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दिल्ली-NCR में नवंबर के प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार ने नया प्लान तैयार किया है. केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के मुताबिक 5 से 20 नवंबर तक पूरे एनसीआर में निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों पर रोक रहेगी. धूल उड़ाने वाले कामों पर भी कार्रवाई होगी. दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम में ट्रैफिक मैनेजमेंट पर खास ध्यान दिया जाएगा. दफ्तरों में 50 फीसदी वर्क फ्रॉम होम पर जोर रहेगा. वहीं PAVAN-I3C सेंटर के जरिए प्रदूषण के स्रोतों से लेकर एजेंसियों की कार्रवाई तक की डिजिटल निगरानी होगी. दिल्ली के 47 हॉटस्पॉट पर भी विशेष नजर रखी जाएगी.
दिल्ली-NCR में 5 से 20 नवंबर तक निर्माण और धूल उड़ाने वाली गतिविधियों पर रोक रहेगी. (फाइल फोटो PTI)
दिल्ली में सर्दियां शुरू होते ही हवा की हालत बिगड़ने लगती है. सुबह की धुंध के साथ सांस लेना मुश्किल होने लगता है और प्रदूषण का असर सड़कों से लेकर घरों तक दिखने लगता है. लेकिन इस बार नवंबर में हालात बिगड़ने से पहले ही सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है. केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया है कि 5 से 20 नवंबर तक पूरे एनसीआर में निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों पर रोक रहेगी. धूल उड़ाने वाले कामों को भी बंद रखने की तैयारी है. इसके साथ ही दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम में ट्रैफिक पर खास नजर रखी जाएगी. सरकारी और निजी दफ्तरों में 50 फीसदी कर्मचारियों के लिए घर से काम करने पर भी जोर रहेगा.
सरकार का दावा है कि इस बार प्रदूषण से निपटने की तैयारी सिर्फ आपातकालीन पाबंदियों तक सीमित नहीं है. पिछले एक साल में 30 से ज्यादा बैठकें हुई हैं और एनसीआर की अलग-अलग एजेंसियों को साझा एक्शन प्लान बनाने के निर्देश दिए गए. अब निगरानी के लिए एक डिजिटल कमांड सेंटर भी तैयार किया गया है. इसके जरिए यह देखा जा सकेगा कि प्रदूषण कहां से फैल रहा है और नियम तोड़ने वालों पर किस एजेंसी ने क्या कार्रवाई की. यानी अब सिर्फ हवा का एक्यूआई नहीं बल्कि प्रदूषण के स्रोत और कार्रवाई का हिसाब भी रखा जाएगा.
निगरानी के लिए एक डिजिटल कमांड सेंटर भी तैयार किया गया है.
5 से 20 नवंबर तक धूल उड़ाने वाले कामों पर रोक
- केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि 5 नवंबर से 20 नवंबर तक पूरे एनसीआर में निर्माण और तोड़फोड़ से जुड़ी गतिविधियों पर पूरी तरह रोक रहेगी. योजना में गैर-जरूरी निर्माण कार्यों के साथ धूल पैदा करने वाली गतिविधियों को भी प्रतिबंधित करने की बात है. दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम में ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए विशेष कदम उठाए जाएंगे. सरकारी और निजी दफ्तरों में 50 फीसदी कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम लागू करने पर भी जोर रहेगा.
- मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि वायु प्रदूषण को कम करने के लिए खास मॉनिटरिंग पर ध्यान दिया जा रहा है. इसके लिए प्रदूषण के हॉटस्पॉट चिह्नित किए गए हैं और PAVAN नाम से एक इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर तैयार किया गया है. इसके जरिए एक ही जगह से प्रदूषण फैलाने वाली सभी गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी. उन्होंने बताया कि अब तक 3,200 जगहों की पहचान की गई है और सभी सिविक एजेंसियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए हैं. सरकार अब रियल टाइम मॉनिटरिंग की दिशा में आगे बढ़ रही है. प्रदूषण नियंत्रण के लिए तीन स्तरों पर काम किया जा रहा है और कलेक्टरों व SDM को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है. भूपेंद्र यादव के मुताबिक, अब तक 50 फीसदी हार्वेस्टिंग का काम पूरा हो चुका है.
प्रदूषण पर नजर रखेगा PAVAN-I3C सेंटर
वायु प्रदूषण की निगरानी के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग यानी सीएक्यूएम ने PAVAN इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर शुरू किया है. इसका पूरा नाम ‘प्लेटफॉर्म फॉर एयर क्वालिटी विजिलेंस एंड एनालिटिक्स फॉर एनसीआर’ है. इस प्लेटफॉर्म पर 30 से ज्यादा एपीआई और अलग-अलग डेटा स्रोतों को जोड़ा गया है. इसके जरिए प्रदूषण से जुड़े आंकड़े और एजेंसियों की कार्रवाई एक जगह देखी जा सकेगी.
2,300 से ज्यादा उद्योगों और 3,200 निर्माण स्थलों की निगरानी
इस सेंटर को 111 सतत परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों से डेटा मिलेगा. इसके अलावा 2,300 से ज्यादा औद्योगिक इकाइयों और 3,200 से अधिक सक्रिय निर्माण स्थलों की जानकारी भी इससे जोड़ी गई है. ट्रैफिक हॉटस्पॉट के आंकड़े भी निगरानी में शामिल होंगे. वाहनों से होने वाले प्रदूषण का आकलन वाहन पोर्टल के डेटा से किया जाएगा. ग्रीन दिल्ली और समीर ऐप पर मिलने वाली शिकायतों और उन पर हुई कार्रवाई को भी ट्रैक किया जा सकेगा.
दिल्ली में 47 हॉटस्पॉट की पहचान
पिछले पांच साल के एक्यूआई आंकड़ों के आधार पर दिल्ली में 47 प्रदूषण हॉटस्पॉट चिह्नित किए गए हैं. यहां नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है. आनंद विहार इसका बड़ा उदाहरण है. यहां दिल्ली और उत्तर प्रदेश की करीब 3,000 बसों की आवाजाही होती है. ऐसे में डीजल बसों को बंद करने और प्रदूषण के स्थानीय कारणों पर कार्रवाई करने का फैसला लिया गया है. सड़कों की मरम्मत, गड्ढे भरने और मैकेनिकल स्वीपिंग पर भी ध्यान दिया जाएगा.
दिसंबर तक बढ़ेंगे निगरानी केंद्र
औद्योगिक इकाइयों में ऑनलाइन उत्सर्जन निगरानी प्रणाली लगाने और प्रदूषण नियंत्रण उपकरण स्थापित करने के लक्ष्य भी तय किए गए हैं. इनकी निगरानी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड करेगा. सीएक्यूएम और सीपीसीबी ने अपने डेटा को एकीकृत किया है. दिसंबर के अंत तक वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों की संख्या बढ़ाकर 157 करने का लक्ष्य भी रखा गया है. आगे चलकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता वाले उपकरणों की मदद से प्रदूषण के स्रोत और नियमों के उल्लंघन की पहचान तेज करने की योजना है.
