बारिश में मुरझा रही है तुलसी, तो ये 7 आसान टिप्स पौधे को रखेंगे हमेशा हरा-भरा

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बरसात में लगातार बारिश और अधिक नमी तुलसी के पौधे को नुकसान पहुंचा सकती है. सही जल निकासी, जरूरत के अनुसार सिंचाई, हल्की धूप, जैविक खाद और समय-समय पर फफूंद व कीटों की जांच करके तुलसी को पूरे मानसून में स्वस्थ और हरा-भरा रखा जा सकता है.

बागेश्वर: बरसात का मौसम पौधों की बढ़ोत्तरी के लिए अच्छा माना जाता है, लेकिन तुलसी के पौधे के लिए लगातार बारिश और अधिक नमी नुकसानदायक हो सकती है. तेज बारिश के कारण गमले में पानी भर जाता है, जिससे जड़ों में सड़न शुरू हो जाती है. इसलिए यदि तुलसी का गमला खुले आंगन या छत पर रखा है, तो भारी बारिश के समय उसे छज्जे, बरामदे या ऐसी जगह रखें जहां सीधी बारिश न पहुंचे, साथ में ध्यान रखें कि हल्की धूप और ताजी हवा मिलती रहे. तुलसी को पूरी तरह बंद कमरे में रखने से भी बचें, क्योंकि उसे हवा की जरूरत होती है. मौसम साफ होने पर पौधे को कुछ समय के लिए बाहर रखें ताकि प्राकृतिक रोशनी मिल सके. इस छोटी-सी सावधानी से बरसात में भी तुलसी स्वस्थ और हरी-भरी बनी रहती है.

तुलसी की जड़ों के लिए सबसे बड़ा खतरा गमले में जमा पानी होता है. लगातार पानी भरे रहने से जड़ों तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती और पौधा धीरे-धीरे सूखने लगता है. इसलिए हमेशा ऐसा गमला चुनें जिसके नीचे पानी निकलने का छेद हो. यदि बारिश के बाद तश्तरी या प्लेट में पानी भर गया हो, तो उसे तुरंत खाली कर दें. गमले की मिट्टी में अतिरिक्त पानी निकलता रहना जरूरी है. जरूरत हो तो मिट्टी में थोड़ी रेत या ईंट का चूरा मिलाया जा सकता है, जिससे पानी आसानी से बाहर निकल जाए. सही जल निकासी होने पर तुलसी की जड़ें मजबूत रहती हैं, पौधा लंबे समय तक स्वस्थ बना रहता है. यह आसान उपाय बरसात में पौधे को सड़ने से बचाने में काफी मददगार साबित होता है.

बरसात के मौसम में अक्सर लोग रोजाना तुलसी में पानी डालते रहते हैं, जबकि इस समय मिट्टी पहले से ही नम रहती है. अधिक पानी देने से पौधे को फायदा नहीं बल्कि नुकसान होता है. पानी देने से पहले उंगली से मिट्टी की ऊपरी परत जांच लें. यदि मिट्टी सूखी महसूस हो तभी पानी दें. अगर मिट्टी गीली है तो पानी डालने की जरूरत नहीं होती है. सुबह के समय हल्का पानी देना सबसे बेहतर माना जाता है. शाम या रात में अधिक पानी देने से नमी लंबे समय तक बनी रहती है, फफूंद लगने की संभावना बढ़ जाती है. मौसम और मिट्टी की स्थिति देखकर ही सिंचाई करने से तुलसी का पौधा स्वस्थ रहता है, उसकी पत्तियां हरी बनी रहती हैं.

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बरसात में अधिक नमी के कारण तुलसी की कुछ पत्तियां पीली पड़ सकती हैं, उन पर फफूंद लग सकती है. ऐसी पत्तियों को समय रहते हटाना जरूरी है, ताकि संक्रमण पूरे पौधे में न फैले. सूखी, काली या सड़ी हुई टहनियों को भी साफ कैंची से काट दें. इससे पौधे की नई शाखाएं तेजी से निकलती हैं और पौधा घना बनता है. पत्तियां हटाने के बाद गमले के आसपास भी सफाई रखें, क्योंकि गिरी हुई, पत्तियां सड़कर कीड़े और फफूंद को बढ़ावा देती हैं. यदि पौधे पर सफेद या काले धब्बे दिखाई दें तो उसे तुरंत साफ करें. नियमित देखभाल और सफाई से तुलसी बरसात में भी ताजगी बनाए रखती है, और रोगों से काफी हद तक सुरक्षित रहती है.

लगातार बारिश के कारण गमले की मिट्टी सख्त हो जाती है. इससे जड़ों तक हवा और पोषक तत्व ठीक से नहीं पहुंच पाते है. सप्ताह में एक बार किसी लकड़ी या छोटे औजार की मदद से मिट्टी को हल्के हाथों से ढीला करें. ध्यान रखें कि जड़ों को नुकसान न पहुंचे. मिट्टी ढीली होने से पानी का निकास भी बेहतर होता है, और जड़ों का विकास अच्छी तरह होता है. यदि मिट्टी बहुत पुरानी हो गई है, तो उसमें थोड़ी नई जैविक खाद या वर्मी कम्पोस्ट भी मिला सकते हैं. इससे पौधे को जरूरी पोषण मिलता है. स्वस्थ मिट्टी तुलसी की अच्छी वृद्धि का आधार होती है. बरसात में यह छोटा-सा उपाय पौधे को लंबे समय तक हरा-भरा बनाए रखने में मदद करता है.

बरसात में कई दिनों तक धूप नहीं निकलती, जिससे तुलसी का विकास प्रभावित हो सकता है. तुलसी को रोज कुछ समय हल्की धूप मिलना जरूरी होता है. यदि मौसम साफ हो तो गमले को ऐसी जगह रखें, जहां सुबह की धूप पहुंचती हो. धूप मिलने से पौधे की पत्तियां मजबूत रहती हैं, उनमें फफूंद लगने की संभावना कम होती है. हालांकि बहुत तेज धूप में लंबे समय तक रखने की जरूरत नहीं होती है. हल्की धूप और ताजी हवा का संतुलन तुलसी के लिए सबसे अच्छा माना जाता है. अगर पौधा हमेशा छाया में रहेगा तो उसकी बढ़वार धीमी हो सकती है. इसलिए बरसात के बीच जब भी धूप निकले, तुलसी को कुछ समय के लिए खुली जगह जरूर रखें.

बरसात के मौसम में तुलसी को बहुत अधिक खाद देने की जरूरत नहीं होती है. यदि पौधे की बढ़वार धीमी लगे तो महीने में एक बार थोड़ी मात्रा में वर्मी कम्पोस्ट, गोबर की सड़ी हुई खाद या घर में बनी जैविक खाद डाल सकते हैं. अधिक खाद डालने से जड़ों पर असर पड़ सकता है. खाद डालने के बाद मिट्टी को हल्का ढीला करें ताकि पोषक तत्व आसानी से जड़ों तक पहुंच सकें. रासायनिक उर्वरकों के बजाय जैविक खाद का उपयोग बेहतर माना जाता है. इससे मिट्टी की गुणवत्ता भी बनी रहती है. स्वस्थ मिट्टी और संतुलित पोषण मिलने पर तुलसी की पत्तियां चमकदार रहती हैं, और पौधा मौसम के बदलाव को भी आसानी से सहन कर लेता है.

बरसात के दौरान नमी बढ़ने से तुलसी पर छोटे कीट और फफूंद का हमला हो सकता है. इसलिए सप्ताह में एक-दो बार पौधे की पत्तियों और तनों की अच्छी तरह जांच करें. यदि कीट दिखाई दें तो नीम के तेल का हल्का घोल छिड़क सकते हैं. इससे पौधे को नुकसान पहुंचाने वाले कई कीट दूर रहते हैं. फफूंद के शुरुआती लक्षण दिखने पर प्रभावित पत्तियों को हटा दें, और पौधे को कुछ समय खुली हवा में रखें. गमले के आसपास सफाई बनाए रखना भी जरूरी है. नियमित निगरानी और समय पर देखभाल से तुलसी पूरे बरसात के मौसम में स्वस्थ रहती है. थोड़ी-सी सावधानी अपनाकर घर की तुलसी को लंबे समय तक हरा-भरा और सुरक्षित रखा जा सकता है.

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