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अगर आपने भी कभी किसी अपने को ‘तारा गिफ्ट’ करने के बारे में सोचा है, तो पहले यह जान लेना जरूरी है कि इसके पीछे की सच्चाई क्या है? इंटरनेट पर कई वेबसाइटें आपके नाम का ‘स्टार सर्टिफिकेट’ बेचती हैं, लेकिन इससे आपको किसी तारे का मालिकाना हक नहीं मिलता. जानिए आखिर इन सर्टिफिकेट्स की असलियत क्या है और विज्ञान इस बारे में क्या कहता है?
तारा खरीदने के दावे पर IAU का बड़ा खुलासा
सोचिए, आपके जन्मदिन या सालगिरह पर कोई आपको आसमान का एक ‘तारा’ गिफ्ट कर दे…तो कैसा लगेगा? सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन आजकल के सोशल मीडिया और इंटरनेट के दौर में लोग दिखावे के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं, और इसी कड़ी में ‘तारा गिफ्ट’ करने का चलन भी तेजी से बढ़ रहा है.
बाजार में ऐसी दर्जनों वेबसाइटें मिल जाएंगी जो सिर्फ 800 रुपये से लेकर 10 हजार रुपये तक में आपको एक ‘स्टार सर्टिफिकेट’ देती है, और आपसे यह कह दिया जाता है कि अंतरिक्ष में मौजूद एक तारा आपके नाम में रेजिस्टर हो गया है. लेकिन अगर आप इसे एक निवेश या आधिकारिक उपलब्धि समझ रहे हैं, तो आप धोखे में हैं. आइए जानते हैं कि क्या सच में एक तारा आपके नाम हो सकता है?
यह सिर्फ एक कागज का टुकड़ा है
नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर के खगोलविदों और अंतरिक्ष वैज्ञानिक ये स्पष्ट रूप से कहते हैं कि इन निजी कंपनियों द्वारा दिए गए स्टार सर्टिफिकेट्स की कोई मान्यता नहीं. खगोलविदों के मुताबिक यह केवल एक स्मृति-चिह्न की तरह ही होती है. इससे किसी तारे का नाम नहीं बदलता है. यहां तक की तारे पर उस व्यक्ति का कोई कानूनी अधिकार बनता है.
IAU ही तय करता है तारों के नाम
सबसे बड़ी और आधिकारिक संस्था ‘इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल यूनियन’ (IAU) किसी भी निजी कंपनी को पैसे लेकर तारे का नाम रखने या उन्हें बेचने की अनुमति नहीं देती है. एस्ट्रोनॉमी एजुकेशन के डायरेक्टर वी. के. पुरी का कहना है IAU ही वह संस्था है जो तारों के नाम तय करती है. हाल ही में उन्होंने अपने ‘वर्किंग ग्रुप ऑन स्टार नेम्स’ के माध्यम से 59 नए आधिकारिक तारों के नामों को मंजूरी दी है. यह प्रक्रिया वैज्ञानिक आधार पर होती है, न कि पैसों के लेनदेन पर.
तो फिर ये कंपनियां क्या बेचती हैं?
इससे अब बस एक ही सवाल उठता है कि अगर ये कंपनियां तारे नहीं बेच रही हैं, तो पैसे किस बात के ले रही हैं? दरअसल, ये कंपनियां तारे का मालिकाना हक नहीं बेचतीं, बल्कि वे अपने निजी डेटाबेस में आपके द्वारा दिए गए नाम का एक रिकॉर्ड दर्ज कर लेती हैं. वे आपको एक रंगीन सर्टिफिकेट, तारे का एक मैप और उसकी लोकेशन की जानकारी दे देती हैं.
सरल शब्दों में कहें तो, यह वैसा ही है जैसे आप किसी को एक ‘पर्सनलाइज्ड ग्रीटिंग कार्ड’ दे रहे हों. यह एक भावुक तोहफा तो हो सकता है, लेकिन ब्रह्मांड के रिकॉर्ड में उस तारे का नाम वही रहेगा जो वैज्ञानिकों ने रखा है.
अगर आप किसी को खुशी देने के लिए ऐसा कुछ करना चाहते हैं, तो यह ठीक है. लेकिन इसे ‘तारा खरीदने’ या उसे किसी के नाम ‘रजिस्टर’ कराने की तरह न देखें. विज्ञान की दुनिया में तारों का मालिकाना हक किसी इंसान का नहीं हो सकता. अगली बार किसी को ‘तारा गिफ्ट’ करने से पहले यह जरूर जान लें कि आप सिर्फ एक खूबसूरत कागज का टुकड़ा खरीद रहे हैं, ब्रह्मांड का कोई हिस्सा नहीं.
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Harshita Patel is working with News18 Hindi (hindi.news18.com) Central Desk since 2025. She has a good understanding of national, international, and local news, along with current affairs, gold rates, and resea…और पढ़ें
