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Transformer oil theft reason : गोरखपुर और गाजियाबाद में ट्रांसफार्मर से तेल चोरी की घटनाएं सामने आने के बाद से लोग हैरान हैं. आप भी सोच रहे होंगे कि चोर ट्रांसफार्मर ऑयल का करते क्या हैं. अगर इसे कोई खरीद रहा है तो इसका करता क्या होगा. क्या इसे बेचने पर इतनी कीमत मिल जाती है कि चोर अपनी जान जोखिम में डालने से भी पीछे नहीं हटते. गोरखपुर में शनिवार देर रात जीडीए कार्यालय के पास लगे 250 केवीए के ट्रांसफार्मर से चोर तेल निकाल ले गए. यही हाल लोहिया एन्क्लेव के बुद्ध विहार फेज-वन में लगे 250 केवीए के ट्रांसफार्मर के साथ हुआ. पुलिस भी इन चोरियों से सन्न है.
गाजियाबाद. ट्रांसफार्मर से तेल चुराने की घटना भले ही यह सामान्य चोरी लगे, लेकिन इसके पीछे एक ऐसा बाजार है जिसकी वजह से चोरों की नजर अब ट्रांसफार्मर के अंदर भरे तेल पर पड़ गई है. उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में शनिवार देर रात तारामंडल उपकेंद्र के जीडीए कार्यालय के पास लगे 250 केवीए के ट्रांसफार्मर से चोर तेल निकाल ले गए. तेल निकलने के बाद ट्रांसफार्मर गर्म होकर करीब एक घंटे में बंद हो गया. इसी तरह लोहिया एन्क्लेव के बुद्ध विहार फेज-वन में लगे 250 केवीए के ट्रांसफार्मर से भी तेल चोरी हुआ और करीब 200 घरों की बिजली गुल हो गई. गाजियाबाद में भी कुछ समय पहले वेव सिटी इलाके में चोर ट्रांसफार्मर से तेल और तांबा निकालकर ले गए थे.
ट्रांसफार्मर क्यों डालते हैं तेल
इस तेल को ट्रांसफार्मर ऑयल या इंसुलेटिंग ऑयल कहा जाता है. यह सामान्य इंजन ऑयल नहीं होता, इसका काम ट्रांसफार्मर के अंदर बिजली के हिस्सों को एक-दूसरे से इंसुलेट करना और कॉइल से पैदा होने वाली गर्मी को कम करना होता है. यही तेल ट्रांसफार्मर को ज्यादा गर्म होने से बचाने में अहम भूमिका निभाता है. नए मिनरल इंसुलेटिंग ऑयल के लिए IS-335 मानक तय है. इस तेल की कीमत भी सामान्य तेल से अलग होती है. ग्रेड, ब्रांड और खरीद की मात्रा के हिसाब से नए ट्रांसफार्मर ऑयल की कीमत करीब 125 से 600 रुपये लीटर तक बताई जाती है. हालांकि हर ब्रांड और ग्रेड का रेट अलग होता है यानी ट्रांसफार्मर में भरी बड़ी मात्रा चोरों के लिए अच्छी कीमत वाला माल बन जाती है.
किस काम आता है
पुराना या इस्तेमाल किया हुआ ट्रांसफार्मर ऑयल नए तेल के मुकाबले काफी सस्ता होता है. बाजार में इसकी कीमत गुणवत्ता और हालत के हिसाब से करीब 35 से 80 रुपये किलो तक देखी जाती है. अलग-अलग बाजारों में इस्तेमाल किए हुए तेल के रेट 30 से 80 रुपये के आसपास भी मिलते हैं. चोरी का तेल आमतौर पर सीधे किसी मशीन में डालने के लिए नहीं बेचा जाता. इसकी गुणवत्ता के आधार पर इसे इस्तेमाल किए हुए तेल को इकट्ठा करने वाले कबाड़ी नेटवर्क, रीसाइक्लिंग या री-रिफाइनिंग इकाइयों तक पहुंचाया जा सकता है. वहां फिल्ट्रेशन, नमी और अशुद्धियां हटाने जैसी प्रक्रियाओं के बाद इसे दोबारा उपयोग योग्य तेल या बेस ऑयल में बदला जाता है. ऐसी प्रोसेसिंग इकाइयां पुराने ट्रांसफार्मर ऑयल को साफ कर उसकी उपयोगिता वापस लाने का काम करती हैं.
असली कीमत कुछ और
प्रोसेसिंग के बाद तैयार बेस ऑयल का इस्तेमाल लुब्रिकेंट और अलग-अलग औद्योगिक जरूरतों में हो सकता है, यानी ट्रांसफार्मर से निकला पुराना तेल पूरी तरह बेकार नहीं होता. यही वजह है कि कम कीमत पर भी बड़ी मात्रा में चोरी का तेल बेचकर चोर अच्छी कमाई कर लेते हैं, लेकिन इस चोरी की असली कीमत बिजली उपभोक्ताओं को चुकानी पड़ती है. तेल कम होते ही ट्रांसफार्मर गर्म होकर बंद हो जाता है और सैकड़ों घरों की बिजली गुल हो जाती है.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
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