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दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने शिकायत निवारण में बड़ा रिकॉर्ड बनाया है. पिछले 6 महीने में डीडीए ने 19,779 पेंडिंग शिकायतों का निपटारा किया है. इससे लंबित मामलों में 85 प्रतिशत की भारी कमी आई है. उपराज्यपाल सरदार तरणजीत सिंह संधू के सिटिजन फर्स्ट फॉर्मूले के तहत यह सफलता मिली है. अब बिना अपॉइंटमेंट के अधिकारी सीधे आम जनता की समस्याएं सुनकर मौके पर ही उनका हल निकाल रहे हैं.
डीडीए में हिट साबित हुआ उपराज्यपाल सरदार तरणजीत सिंह संधू का फार्मूला. (File Photo : DDA Website)
नई दिल्ली: दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने अपने सिस्टम में बड़ा बदलाव किया है. पिछले 6 महीने में विभाग ने शिकायत निवारण के मामले में जबरदस्त काम किया है. डीडीए ने सिर्फ 6 महीने के अंदर 19,779 शिकायतों का निपटारा कर दिया है. इससे पेंडिंग शिकायतों का बोझ 85 प्रतिशत तक कम हो गया है. जनवरी 2026 की शुरुआत में डीडीए के पास 22,946 शिकायतें पेंडिंग थीं. लेकिन जून के अंत तक यह आंकड़ा घटकर सिर्फ 3,167 रह गया है. इस बड़ी सफलता के पीछे उपराज्यपाल सरदार तरणजीत सिंह संधू का सिटिजन फर्स्ट फॉर्मूला है. एलजी का पदभार संभालने के बाद ही उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए थे. उन्होंने साफ कहा था कि हर नागरिक की समस्या का तय समय में समाधान होना चाहिए. इसी के बाद से डीडीए ने लगातार मॉनिटरिंग शुरू की और अधिकारियों की जवाबदेही तय की. इसका नतीजा आज सबके सामने है.
आखिर कैसे बिना अपॉइंटमेंट के हो रहा लोगों की समस्या का समाधान?
डीडीए ने पब्लिक हियरिंग यानी जनसुनवाई का नया सिस्टम लागू किया है. अब हर सोमवार और गुरुवार को आम नागरिक सीधे अधिकारियों से मिल सकते हैं. इसके लिए उन्हें किसी पहले से अपॉइंटमेंट की जरूरत नहीं होती है. जनसुनवाई में दोपहर 2:30 बजे से 4:30 बजे तक डिप्टी डायरेक्टर और डायरेक्टर लेवल के अधिकारी मौजूद रहते हैं. वहीं 2:30 बजे से 3:30 बजे तक कमिश्नर और उनसे सीनियर अधिकारी शिकायतें सुनते हैं. अधिकारी मौके पर ही लोगों की समस्याओं का समाधान निकालने की कोशिश करते हैं. हर महीने औसतन 6,000 लोग अपनी शिकायतें लेकर यहां पहुंचते हैं.
किन सरकारी प्लेटफॉर्म्स के जरिए डीडीए को मिली थीं सबसे ज्यादा शिकायतें?
इन छह महीनों में अलग-अलग सरकारी प्लेटफॉर्म्स के जरिए शिकायतें मिली थीं. इनमें सीपीग्राम्स और एलजी लिसनिंग पोस्ट जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म शामिल हैं. इसके अलावा सीएम जनसुनवाई और मोबाइल 311 ऐप से भी बड़ी संख्या में मामले सामने आए थे. डीडीए के वाइस चेयरमैन खुद इन सभी मामलों की लगातार समीक्षा कर रहे हैं. उन्होंने सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा, ‘शिकायतों के निपटारे को हर हाल में सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए’. किसी भी फाइल या मामले को बिना वजह पेंडिंग नहीं रखा जा सकता है. यह पहल विकसित दिल्ली के विजन का एक अहम हिस्सा है.
इस नए सिस्टम से आम जनता को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से आजादी मिल गई है. पहले लोगों को एक छोटे से काम के लिए महीनों तक इंतजार करना पड़ता था. लेकिन अब तकनीक आधारित मॉनिटरिंग और नियमित परफॉर्मेंस रिव्यू से काम तेज हुआ है. डीडीए का साफ कहना है कि उनका फोकस नागरिकों को बेहतर और जवाबदेह प्रशासन देने पर है. अगर कोई अधिकारी काम में लापरवाही बरतता है, तो उस पर तुरंत एक्शन लिया जाएगा.
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दीपक वर्मा की गिनती डिजिटल मीडिया के सबसे तेज और उभरते हुए चेहरों में होती है. वह न्यूज18 हिंदी के साथ डिप्टी न्यूज एडिटर के तौर पर जुड़े हैं. दीपक ने अपने करियर में कई बड़े मुकाम हासिल किए हैं…
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