'शादी के पहले ही दहेज का सामान जलकर राख', रोते-रोते जब्बार ने बयां किया दर्द, गाजियाबाद आग की लपटों में जले अधूरे सपने

गाजियाबादः उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के इंदिरापुरम क्षेत्र के कनवानी में गुरुवार को दोपहर भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया. आग इतनी तेज थी कि देखते ही देखते 200 से अधिक झुग्गियां जलकर राख हो गईं. मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड की 20 से ज्यादा गाड़ियों ने कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया. झुग्गियों के बीच बने कबाड़ गोदामों के कारण आग तेजी से फैल गई. इस हादसे में करीब 5000 लोग बेघर हो गए हैं. आग बुझने के बाद लोग अपने जले हुए सामान में कुछ बचा-खुचा तलाशते नजर आए. कई परिवारों की जमा पूंजी और शादी का सामान भी इस आग में खाक हो गया. लोकल 18 ने ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर प्रभावित लोगों से बातचीत की और उनके हालात का जायजा लिया.

शादी से पहले ही जल गए दहेज के सामान
झुग्गियों में रहने वाले जब्बार खान ने बताया कि वह पिछले 15 सालों से अपने परिवार के साथ यहीं रह रहे थे. परिवार में पत्नी, दो बेटे और एक बेटी है. पत्नी घरों में बर्तन धोती हैं और वह सिलाई का काम करते हैं. इस आग ने उनका सबकुछ छीन लिया. उनकी आंखें भर आती हैं, जब वह बताते हैं कि सिर्फ 10 दिन बाद बेटी की शादी थी, लेकिन दहेज का सारा सामान आग में जलकर राख हो गया. दोपहर करीब 12 बजे आग लगने की खबर मिली, जब मौके पर पहुंचे तो सामने सिर्फ लपटें थीं और देखते ही देखते उनका सब कुछ खत्म हो चुका था.

उन्होंने बताया कि अब हालात ऐसे हैं कि शरीर पर पहने कपड़ों के अलावा कुछ भी नहीं बचा. न पहनने को कपड़े हैं, न जेब में पैसे, न खाने के लिए खाना और न ही सिर पर छत. जब्बार खान जिला प्रशासन से गुहार लगाते हैं कि उन्हें यही जगह फिर से दे दी जाए, ताकि वे अपनी झुग्गी दोबारा बना सकें. फिलहाल पूरा परिवार सड़क पर है और रात भी खुले आसमान के नीचे बिताने को मजबूर है.

80 हजार रुपये का सामान जलकर राख
श्याम बिहारी बताते हैं कि वह पिछले चार सालों से यहां झुग्गियों में रह रहे थे और कबाड़ी का काम करके अपने परिवार का गुजारा करते थे. परिवार में पत्नी और दो बेटियां हैं. आग लगने की खबर मिलते ही वह दौड़कर घर पहुंचे, लेकिन वहां पहुंचकर देखा तो सब कुछ जलकर राख हो चुका था. उनकी आंखों के सामने ही करीब 80 हजार रुपये का सामान और पूरा घर खाक हो गया. अब हालात ऐसे हैं कि परिवार के पास न खाने के लिए खाना है, न जेब में पैसे और न ही रहने के लिए कोई ठिकाना. मजबूरी में पूरा परिवार सड़क पर रहने को मजबूर हैं. अब उन्हें सिर्फ सरकार से ही उम्मीद है कि अगर कुछ मदद मिल जाए तो उनके परिवार को थोड़ी राहत मिल सके.

ओढ़ने के लिए चादर भी नहीं
विनोद पंडित ने बताया कि वह पिछले 4 सालों से परिवार के साथ इन झुग्गियों में रह रहे थे. घर के साथ यहीं उनकी छोटी राशन की दुकान थी, जिससे 10 लोगों के परिवार का गुजारा चलता था. इस आग में घर के साथ दुकान भी जलकर राख हो गई और करीब 7 से 8 लाख रुपये का नुकसान हो गया, जिसकी भरपाई अब मुश्किल लगती है.

वह कहते हैं कि सालों की मेहनत और पसीने से बनाया सब कुछ चंद घंटों में खत्म हो गया. अब हालात ऐसे हैं कि पहनने के कपड़े तक नहीं बचे, पैसे और सामान सब जल गया. रात में ओढ़ने के लिए चादर तक नहीं है और पूरा परिवार सड़क पर आ गया है. बिहार के रहने वाले विनोद पंडित अब प्रशासन और सरकार से बस एक ही उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उन्हें दोबारा घर बनाने में मदद मिल जाए, ताकि वह अपने परिवार को फिर से छत दे सकें.

आग में 50000 भी जले
सादिक अली ने बताया कि वह पिछले पांच सालों से परिवार के साथ इन झुग्गियों में रह रहे थे और राज मिस्त्री का काम करते हैं. सुबह काम पर गए थे, तभी आग लगने की खबर मिली. जब लौटकर आए, तो सामने सबकुछ जलकर राख हो चुका था. परिवार के चार लोग अब सड़क पर आ गए हैं और हालात ऐसे हैं कि पहनने के कपड़ों के अलावा कुछ भी नहीं बचा. घर में रखे करीब 50 हजार रुपये भी आग में जल गए. आसपास खड़े ई-रिक्शा भी खाक हो गए.

वह बताते हैं कि दो दिन बाद उन्हें बंगाल चुनाव में वोट डालने के लिए गांव जाना था, लेकिन अब वहां जाने के लिए भी पैसे नहीं बचे. उन्होंने बताया कि यहां कोई बंगाल से है, कोई बिहार और कोई उत्तर प्रदेश से, लेकिन आज सभी एक जैसी मजबूरी में हैं. खाने की व्यवस्था नहीं, सिर पर छत नहीं, सब कुछ मिनटों में खत्म हो गया. अब सादिक अली सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं, ताकि परिवार को दो वक्त की रोटी और रहने के लिए छत मिल सके.

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