सैकड़ों भूखे लोगों का रोज पेट भर रहा यह शख्स, जरूरतमंदों को नि:शुल्क भोजन, बोले- रोजाना मेन्यू चेंज

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Ghaziabad News: गाजियाबाद में मानवता और सेवा का एक ऐसा उदाहरण सामने आया है, जो समाज के लिए प्रेरणा बनता जा रहा है. यहां एक शख्स लोगों को रोजाना मुफ्त में खाना खिलाते हैं, जिसकी लोग काफी तारीफ करते हैं. आइए इस शख्स की पूरी कहानी आपको बताते हैं.

गाजियाबाद: जिले के गोविंदपुरम क्षेत्र में मानवता और सेवा का एक ऐसा उदाहरण सामने आया है, जो समाज के लिए प्रेरणा बनता जा रहा है. यहां पेट पूजा नामक क्लाउड किचन के माध्यम से जरूरतमंदों को रोजाना निशुल्क दोपहर का भोजन कराया जा रहा है. इस पहल ने उन लोगों के लिए उम्मीद की एक नई किरण जगाई है, जो रोजाना दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष करते हैं. खास बात यह है कि यहां मिलने वाला भोजन न सिर्फ निशुल्क है, बल्कि पौष्टिक और स्वादिष्ट भी होता है, जिससे हर जरूरतमंद व्यक्ति सम्मान के साथ पेटभर भोजन कर सके.

पेट पूजा के संचालक गौरव सिंह ने इस सेवा कार्य को एक मिशन के रूप में अपनाया हुआ है. उनका कहना है कि भूखे को खाना खिलाना सबसे बड़ा पुण्य होता है और इसी भावना के साथ वह यह कार्य कर रहे हैं. गौरव सिंह पेशे से क्लाउड किचन चलाते हैं, लेकिन समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए उन्होंने इस पहल की शुरुआत की. उन्होंने बताया कि साल 2017 से वह समय-समय पर भंडारे का आयोजन करते आ रहे हैं. पहले यह सेवा केवल त्योहारों या महीने के कुछ खास दिनों तक सीमित थी, लेकिन अब इसे नियमित रूप से हर दिन दोपहर में आयोजित किया जाता है.

100 से अधिक लोगों हर दिन कराते हैं भोजन
हर दिन यहां करीब 100 से अधिक लोगों के लिए भोजन तैयार किया जाता है, जो पूरी तरह निशुल्क होता है. पेट पूजा की सबसे खास बात इसका बदलता हुआ मेन्यू है, जहां आमतौर पर भंडारों में सीमित व्यंजन ही मिलते हैं. वहीं यहां हर दिन कुछ नया परोसा जाता है. कभी छोले-चावल, कभी राजमा-चावल, तो कभी कढ़ी-चावल, काले चने, मटर-पनीर या पुलाव जैसे व्यंजन लोगों को परोसे जाते हैं. गौरव सिंह का मानना है कि हर व्यक्ति को अलग-अलग तरह का भोजन चखने का अधिकार है, क्योंकि कई बार आर्थिक तंगी के कारण लोगों की छोटी-छोटी इच्छाएं भी अधूरी रह जाती हैं.

लोग कर रहे हैं सराहना
इस पहल की एक और खास बात यह है कि यहां किसी भी तरह का शुल्क नहीं लिया जाता है. गौरव सिंह बताते हैं कि कई जगहों पर भंडारे में एक या पांच रुपये तक लिए जाते हैं, लेकिन उन्होंने इसे पूरी तरह निशुल्क रखा है. उनका कहना है कि कई लोगों के पास एक रुपया भी नहीं होता और वह नहीं चाहते कि कोई व्यक्ति सिर्फ पैसे की कमी के कारण भूखा रह जाए.

स्थानीय लोग भी इस नेक कार्य की सराहना कर रहे हैं और इसे मानवता की सच्ची मिसाल बता रहे हैं. साथ ही, गौरव सिंह ने लोगों से अपील की है कि यदि वे इस पहल में सहयोग करना चाहते हैं, तो धन के साथ-साथ राशन सामग्री जैसे दाल, चावल या अन्य खाद्य पदार्थ भी दान कर सकते हैं. यह भंडारा गोविंदपुरम में नगर डेयरी के सामने रोजाना दोपहर करीब 1 बजे आयोजित किया जाता है, जहां कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति आकर सम्मानपूर्वक भोजन कर सकता है.

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आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.

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