नई दिल्ली: दिल्ली आबकारी नीति मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया की मुश्किलें एक बार फिर अदालत में बढ़ती नजर आ रही हैं. दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को सीबीआई की उस याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य आरोपियों को आखिरी मौका दिया जिसमें निचली अदालत के बरी करने के फैसले को चुनौती दी गई है.
जस्टिस मनोज जैन की अदालत ने सभी पक्षों को चार सप्ताह का समय दिया है. कोर्ट ने साफ कर दिया कि इसके बाद जवाब दाखिल करने के लिए और समय नहीं दिया जाएगा. मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी जब सीबीआई की दलीलें सुनी जाएंगी.
103 पन्नों का जवाब मिला, AAP नेताओं ने मांगा वक्त
सुनवाई के दौरान केजरीवाल और सिसोदिया की ओर से अदालत को बताया गया कि सीबीआई ने हाल ही में 103 पन्नों का अतिरिक्त लिखित जवाब दाखिल किया है. उनका कहना था कि इसमें ऐसे आधार और दलीलें भी हैं, जो मूल पुनरीक्षण याचिका में नहीं थीं. केजरीवाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने कहा कि अगर सीबीआई को नए आधार रखने की अनुमति दी जाती है तो आरोपियों को भी उन पर जवाब देने का पूरा मौका मिलना चाहिए. उन्होंने साफ कहा कि वे जवाब दाखिल करना चाहते हैं. इस पर अदालत ने पूछा कि क्या आप वास्तव में जवाब दाखिल करने में रुचि रखते हैं? वकील ने जवाब दिया- ‘बिल्कुल’. इसके बाद कोर्ट ने सभी पक्षों को जवाब दाखिल करने का अंतिम अवसर दे दिया.
जज बोले- चार हफ्ते का समय, फिर कुछ नहीं
जस्टिस मनोज जैन ने सुनवाई के दौरान कहा कि सभी पक्षों को चार सप्ताह का समय दिया जा रहा है. इस दौरान जिसे जो जवाब दाखिल करना है कर सकते है लेकिन इसके बाद और समय नहीं दिया जाएगा. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सुनवाई को टुकड़ों में नहीं किया जाएगा. अदालत ने कहा कि पहले सीबीआई अपनी दलीलें रखेगी और उसके बाद प्रतिवादी पक्ष को सुना जाएगा. यानी अब अदालत इस मामले की सुनवाई को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है और दोनों पक्षों को अपनी दलीलें पूरी तरह तैयार रखने का मौका दिया गया है.
केजरीवाल-सिसोदिया ने याचिका की वैधता पर भी उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान केजरीवाल और सिसोदिया की ओर से सीबीआई की पुनरीक्षण याचिका की वैधता पर भी सवाल उठाया गया. उनकी ओर से कहा गया कि निचली अदालत के फैसले के महज चार घंटे के भीतर सीबीआई ने पुनरीक्षण याचिका दाखिल कर दी थी. आरोपियों ने इसे जल्दबाजी में उठाया गया कदम बताया है. वरिष्ठ अधिवक्ता विक्रम चौधरी ने दलील दी कि सीबीआई की याचिका गलत आधार पर दाखिल की गई है और जांच अधिकारी के पास ऐसी पुनरीक्षण याचिका दायर करने की पात्रता को लेकर भी सवाल हैं. हालांकि अदालत ने कहा कि इन प्रारंभिक आपत्तियों को भी रिकॉर्ड पर लिया जाएगा लेकिन मामले की सुनवाई को अलग-अलग हिस्सों में नहीं बांटा जाएगा.
सीबीआई बोली- मामला सिर्फ निचली अदालत के फैसले तक सीमित नहीं
सीबीआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए. उन्होंने बचाव पक्ष की इस दलील पर आपत्ति जताई कि सीबीआई के लिखित जवाब में नए आधार जोड़े गए हैं. उन्होंने कहा कि लिखित दलीलों में उठाए गए आधार नए नहीं हैं. सीबीआई की ओर से निचली अदालत के फैसले में कथित खामियों को लेकर अपनी दलीलें रखी गई हैं. अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद साफ किया कि सभी पक्ष अपनी-अपनी आपत्तियां और जवाब दाखिल कर सकते हैं, लेकिन इसके बाद मामले की सुनवाई आगे बढ़ाई जाएगी.
फिर क्यों बदली इस केस की ‘पिक्चर’?
इस मामले की सुनवाई पहले दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में हो रही थी. बाद में केजरीवाल, सिसोदिया और दुर्गेश पाठक ने जस्टिस शर्मा के सामने सुनवाई से खुद को अलग रखने की मांग की थी. इन अर्जियों को खारिज किए जाने के बाद तीनों नेताओं ने जस्टिस शर्मा के सामने होने वाली सुनवाई का बहिष्कार करने की बात कही थी. उन्होंने कहा था कि वे न तो खुद अदालत में उपस्थित होंगे और न ही अपने वकील के जरिए पेश होंगे. इसके बाद मामले को जस्टिस मनोज जैन की पीठ के सामने सूचीबद्ध किया गया. इससे पहले जस्टिस शर्मा ने केजरीवाल, सिसोदिया समेत कुछ AAP नेताओं के खिलाफ अवमानना कार्यवाही भी शुरू की थी.
निचली अदालत ने सभी 23 आरोपियों को किया था बरी
दरअसल, 27 फरवरी को निचली अदालत ने दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में केजरीवाल, सिसोदिया और के. कविता समेत सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया था. निचली अदालत ने सीबीआई की जांच को लेकर भी कई गंभीर टिप्पणियां की थीं. इसी फैसले को सीबीआई ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है. सीबीआई का कहना है कि निचली अदालत का फैसला कई महत्वपूर्ण पहलुओं के सही आकलन के बिना दिया गया, जबकि बचाव पक्ष निचली अदालत के फैसले को सही ठहरा रहा है.
अब 5 और 6 अक्टूबर को होगी सुनवाई
दिल्ली हाईकोर्ट ने अब मामले को 5 और 6 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है. उस दौरान सीबीआई की ओर से मुख्य दलीलें रखी जाएंगी. फिलहाल कोर्ट ने केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य आरोपियों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए अंतिम चार सप्ताह दिए हैं. इसके बाद मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी और अदालत यह तय करेगी कि निचली अदालत द्वारा सभी आरोपियों को बरी करने के फैसले में हस्तक्षेप की जरूरत है या नहीं.
