लाल चंदन का एक पेड़ बना रेलवे के लिए मुसीबत, लग गया 10000000 रुपए का चूना! आखिर क्या है पूरा मामला?
Last Updated:
Bombay High Court News: बंबई हाईकोर्ट ने रेलवे को लाल चंदन के पेड़ के मूल्यांकन में देरी पर एक करोड़ रुपए जमा करने का आदेश दिया है, जिसमें से 50 लाख रुपए किसान को दिए जाएंगे.
हाईकोर्ट ने रेलवे को 7 जुलाई को रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है. (सांकेतिक फोटो)
नागपुर. भारतीय रेलवे के लिए लाल चंदन का एक पेड़ मुसीबत बनकर सामने आ गया है. बंबई हाईकोर्ट में एक सुनवाई के दौरान जज ने कहा कि अगर रेलवे ने इस मामले को जल्द नहीं सुलझाया तो उसे एक करोड़ रुपए का भुगतना करना पड़ सकता है. दरअसल, यह पूरा मामला रेलवे के लिए प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण से जुड़ा है.
यवतमाल में एक सार्वजनिक परियोजना के लिए अधिग्रहित भूमि के एक खंड पर एक सौ साल पुराने लाल चंदन के पेड़ के मूल्यांकन के सिलसिले में रेलवे को एक करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है. बंबई हाईकोर्ट ने रेलवे को इस संबंध में एक करोड़ रुपए जमा करने को कहा है और आदेश दिया है कि मूल्यांकन प्रक्रिया में देरी को देखते हुए इसमें से 50 लाख रुपए उस किसान को दिए जाएं, जिसकी भूमि अधिग्रहित की गई थी.
वर्ष 2018 में पुसाद के खरशी गांव में याचिकाकर्ता केशव शिंदे की जमीन ‘यवतमाल-पुसाद-नांदेड़ रेलवे लाइन’ परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई थी, लेकिन मुआवजे की राशि का भुगतान नहीं किया गया क्योंकि रेलवे पेड़ का मूल्यांकन प्रक्रिया को पूरा नहीं कर सका. इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया. अदालत ने फरवरी में अधिकारियों को पेड़ का मूल्यांकन करने का निर्देश दिया और रेलवे को ‘कोर्ट रजिस्ट्री’ में एक करोड़ रुपये जमा करने को कहा.
नौ अप्रैल को जब मामला सुनवाई के लिए आया तो जस्टिस अविनाश घरोटे और जस्टिस अभय मंत्री की पीठ ने पाया कि मूल्यांकन प्रक्रिया अब भी पूरी नहीं हुई है. अदालत ने कहा, “चूंकि भूमि और पेड़ का कब्जा प्रतिवादी अधिकारियों ने बहुत पहले ही ले लिया है, इसलिए याचिकाकर्ता मुआवजे का हकदार है. किसी भी तरह की देरी से सिर्फ लागत बढ़ेगी और कुछ नहीं.”
लाल चंदन के पेड़ का मूल्य निर्धारित करने के लिए जरूरी समय का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता को अभी 50 लाख रुपए का भुगतान किया जाना चाहिए. पीठ ने अधिकारियों को जून तक लाल चंदन के पेड़ का मूल्य निर्धारित करने की प्रक्रिया पूरी करने और सात जुलाई को रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया. अदालत ने कहा कि अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो वह याचिकाकर्ताओं को शेष 50 लाख रुपए जारी करने के लिए बाध्य होगी.
About the Author
राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें
