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Bot Factory, Project Shuddh: दिल्ली हैदराबाद की स्टार्टअप बॉट फैक्ट्री एक प्रोजेक्ट लेकर आयी है, जिसका नाम ‘प्रोजेक्ट शुद्ध’ है. यह रोबोटिक सिस्टम है जो एआई जीआईएस से सीवेज सफाई ऑटोमैटिक करता है. इसके इस्तेमाल से सीवेज सफाई के दौरान जो सफाईकर्मियों की जान को खतरा होता है, उसे टाला जा सकता है.
दिल्ली. भारत में सीवेज सफाई की समस्या लंबे समय से एक गंभीर मुद्दा रही है. हर साल मैनहोल की सफाई के दौरान जहरीली गैसों के कारण कई सफाईकर्मियों की जान चली जाती है. इसी चुनौती का समाधान लेकर आई है दिल्ली हैदराबाद की यह स्टार्टअप कंपनी Bot Factory, जिसने प्रोजेक्ट शुद्ध (Project Shudh) नाम से एक अनोखी तकनीक विकसित की है. इस बारे में डिटेल में जानते हैं और यह भी देखते हैं कि यह कैसे मददगार साबित होगी.
इंसान नहीं, अब मशीन करेगी सीवेज की सफाई
कंपनी के संचालन साई किरण के अनुसार, इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य सीवेज सफाई को पूरी तरह सुरक्षित और स्वचालित बनाना है. यह सिस्टम मैनहोल की वर्टिकल और हॉरिजॉन्टल दोनों प्रकार की सफाई करता है जो अब तक बहुत कम तकनीकों में संभव हो पाया है. इस तकनीक में एक 3D-प्रिंटेड डेमो मॉडल के जरिए दिखाया गया कि कैसे एक रोबोटिक आर्म मैनहोल का ढक्कन उठाता है, उसके अंदर कैमरे की मदद से स्थिति का आंकलन करता है और फिर बिना गंदगी फैलाए उसे सीधे एक वाहन में डाल देता है
तीन आर्म क्रॉलर
प्रोजेक्ट का सबसे खास हिस्सा है थ्री-आर्म क्रॉलर यह एक रोबोटिक सिस्टम है जो पाइप के अंदर जाकर दीवारों को पकड़ते हुए आगे बढ़ता है और अलग-अलग परिस्थितियों के अनुसार काम करता है. इसमें तीन प्रकार के एंड-इफेक्टर्स लगाए गए हैं
कोनिकल ड्रिल जो सख्त जाम हटाने के लिए, साइक्लोन सिस्टम जो घूमकर जमे हुए कचरे को तोड़ने के लिए और प्लेट सिस्टम जो मिट्टी या सैंड जैसे मुलायम सिलेट को आगे धकेलने के लिए है. यह पूरा सिस्टम हाइड्रोलिक पावर पर चलता है और जरूरत पड़ने पर इसे वाहन से जुड़े विंच के जरिए बाहर भी निकाला जा सकता है
AI और GIS से लैस स्मार्ट मॉनिटरिंग
इस प्रोजेक्ट की एक और बड़ी खासियत है इसका AI और GIS आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम. हर मैनहोल में गैस सेंसर और वॉटर लेवल सेंसर लगाए जाएंगे, जो डेटा को सीधे क्लाउड और डैशबोर्ड पर भेजेंगे. इस सिस्टम का मकसद है Predict, Prevent and Cure यानी पहले से यह अनुमान लगाना कि कब और कहां जाम लग सकता है, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके. डैशबोर्ड पर ग्रीन, ऑरेंज और रेड इंडिकेटर्स के जरिए स्थिति को दिखाया जाएगा और जरूरत पड़ने पर टीम को तुरंत अलर्ट मिलेगा
सेफ्टी और टेक्नोलॉजी का संगम
साई ने कहा प्रोजेक्ट शुद्ध न केवल सफाई व्यवस्था को आधुनिक बना सकता है, बल्कि यह सफाईकर्मियों की जान बचाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है. फिलहाल यह सिस्टम सेमी-ऑटोमैटिक है, लेकिन कंपनी का लक्ष्य इसे पूरी तरह AI आधारित ऑटोमैटिक सिस्टम में बदलना है.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें
