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Noida News: नोएडा को देश के सबसे आधुनिक और तेजी से विकसित होते शहरों में गिना जाता है. चौड़ी सड़कें, ऊंची इमारतें, साफ-सुथरे सेक्टर और चमकते बाजार इसकी पहचान हैं, लेकिन इसी शहर की दूसरी तस्वीर गांवों और कुछ सेक्टरों के प्रवेश द्वार पर नजर आती है. कहीं सड़कों पर सीवर का गंदा पानी जमा है तो कहीं कूड़े के ढेर और गंदगी लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं. आइए नोएडा के उन्हीं सड़कों के बारे में आपको बताते हैं.
कहते हैं कि नोएडा शहर अपनी शानो-शौकत और साफी-सुथरी सड़कों के लिए जाना जाता है. लेकिन असल सच्चाई तो शहर के कुछ गावों में छिपी है, जहां आज भी गंदगी और अव्यवस्था का आलम देखने को मिलता है. तस्वीरों में नजर आ रहा यह इलाका बरौला गांव का है, जहां कई जगह सड़क किनारे और रास्तों पर सीवर का गंदा पानी जमा दिखाई देता है. पानी के बीच से गुजरते लोगों और दोपहिया वाहन चालकों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ता है. लंबे समय तक पानी जमा रहने से आसपास दुर्गंध का माहौल भी बन जाता है. जलभराव और सीवर की समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने से बारिश के दिनों में स्थिति और खराब हो जाती है. गांव की यह तस्वीर शहर के आधुनिक विकास के दावों के बीच एक अलग कहानी बयां करती है.
इंडस्ट्रियल सेक्टरों से सटे हरौला गांव की तस्वीर भी नोएडा के चमकते शहर से बिल्कुल अलग नजर आती है. कई स्थानों पर सड़क किनारे बिखरा कूड़ा और गंदगी लोगों की परेशानी बढ़ा रही है. नियमित सफाई और कूड़ा उठाने की व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े होते हैं. गंदगी के कारण यहां का वातावरण प्रभावित होता है और लोगों को दुर्गंध का सामना करना पड़ता है.
चौड़ा रघुनाथपुर में भी जगह-जगह फैली गंदगी और साफ-सफाई की कमी की तस्वीरें सामने आती हैं. गांव में आने-जाने वाले रास्तों के आसपास कूड़ा पड़ा दिखाई देता है, जिससे स्थानीय लोगों के साथ यहां से गुजरने वालों को भी परेशानी होती है. नोएडा के विकसित सेक्टरों के बीच बसे इन गांवों की स्थिति यह सवाल उठाती है कि शहर के विकास का लाभ इन इलाकों तक क्यों नहीं पहुंचता.
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सदरपुर गांव में कई स्थानों पर सड़क और गलियों के आसपास गंदगी आपको दिखाई देगी. कूड़े के ढेर और अव्यवस्थित तरीके से पड़ा कचरा लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि सफाई व्यवस्था नियमित हो और कूड़ा समय पर उठाया जाए, तो स्थिति में काफी सुधार हो सकता है. गांव की तस्वीरें नोएडा के उस हिस्से को सामने लाती हैं, जहां आधुनिक शहर के विकास के बावजूद मूलभूत सुविधाओं और साफ-सफाई के लिए लोगों की शिकायत नहीं सुनी जाती.
छिजारसी गांव में भी सड़क किनारे कूड़ा और गंदगी की तस्वीरें शहर की दूसरी तस्वीर दिखाती हैं. यहां आने-जाने वाले लोगों को कई जगह अस्वच्छ सड़क और जलभराव का सामना करना पड़ता है. तस्वीरों में दिखाई देने वाली गंदगी यह सवाल उठाती है कि क्या शहर के विकास के साथ-साथ गांवों की सफाई और बुनियादी सुविधाओं ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा है.
सलारपुर भंगेल गांव की तस्वीरें भी नोएडा के विकास की दूसरी कहानी सामने रखती हैं. जगह-जगह कूड़ा और गंदगी के साथ बुनियादी सफाई व्यवस्था की स्थिति लोगों के लिए चिंता का विषय बनती है. गांव के आसपास लगातार सफाई व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं.
नोएडा के सेक्टर 100, 15ए, 14ए और 17 जैसे इलाकों के प्रवेश द्वार ही शहर की विकसित और व्यवस्थित छवि को दर्शाते हैं. इन सेक्टरों में प्रवेश करते ही साफ-सुथरी सड़कें, हरियाली और बेहतर तरीके से मेंटेन किए गए एंट्री प्वाइंट शहर की अलग तस्वीर पेश करते हैं. इन इलाकों की तुलना जब आसपास के गांवों और अनियोजित बस्तियों से की जाती है तो विकास और रखरखाव का अंतर जमीन आसमान वाली स्थिति पैदा करता है. यही तस्वीर सवाल भी खड़ा करती है कि जब शहर के पॉश सेक्टरों के प्रवेश द्वार सड़कें और पार्क इतने बेहतर तरीके से विकसित और साफ रखे जा सकते हैं, तो गांवों और अन्य इलाकों के एंट्री प्वाइंट पर भी ऐसी ही व्यवस्था क्यों नहीं हो सकती?
सेक्टर-49 और आसपास के इलाकों में भी कुछ स्थानों पर सफाई और रखरखाव को लेकर सवाल खड़े होते हैं. सेक्टर के एंट्री प्वाइंट से लेकर आसपास के हिस्सों में अगर गंदगी या अव्यवस्था नजर आए तो यह शहर की छवि को प्रभावित करती है. नोएडा को स्मार्ट और आधुनिक शहर के रूप में विकसित करने के साथ-साथ उसके हर हिस्से का रखरखाव भी जरूरी है.
