 2026 में उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय संगठन प्रभारी बनाया गया था. अब दिल्ली के प्रदर्शन की जिम्मेदारी मिलने के बाद वह सीजेपी के लिए एक अहम चेहरा बन गए हैं.
प्लान-A क्या था और वह कहां अटका?
सीजेपी का घोषित प्लान था कि उसके नेता और समर्थक दिल्ली पहुंचकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेंगे और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाएंगे. लेकिन दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी. इसके बाद प्रमुख नेताओं को विमान से ही हिरासत में लिए जाने की कार्रवाई हुई. यहां एक जरूरी फर्क है. पुलिस ने विमान के भीतर कहा था कि यह गिरफ्तारी नहीं, हिरासत की कार्रवाई है. इसलिए तीनों नेताओं के मामले में औपचारिक गिरफ्तारी और हिरासत के कानूनी आधार को अलग-अलग समझना होगा.
प्लान-B: अजिंक्य शिंदे के जरिए आंदोलन जारी रखने की कोशिश
दीपके के वीडियो के बाद अजिंक्य शिंदे ने समर्थकों से प्रदर्शन जारी रखने की अपील की. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने कहा कि लोग जंतर-मंतर की ओर बढ़ें और जहां पुलिस उन्हें रोके, वहीं अपनी आवाज उठाएं. यह CJP की रणनीति में बदलाव था, मुख्य नेताओं की मौजूदगी पर निर्भर रहने के बजाय संगठन के दूसरे चेहरे के जरिए आंदोलन को आगे बढ़ाना.
अगर प्लान-B भी फेल हुआ तो प्लान-C क्या होगा?
अभी तक सीजेपी की ओर से किसी औपचारिक प्लान-C की घोषणा की पुष्टि नहीं हुई है. इसलिए यह कहना कि पार्टी ने अगली रणनीति तय कर ली है, जल्दबाजी होगी. हालांकि, राजनीतिक और संगठनात्मक नजरिए से तीन संभावित रास्ते हो सकते हैं. पहला, अगर अजिंक्य शिंदे को भी हिरासत में लिया जाता है, तो पार्टी स्थानीय आयोजकों और दूसरे पदाधिकारियों को अलग-अलग समूहों की जिम्मेदारी दे सकती है. दूसरा, प्रदर्शन के दूसरे माध्यम का प्रयोग करना. पार्टी अपने मुद्दों को प्रेस कॉन्फ्रेंस, ऑनलाइन अभियान, वीडियो संदेश और अन्य सार्वजनिक मंचों के जरिए उठाने की कोशिश कर सकती है. यह एक संभावित विकल्प है, घोषित रणनीति नहीं.. तीसरा, कानूनी रास्ता. प्रदर्शन की अनुमति और हिरासत की कार्रवाई को लेकर पार्टी कानूनी सलाह ले सकती है और उपलब्ध कानूनी उपायों का सहारा ले सकती है. ऐसा कदम उठाया गया है या नहीं, इसकी पुष्टि अलग से जरूरी होगी.
CJP के सामने असली चुनौती क्या है?
सीजेपी के लिए चुनौती सिर्फ नेतृत्व का विकल्प तैयार करना नहीं, बल्कि आंदोलन की निरंतरता बनाए रखना है. पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों के कारण मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं. दूसरी ओर, पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति न देने के पीछे कानून-व्यवस्था और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला दिया है. दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग देखना जरूरी है.
अभिजीत दीपके का पहले से रिकॉर्ड किया वीडियो बताता है कि पार्टी ने नेतृत्व के संभावित संकट के लिए एक वैकल्पिक चेहरा तैयार रखा था. लेकिन प्लान-B कितना प्रभावी साबित होगा और क्या प्लान-C की जरूरत पड़ेगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रदर्शन आगे कैसे बढ़ता है, पुलिस क्या कार्रवाई करती है और CJP अपने समर्थकों को किस तरह संगठित रखती है.
