वायरल फोटो असली है या AI का खेल? भारत में लॉन्च हुआ ऐसा ऐप जो मिनटों में बताएगा सच

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वायरल फोटो असली है या AI का खेल? भारत में लॉन्च हुआ ऐप जो मिनटों में बताएगा सच

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अब वायरल फोटो और वीडियो की सच्चाई जानना आसान हो सकता है. भारत में लॉन्च हुई ‘वास्तविक’ नाम की नई मोबाइल एप्लीकेशन की मदद से लोग यह पता लगा सकेंगे कि कोई फोटो या वीडियो असली है या फिर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार किया गया है. एप्लीकेशन के सीईओ और संस्थापक गजेंद्र सिंह के अनुसार, यह ऐप सभी के लिए उपलब्ध है और कोई भी इसे डाउनलोड कर इस्तेमाल कर सकता है. उनका दावा है कि ‘वास्तविक’ लोगों को डिजिटल कंटेंट की वास्तविकता समझने में मदद करेगी.

नई दिल्ली: सोशल मीडिया आज लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. अब बड़ी संख्या में लोग टीवी, अखबार और रेडियो के बजाय सोशल मीडिया के जरिए खबरें और जानकारियां हासिल करते हैं. हालांकि, समस्या तब पैदा होती है जब सोशल मीडिया पर गलत या भ्रामक सूचनाएं वायरल होने लगती हैं. कई बार असली फोटो और वीडियो को भी लोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार किया गया मान लेते हैं. वहीं, कई बार मीडिया संस्थानों और बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े होने लगते हैं.

वायरल फोटो या वीडियो असली सच
ऐसे में भारत में एक नई मोबाइल एप्लीकेशन लॉन्च की गई है, जिसके जरिए लोग यह जान सकेंगे कि कोई वायरल फोटो या वीडियो असली है या फिर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से तैयार किया गया है. इस एप्लीकेशन का इस्तेमाल कोई भी व्यक्ति कर सकता है. इसकी जानकारी एप्लीकेशन के सीईओ और संस्थापक गजेंद्र सिंह ने दी. उन्होंने बताया कि इस मोबाइल एप्लीकेशन का नाम ‘वास्तविक’ है. इसका उद्देश्य लोगों को डिजिटल कंटेंट की वास्तविकता से रूबरू कराना है और यह समझने में मदद करना है कि सामने दिखाई जा रही सामग्री कितनी सही है.

इस तरह काम करेगी एप्लीकेशन
गजेंद्र सिंह के अनुसार, ‘वास्तविक’ एप्लीकेशन को मोबाइल और लैपटॉप दोनों पर इस्तेमाल किया जा सकता है. शुरुआती उपयोगकर्ताओं को 5 जीबी तक की सुविधा मुफ्त दी जा रही है, ताकि वे इसके परिणामों को समझ सकें और इसकी कार्यप्रणाली का अनुभव ले सकें. उन्होंने बताया कि इस एप्लीकेशन को विकसित करने की जरूरत इसलिए महसूस हुई क्योंकि कई बार बड़े मीडिया हाउस और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रकाशित फोटो, वीडियो या खबरों को भी लोग AI जनरेटेड बताने लगते हैं.

सच और झूठ के बीच अंतर
दूसरी ओर, कई बार AI से तैयार सामग्री को लोग सच मान लेते हैं. ऐसे में यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि क्या सही है और क्या गलत. इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए इस एप्लीकेशन को तैयार किया गया है. इसका उद्देश्य लोगों को यह समझने में मदद करना है कि वायरल हो रहा फोटो या वीडियो वास्तविक है या नहीं. इससे सच और झूठ के बीच अंतर करना आसान हो सकेगा.

रियल टाइम फोटो और वीडियो की जांच
गजेंद्र सिंह ने बताया कि फिलहाल यह एप्लीकेशन रियल टाइम में प्रसारित हो रहे फोटो और वीडियो की तुरंत जांच करने में सक्षम नहीं है. ‘वास्तविक’ में अभी यह सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई है, लेकिन भविष्य में इस फीचर पर काम किया जाएगा. उन्होंने कहा कि लोग अभी इस एप्लीकेशन को डाउनलोड कर इसका उपयोग कर सकते हैं. आने वाले समय में यह कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम करेगी. साथ ही इसके विभिन्न मीडिया संस्थानों तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़ने की योजना है. उनका दावा है कि इससे डिजिटल कंटेंट की सच्चाई को समझना आसान होगा और सही जानकारी को गलत साबित करना मुश्किल हो जाएगा.

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Amita kishor

न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें

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