नोएडा के सेक्टर-62 में रजत जयंती पर बंगाल के चंद्रोदय मंदिर की थीम दुर्गा पूजा पंडाल तैयार, एनसीआर का सबसे आकर्षक

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नोएडा के सेक्टर-62 में इस बार पंडाल की थीम के साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया गया है. समिति की सदस्य देबलिना रॉय ने बताया कि पंडाल के अंदर इको-डाइवर्सिटी को प्रदर्शित करने का प्रयास किया गया है. चंद्रोदय मंदिर की थीम भगवान श्रीकृष्ण पर आधारित है, इसलिए प्रवेश द्वार को मंदिर की प्रतिकृति के रूप में तैयार किया गया है. वहीं, अंदर इस्कॉन मंदिरों के वातावरण को दर्शाने की कोशिश की गई है. पंडाल के भीतर भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, बचपन, वृंदावन की लीलाओं और कुरुक्षेत्र युद्ध में उनकी भूमिका से जुड़े दृश्य मूर्तियों और चित्रों के माध्यम से दिखाए जा रहे हैं.

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नोएडा: नोएडा में दुर्गा पूजा को लेकर इस बार खास तैयारी की गई है. सार्वजनिक पूजा समिति सेक्टर-62 अपने 25वें वर्ष यानी रजत जयंती के मौके पर बंगाल के मायापुर स्थित चंद्रोदय मंदिर की थीम पर दुर्गा पूजा पंडाल तैयार कर रही है. समिति के अध्यक्ष अतीस चक्रवर्ती के मुताबिक, पंडाल में चंद्रोदय मंदिर की प्रतिकृति तैयार की गई है. इसके लिए पश्चिम बंगाल के मिदनापुर जिले से कलाकारों को बुलाया गया है. करीब 40 से 50 लोग पंडाल तैयार करने के काम में जुटे हैं. पंडाल का कुल क्षेत्रफल करीब 0.5 एकड़ से अधिक बताया गया है, जबकि इसकी ऊंचाई करीब 30 से 35 फीट है. और ये एनसीआर में सबसे बड़ा और अनोखा है.

पंडाल के अंदर इको-डाइवर्सिटी वाला फील

समिति अध्यक्ष अतीश चक्रवर्ती और कौशिक सेन शर्मा ने बताया कि इस बार पंडाल की थीम के साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया गया है. समिति की सदस्य देबलिना रॉय ने बताया कि पंडाल के अंदर इको-डाइवर्सिटी को प्रदर्शित करने का प्रयास किया गया है. चंद्रोदय मंदिर की थीम भगवान श्रीकृष्ण पर आधारित है, इसलिए प्रवेश द्वार को मंदिर की प्रतिकृति के रूप में तैयार किया गया है. वहीं, अंदर इस्कॉन मंदिरों के वातावरण को दर्शाने की कोशिश की गई है. पंडाल के भीतर भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, बचपन, वृंदावन की लीलाओं और कुरुक्षेत्र युद्ध में उनकी भूमिका से जुड़े दृश्य मूर्तियों और चित्रों के माध्यम से दिखाए जा रहे हैं.

पांडाल बायोडिग्रेडेबल और रिसाइकिल योग्य

पंडाल के भीतर तैयार की जा रही मूर्तियों और सजावट में पर्यावरण अनुकूल सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है. देबलिना रॉय के अनुसार, मूर्तियों को तैयार करने में पेपर का इस्तेमाल किया गया है, जिसे उन्होंने बायोडिग्रेडेबल और रिसाइकिल योग्य बताया. पंडाल के मुख्य मंदिर और गर्भगृह को पारंपरिक शैली में तैयार किया जा रहा है. इसके लिए पश्चिम बंगाल से लाए गए एलिफेंट ग्रास यानी हाथी घास और हुगली क्षेत्र की पत्तियों व तनों का इस्तेमाल किया जा रहा है. समिति ने इसके लिए पश्चिम बंगाल के कारीगरों को भी बुलाया है, जो इस तरह की पारंपरिक कला और सजावट में एक्सपर्ट हैं.

हर क्षेत्र में अलग थीम पर आधारित है मां दुर्गा का पंडाल

समिति की सदस्य और मीडिया प्रभारी देबलिना रॉय का कहना है कि इस आयोजन के जरिए नोएडा और एनसीआर के लोगों को पश्चिम बंगाल की कला और मंदिर निर्माण की झलक दिखाने की कोशिश की गई है. पंडाल में प्रवेश द्वार से लेकर मंडप, मंच, नाट मंदिर और गर्भगृह तक अलग-अलग हिस्सों को थीम के अनुरूप तैयार किया गया है. गर्भगृह में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाएगी. इसे दिल्ली-एनसीआर के बड़े दुर्गा पूजा पंडालों में से एक बताया है. उन्होंने इसे सीधे तौर पर सबसे बड़ा कहने के बजाय वन ऑफ द लार्जेस्ट बताया. इन्होंने कहा कि सार्वजनिक पूजा समिति सेक्टर-62 के लिए इस बार का आयोजन इसलिए भी खास है क्योंकि यह उसका 25वां वर्ष है.

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Rajneesh Kumar Yadav

Rajnish Kumar Yadav is a digital journalist and content publisher with over seven years of experience in print and digital media. He is currently working with News18 Digital (Local18) as a Content Publisher, wh…

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