Last Updated:
बॉलीवुड को अकसर प्यार, इश्क और हैप्पी एंडिंग वाली फिल्मों के लिए जाना जाता है. दशकों से बड़े पर्दे पर ऐसी कहानियां दिखाई जाती रही हैं, जिनमें अंततः हीरो-हीरोइन का मिलन ही सबसे बड़ी जीत माना जाता है. लेकिन पिछले कुछ सालों में हिंदी सिनेमा की सोच बदली है. अब कई ऐसी फिल्में भी बनी हैं, जिनमें यह मैसेज दिया गया कि जिंदगी की खुशी सिर्फ रिश्तों या शादी में नहीं, बल्कि खुद को समझने, सेल्फ डिपेंडेंट बनने और अपनी शर्तों पर जीने में भी है. यही वजह है कि समय के साथ ये फिल्में सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि नई सोच की मिसाल बन गई हैं.
नई दिल्ली. बॉलीवुड की ज्यादातर फिल्मों में प्यार, शादी और रिश्तों को जिंदगी की सबसे बड़ी मंजिल के तौर पर दिखाया जाता है. लेकिन कुछ फिल्में ऐसी भी हैं, जिन्होंने इस सोच को बदला और बताया कि खुश रहने के लिए किसी रिश्ते का होना जरूरी नहीं है. खुद से प्यार करना, अपने सपनों को जीना और अपनी शर्तों पर जिंदगी बिताना भी उतना ही खास है. ये वो फिल्में हैं , जिन्होंने सिखाया अकेलापन कमजोरी नहीं, बल्कि खुद को जानने का सबसे बड़ा मौका हो सकता है. दिलचस्प बात यह है कि इस लिस्ट में 3 ब्लॉकबस्टर, 4 हिट और 3 फ्लॉप फिल्में शामिल है. जिनकी सीख आज भी हर दौर में उतनी ही दमदार और दिल छू लेने वाली है.
फिल्म-जब वी मेट: इम्तियाज अली के निर्देशन में बनी इस फिल्म की मुख्य किरदार ‘गीत’ यानी करीना कपूर खान अपनी जिंदगी से बेपनाह प्यार करती है. फिल्म में प्यार का मोड़ आने से पहले का गीत का किरदार यह सिखाता है कि आपको अपनी वैल्यू समझने के लिए किसी दूसरे के अप्रूवल या वैलिडेशन की जरूरत नहीं है. ये फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई.
फिल्म- लक बाय चांस: जोया अख्तर की यह डेब्यू फिल्म मुंबई शहर में महत्वाकांक्षा और अकेलेपन की कड़वी सच्चाई को दिखाती है. 2009 में आई ‘लक बाय चांस’ में कोंकणा सेन शर्मा ने संघर्षरत एक्ट्रेस सोना का किरदार निभाया. फिल्म मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री की चमक-दमक के पीछे छिपे संघर्ष, महत्वाकांक्षा और अकेलेपन को ईमानदारी से दिखाती है. साथ ही उनका किरदार दिखाता है कि जब आपका पार्टनर आपको धोखा दे या अपनी महत्वाकांक्षा के लिए इस्तेमाल करे तो अपनी राह अलग चुनकर अकेले खड़े होना ही सच्चा आत्मसम्मान है. फिल्म फ्लॉप रही लेकिन अच्छी सीख दे गई.
Add News18 as
Preferred Source on Google
फिल्म -आयशा: जेन ऑस्टेन के मशहूर उपन्यास ‘आयशा’ पर आधारित इस फिल्म में आयशा (सोनम कपूर) का किरदार अपनी पसंद, फैसले और लाइफस्टाइल को लेकर बेहद आश्वस्त है. फिल्म यह मैसेज देती है कि समाज चाहे आपके बारे में कुछ भी कहे, अपनी शर्तों पर जीना सबसे सुखद एक्सपीरियंस है. राजश्री ओझा के निर्देशन में बनी यह फिल्म फ्लॉप जरूर है, लेकिन इसका लीड किरदार खुद पर विश्वास रखना सिखाता है.
फिल्म – तनु वेड्स मनु: आनंद एल. राय की इस सुपरहिट फिल्म में तनु (कंगना रनौत) एक ऐसी निडर और बेबाक लड़की है, जो पारंपरिक समाज के तय खांचों में ढलने से साफ मना कर देती है. फिल्म भले ही एक लव स्टोरी हो, लेकिन तनु हमेशा अपनी पसंद और फैसलों को प्राथमिकता देती है, चाहे उसके लिए लोगों की आलोचना ही क्यों न झेलनी पड़े. यही फिल्म की यूएसपी थी जो दर्शकों के दिलों पर छाप छोड़ी. फिल्म हिट रही.
इंग्लिश विंग्लिश: साल 2012 गौरी शिंदे के निर्देशन में बनी फिल्म ‘इंग्लिश विंग्लिश’ में एक्ट्रेस श्रीदेवी (शशि) ने एक शादीशुदा महिला का किरदार निभाया था. हालांकि, जब वह अकेले न्यूयॉर्क जाती हैं तो उन्हें एहसास होता है कि पत्नी और मां बनने के अलावा उनकी खुद की भी एक व्यक्तिगत पहचान और स्वाभिमान है. ये हिट फिल्म यह संदेश देती है कि हर इंसान की अपनी एक अलग पहचान होती है, जो किसी रिश्ते की मोहताज नहीं होती.
क्वीन: विकास बहल द्वारा निर्देशित ये फिल्म बॉलीवुड के इतिहास में ‘सिंगलहुड’ पर बनी सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक है. शादी टूटने के बाद रानी अकेले हनीमून पर निकलती है. अकेले खाना, घूमना और नाचना उसे सिखाता है कि पूरा होने के लिए किसी मर्द का साथ होना जरूरी नहीं है. यह फिल्म बताती है कि जिंदगी किसी एक रिश्ते के खत्म होने से खत्म नहीं होती. ये फिल्म ब्लॉकबस्टर रही.
दिल धड़कने दो: फिल्म में फराह (प्रियंका चोपड़ा) एक घुटती हुई शादी में फंसी होती है. क्रूज शिप पर जब वह खुद को चुनने और उस रिश्ते से बाहर निकलने का फैसला करती है तो वह सीन हर उस व्यक्ति के लिए एक प्रेरणा बन जाता है जो अपने आत्मसम्मान के लिए अकेले चलने का साहस जुटा रहा हो. ये फिल्म सेमी हिट रही.
पीकू: शूजीत सरकार की फिल्म ‘पीकू’ में दीपिका पादुकोण का किरदार सिंगल बाई चॉइस है. पीकू अपने करियर, अपने पिता (अमिताभ बच्चन) और अपनी लाइफ को अकेले संभालने में सक्षम है. करियर, जिम्मेदारियों और निजी जिंदगी के बीच संतुलन बनाती पीकू इस सोच को चुनौती देती है कि हर महिला की जिंदगी का अंतिम लक्ष्य शादी ही होना चाहिए. ये फिल्म ब्लॉकबस्टर रही.
हसीन दिलरुबा: विजिल मैथ्यू द्वारा निर्देशित इस फिल्म में रानी (तापसी पन्नू) का किरदार ग्रे-शेड्स से भरा और जटिल है. यह फिल्म उन लोगों के लिए है जो इस बात से थक चुके हैं कि समाज महिलाओं को कैसा देखना चाहता है. यह फिल्म एक ऐसी महिला की कहानी कहती है जो अपने फैसलों और भावनाओं को समाज की कसौटी पर नहीं तौलती. ये फिल्म हिट रही.
गहराइयां: शकुन बत्रा की फिल्म में अलिषा (दीपिका पादुकोण) रिश्तों और जीवन के उलझनों में फंसी नजर आती है. गहराइयां फ्लॉप रही लेकिन फिल्म यह दिखाती है कि हर रिश्ते का अंत खुशनुमा नहीं होता और कभी-कभी अकेले रहकर खुद को तलाशना ही जीवन का असली पड़ाव होता है.
