तो क्‍या भारतीय मानसून अरब स्प्रिंग बन चुका है? सैम पित्रोदा ने कही मन की बात, ध्रुव राठी का किया सपोर्ट

Sam Pitroda on CJP Protest: इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के प्रमुख सैम पित्रोदा ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन का समर्थन करते हुए इसे निर्भीक विपक्ष, साहस और जागरूकता का प्रतीक बताया है. उन्होंने सीजेपी के आंदोलन की तुलना अरब स्प्रिंग से करते हुए कहा कि अपनी बात रखने के लिए आगे आने वाले युवाओं की सराहना की जानी चाहिए, भले ही उनसे कुछ गलतियां क्यों न हों. न्‍यूज एजेंसी IANS को दिए एक इंटरव्‍यू में पित्रोदा ने कहा कि छात्र आंदोलन और सीजेपी का आंदोलन लोगों में निर्भीक होकर विरोध करने तथा अपनी आवाज उठाने की भावना को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि अपने एक लेख में उन्होंने इसे ‘भारतीय मानसून’ कहा था, जो अरब स्प्रिंग से काफी मिलता-जुलता है. सैम पित्रोदा ने ध्रुव राठी का भी समर्थन किया है.

सैम पित्रोदा ने कहा, ‘मुझे लगता है कि छात्र आंदोलन और कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन निर्भीक विपक्ष, साहस और जागरूकता से जुड़ा है. मैंने अपने एक लेख में इसे भारतीय मानसून कहा था, जो अरब स्प्रिंग से काफी मिलता-जुलता है. इन युवाओं ने जिस साहस के साथ अपनी बात रखी, उसके लिए उनकी सराहना की जानी चाहिए. कुछ बातें सही हैं और कुछ गलत, लेकिन यह ठीक है.’ अरब स्प्रिंग वर्ष 2010 और 2011 के दौरान पश्चिम एशिया तथा उत्तरी अफ्रीका में लोकतंत्र की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों और विद्रोहों की लहर थी. इन आंदोलनों ने क्षेत्र की कई स्थापित सत्ता व्यवस्थाओं को चुनौती दी थी. ट्यूनीशिया और मिस्र में प्रदर्शनों के बाद सत्ता परिवर्तन हुआ था, जिससे दूसरे देशों में भी इसी तरह के आंदोलनों को प्रेरणा मिली थी.

सीजेपी के विरोध प्रदर्शनों के दौरान कथित तौर पर अभद्र भाषा के इस्तेमाल को लेकर पूछे गए सवाल पर पित्रोदा ने कहा कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने ऊंची आवाज में बात की और अनुचित भाषा का इस्तेमाल किया. हालांकि, उन्होंने इसे युवाओं के भीतर मौजूद गुस्से की अभिव्यक्ति बताते हुए कहा कि इससे चर्चा के नए अवसर खुले हैं. उन्होंने कहा, ‘कुछ लोगों ने ऊंची आवाज में बात की और कुछ ने खराब भाषा का इस्तेमाल किया. मेरे हिसाब से यह ठीक है. इसका मतलब यह नहीं है कि मैं इसका समर्थन करता हूं, लेकिन आप उनका गुस्सा देख सकते थे. इससे बातचीत और चर्चा के कई नए अवसर खुले.’ पित्रोदा ने स्पष्ट किया कि उनका समर्थन अभद्र भाषा के लिए नहीं, बल्कि युवाओं के निर्भीक होकर अपनी बात रखने और व्यवस्था के सामने सवाल उठाने के साहस के लिए है.

सीजेपी को आम आदमी पार्टी (आप) का ही एक अलग धड़ा बताए जाने संबंधी खबरों पर पित्रोदा ने कहा कि उनके पास इस दावे पर टिप्पणी करने के लिए पर्याप्त जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा कि वह संगठन को उसके नेताओं के बताए परिचय के आधार पर देखते हैं. पित्रोदा ने कहा, ‘मुझे इसकी जानकारी नहीं है. मैं इन चीजों के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं रखता. मेरी समझ से ये युवा हैं और काफी होशियार हैं. मैं उन्हें कभी-कभी टेलीविजन पर देखता हूं. उन्हें देखकर मुझे गर्व होता है और अच्छा लगता है.’ उन्होंने युवा प्रदर्शनकारियों की विचारों को स्पष्ट रूप से रखने, जटिल व्यवस्था के बीच अपनी बात पहुंचाने और साहस दिखाने की क्षमता की तारीफ की. पित्रोदा के मुताबिक, युवाओं को अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए, भले ही इस दौरान उनसे गलतियां हो जाएं. उन्होंने कहा कि जब युवा डर से बाहर निकलकर बोलते हैं और अपने अधिकारों के लिए लड़ते हैं, तो इससे उम्मीद पैदा होती है. उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि बदलाव लाने और अपनी आवाज बुलंद करने के लिए डर पर काबू पाना जरूरी है.

पित्रोदा ने कहा कि हालिया छात्र प्रदर्शनों ने अल्पसंख्यकों, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), दलितों और आदिवासी समुदायों को भी अपनी बात रखने के लिए प्रोत्साहित किया है. उनके अनुसार, इन समुदायों के लोगों को लगता है कि उन्हें आर्थिक अवसरों और निर्णय लेने की प्रक्रिया में पर्याप्त भागीदारी नहीं मिल रही है. उन्होंने कहा, ‘छात्र आंदोलन ने एक बार फिर उन्हें सक्रिय किया है. अब वे भी अपनी बात रख सकते हैं. सिर्फ छात्रों को ही बोलने का अधिकार नहीं है, बल्कि इन सभी समुदायों को भी महसूस हो रहा है कि उनकी आवाज सुनी जा सकती है.’

यूट्यूबर ध्रुव राठी के बारे में पूछे जाने पर पित्रोदा ने उन्हें प्रतिभाशाली युवा बताया, जिनके बड़ी संख्या में अनुयायी हैं. उन्होंने कहा कि एक भारतीय नागरिक होने के नाते राठी को विरोध प्रदर्शन में शामिल होने और अपने विचार व्यक्त करने का पूरा अधिकार है. पित्रोदा ने कहा, ‘मैं उन्हें अच्छी तरह जानता हूं. वह एक प्रतिभाशाली युवा हैं और उनके बहुत बड़ी संख्या में अनुयायी हैं. एक भारतीय नागरिक के तौर पर किसी प्रदर्शन में शामिल होना और अपने विचार रखना उनका अधिकार है. वह भी अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं. मैं उनके साहस का सम्मान करता हूं और उसकी सराहना करता हूं. मुझे लगता है कि हमें उनके जैसे और लोगों की जरूरत है.’ पित्रोदा की इन टिप्पणियों में युवा आंदोलनों को लोकतांत्रिक भागीदारी और सामाजिक जागरूकता से जोड़ने पर जोर दिया गया. उन्होंने कहा कि युवाओं का डर छोड़कर सवाल पूछना और अपनी बात रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे उन समुदायों को भी अपनी आवाज उठाने का प्रोत्साहन मिल सकता है, जो खुद को व्यवस्था से बाहर महसूस करते हैं.

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *