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Parvesh Verma News: दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश वर्मा ने पिछली अरविंद केजरीवाल सरकार पर CAG रिपोर्टों के आधार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने दावा किया कि अब तक सामने आई 24 CAG रिपोर्टों में करीब 15 हजार करोड़ रुपए की अनियमितताएं और कथित घोटाले सामने आए हैं. प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने GST बकाया, ई-वे बिल, बिजली सब्सिडी, मैनुअल टेंडर, दिल्ली जल बोर्ड की JE भर्ती और LNJP अस्पताल की लागत पर सवाल उठाए. प्रवेश वर्मा ने कहा कि कई मामलों में सरकारी निगरानी और प्रक्रिया पर गंभीर सवाल हैं. हालांकि, उनके लगाए आरोपों और CAG की रिपोर्ट में दर्ज टिप्पणियों के बीच अंतर समझना जरूरी है.
दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश वर्मा ने CAG रिपोर्टों के हवाले से केजरीवाल सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. (फाइल फोटो PTI)
Parvesh Verma News: दिल्ली की सियासत में CAG रिपोर्ट के बहाने फिर पुरानी सरकार के कामकाज पर सवाल उठने लगे हैं. दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश वर्मा ने रविवार को बीजेपी कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अरविंद केजरीवाल सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. उनका दावा है कि विधानसभा में पेश की गई 24वीं CAG रिपोर्ट समेत अब तक सामने आई रिपोर्टों में हजारों करोड़ रुपए की अनियमितताएं सामने आई हैं. प्रवेश वर्मा ने इसे पिछली सरकार के कथित भ्रष्टाचार का ‘लिखित दस्तावेज’ बताया. उनके मुताबिक इन रिपोर्टों में सामने आए मामलों को जोड़ें तो रकम करीब 15 हजार करोड़ रुपए तक पहुंचती है. हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि ये आंकड़े और ‘घोटाले’ का दावा मंत्री की ओर से लगाए गए आरोप हैं. CAG रिपोर्ट में दर्ज आपत्तियों और उनके आधार पर लगाए गए राजनीतिक आरोपों को एक ही चीज नहीं माना जा सकता.
प्रवेश वर्मा ने खास तौर पर GST बकाया, ई-वे बिल, बिजली सब्सिडी, सरकारी टेंडर, दिल्ली जल बोर्ड की JE भर्ती और LNJP अस्पताल की लागत को लेकर सवाल उठाए. उनका कहना है कि पिछली सरकार के दौरान सरकारी सिस्टम में निगरानी कमजोर रही और कई मामलों में नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े हुए. उन्होंने दावा किया कि 31 मार्च 2023 को खत्म हुए वित्त वर्ष से संबंधित CAG रिपोर्ट में भी राजस्व और सरकारी कामकाज से जुड़ी कई खामियां सामने आई हैं. अब दिल्ली सरकार इन मामलों की जांच कराने और जिम्मेदारी तय करने की बात कह रही है.
CAG रिपोर्ट को लेकर प्रवेश वर्मा के बड़े दावे
- GST बकाया से लेकर बिजली सब्सिडी तक, प्रवेश वर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई आंकड़े रखे. उन्होंने दावा किया कि दिल्ली सरकार पर 70,410 करोड़ रुपए का GST बकाया था और इसमें 65 फीसदी से अधिक रकम पांच साल से ज्यादा समय से लंबित थी. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 8,334 ऐसे टैक्सपेयर्स, जिनका GST रजिस्ट्रेशन रद्द हो चुका था, उनके जरिए 68,680 करोड़ रुपए के ई-वे बिल जारी किए गए. इसके अलावा 4,076 नॉन-टैक्सपेयर फाइल्स से करीब 11,635 करोड़ रुपए के ई-वे बिल बनाए जाने का भी दावा किया गया.
- ई-वे बिल को लेकर उन्होंने कार्रवाई की कमी पर सवाल उठाया. उनके मुताबिक करीब 6.10 करोड़ ई-वे बिल जारी हुए, लेकिन केवल 0.1 फीसदी मामलों में कार्रवाई हुई. उन्होंने दावा किया कि करीब 70 मामलों की जांच में ही लगभग 3,071 करोड़ रुपए के राजस्व नुकसान का अनुमान सामने आया. बिजली सब्सिडी को लेकर भी उन्होंने ऐसे उपभोक्ताओं का जिक्र किया जिनकी लंबे समय तक बिजली खपत शून्य रही, लेकिन उन्हें सब्सिडी मिलने का दावा किया गया.
मैनुअल टेंडर और IP एड्रेस पर सवाल
प्रवेश वर्मा ने सरकारी टेंडर प्रक्रिया पर भी निशाना साधा. उनका दावा है कि ऑनलाइन ई-प्रोक्योरमेंट व्यवस्था होने के बावजूद पिछली सरकार के दौरान 1,185 मैनुअल टेंडर किए गए. इनमें करीब 14,527 बोलियां लगने की बात कही गई. उन्होंने दावा किया कि कुछ मामलों में विभाग और ठेकेदारों से जुड़े IP एड्रेस समान पाए गए. इसी आधार पर उन्होंने टेंडर प्रक्रिया में संभावित मिलीभगत की जांच की जरूरत बताई. उन्होंने यह भी कहा कि बड़ी संख्या में कॉन्ट्रैक्ट अवॉर्ड से जुड़ी फाइलें उपलब्ध नहीं थीं.
बिजली सब्सिडी से JE भर्ती तक घेरा
प्रवेश वर्मा ने दिल्ली जल बोर्ड में जूनियर इंजीनियर भर्ती को लेकर भी सवाल उठाए. उनका दावा है कि चुनाव से पहले JE पद के लिए परीक्षा कराई गई और खर्च किया गया, लेकिन बाद में संबंधित पद के अस्तित्व पर ही सवाल खड़ा हो गया. बिजली सब्सिडी को लेकर उन्होंने करीब 50 हजार ऐसे उपभोक्ताओं का जिक्र किया, जिनका 12 महीने तक बिल शून्य रहा, फिर भी उन्हें 17.81 करोड़ रुपए की सब्सिडी मिलने का दावा किया गया. करीब 90 अन्य उपभोक्ताओं को लेकर भी लगभग 11 करोड़ रुपए की सब्सिडी का दावा सामने रखा गया.
LNJP अस्पताल की लागत पर भी सवाल
LNJP अस्पताल के निर्माण को लेकर भी प्रवेश वर्मा ने तत्कालीन मंत्री सत्येंद्र जैन पर आरोप लगाए. उन्होंने दावा किया कि अस्पताल में प्रति बेड लागत करीब 33 लाख रुपए से बढ़कर 72 लाख रुपए तक पहुंच गई. साथ ही उन्होंने सॉयल टेस्टिंग को लेकर भी सवाल उठाया. इन आरोपों के आधार पर उन्होंने पिछली सरकार की परियोजना प्रबंधन व्यवस्था पर निशाना साधा.
15 हजार करोड़ के कथित घोटाले का दावा
प्रवेश वर्मा ने दावा किया कि अब तक सामने आई 24 CAG रिपोर्टों में करीब 15 हजार करोड़ रुपए की अनियमितताएं और कथित घोटाले सामने आए हैं. उन्होंने कहा कि इन मामलों की जांच कराई जाएगी और जिम्मेदारी तय की जाएगी. फिलहाल इस पूरे विवाद का अगला चरण जांच और रिपोर्टों में दर्ज आपत्तियों की व्याख्या पर निर्भर करेगा. राजनीतिक तौर पर यह मुद्दा दिल्ली में बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच एक और बड़ा टकराव बन सकता है.
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सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 4 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…
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