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JNU PG Admission 2026-27 को लेकर छात्रों की चिंता बढ़ गई है. दिल्ली हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय की डिप्रिवेशन पॉइंट्स व्यवस्था के आधार पर एडमिशन को फिलहाल आगे बढ़ाने पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने सवाल उठाया है कि CUET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा का स्कोर जारी होने के बाद उसमें विश्वविद्यालय अपने स्तर पर अतिरिक्त अंक जोड़ सकता है या नहीं. मामले की अगली सुनवाई 28 अगस्त को होगी.
Delhi University, Admission Guidelines, JNU PG Admission 2026: जेएनयू पीजी एडमिशन पर रोक.
JNU PG Admission 2026-27: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में PG एडमिशन 2026-27 की प्रक्रिया फिलहाल कानूनी पेंच में फंस गई है. दिल्ली हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय की ‘डिप्रिवेशन पॉइंट्स’व्यवस्था के आधार पर दाखिले की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर अंतरिम रोक लगा दी है.कोर्ट ने खास तौर पर इस बात पर सवाल उठाया है कि क्या CUET जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा का स्कोर जारी होने के बाद उसमें विश्वविद्यालय अपने स्तर पर अतिरिक्त अंक जोड़ सकता है?कोर्ट के इस आदेश के बाद JNU में PG एडमिशन को लेकर छात्रों की चिंता बढ़ गई है हालांकि यह रोक फिलहाल अंतरिम है और मामले पर अंतिम फैसला अभी नहीं आया है. अगली सुनवाई 28 अगस्त 2026 को होगी.
क्या है पूरा मामला?
JNU में PG कोर्स में दाखिले के लिए CUET-PG के स्कोर का इस्तेमाल किया जाता है. इसके साथ विश्वविद्यालय के प्रॉस्पेक्टस में ‘डिप्रिवेशन पॉइंट्स’ देने का भी प्रावधान है.इसी व्यवस्था को लेकर एक छात्र अमित मेहरा ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया.याचिका में JNU की इस नीति को चुनौती दी गई है.याचिकाकर्ता की दलील है कि CUET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में उम्मीदवार को जो अंक मिले हैं उसके बाद उसमें अतिरिक्त अंक जोड़ने से पूरी चयन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है.मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति जस्मीत सिंह के समक्ष हुई.
क्या होते हैं ‘डिप्रिवेशन पॉइंट्स’?
JNU के प्रॉस्पेक्टस के सेक्शन V में डिप्रिवेशन पॉइंट्स का प्रावधान किया गया है.इसका उद्देश्य ऐसे उम्मीदवारों को अतिरिक्त लाभ देना है जिनकी पिछली पढ़ाई ऐसे क्षेत्रों में हुई है जिन्हें भौगोलिक रूप से पिछड़ा या वंचित माना जाता है.मौजूदा नियमों के अनुसार किसी उम्मीदवार को अधिकतम 12 डिप्रिवेशन पॉइंट्स मिल सकते हैं.हर एक डिप्रिवेशन पॉइंट को 3 अंकों के बराबर माना जाता है.इस हिसाब से किसी उम्मीदवार के CUET स्कोर में अधिकतम 36 अतिरिक्त अंक जुड़ सकते हैं.यही व्यवस्था अब दिल्ली हाईकोर्ट के सामने चुनौती का विषय बनी है.
कोर्ट ने CUET स्कोर में बाद में अंक जोड़ने पर क्या सवाल उठाया?
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पहली नजर में JNU की इस व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए.अदालत ने पूछा कि जब CUET एक राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा है और उसका स्कोर जारी हो चुका है तो क्या उसके बाद कोई विश्वविद्यालय अपने नियमों के आधार पर उस स्कोर में अतिरिक्त अंक जोड़ सकता है?कोर्ट की चिंता यह थी कि अगर किसी विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षा में मिले अंकों को बाद में अपने स्तर पर बदलने की अनुमति दी जाती है तो इससे परीक्षा की निष्पक्षता, पारदर्शिता और मूल भावना प्रभावित हो सकती है.कोर्ट ने यह सवाल भी उठाया कि अगर JNU को ऐसा करने की अनुमति दी जाती है तो भविष्य में दूसरे विश्वविद्यालय भी अपने नियमों के आधार पर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षा के स्कोर में बदलाव कर सकते हैं.
JNU ने कोर्ट में क्या दलील दी?
सुनवाई के दौरान JNU प्रशासन ने अपनी डिप्रिवेशन पॉइंट्स नीति का बचाव किया.विश्वविद्यालय की ओर से कहा गया कि इस व्यवस्था का मकसद दूरदराज और अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों से आने वाले छात्रों को उच्च शिक्षा में पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराना है.JNU ने अपनी दलील के समर्थन में 1966 के अपने अधिनियम और अकादमिक काउंसिल से स्वीकृत प्रावधानों का भी हवाला दिया.विश्वविद्यालय ने अदालत को यह भी बताया कि डिप्रिवेशन पॉइंट्स के आधार पर कई उम्मीदवारों को पहले ही ऑफर लेटर जारी किए जा चुके हैं यानी दाखिले की प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी थी, लेकिन कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद अब इस व्यवस्था के आधार पर आगे की कार्रवाई पर रोक लग गई है.
अमित मेहरा ने याचिका में क्या सवाल उठाया?
याचिकाकर्ता अमित मेहरा की ओर से JNU की डिप्रिवेशन पॉइंट्स नीति को चुनौती दी गई है.याचिका का मुख्य तर्क यह है कि CUET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में उम्मीदवारों ने जो अंक हासिल किए हैं, उनके बाद अतिरिक्त अंक जोड़ने से उम्मीदवारों की वास्तविक परीक्षा मेरिट बदल सकती है.याचिका के अनुसार इससे उन उम्मीदवारों की स्थिति भी प्रभावित हो सकती है जिन्होंने CUET में अधिक अंक हासिल किए हैं लेकिन उन्हें डिप्रिवेशन पॉइंट्स का लाभ नहीं मिलता.यही वजह है कि इस व्यवस्था की वैधता और इसके आधार पर होने वाले दाखिले पर अदालत से हस्तक्षेप की मांग की गई.
हाईकोर्ट ने क्यों लगाई अंतरिम रोक?
दिल्ली हाईकोर्ट ने फिलहाल डिप्रिवेशन पॉइंट्स के आधार पर JNU में PG एडमिशन को अंतिम रूप देने पर रोक लगा दी है.अदालत की चिंता यह है कि अगर दाखिले की प्रक्रिया पूरी हो जाती है और बाद में यह फैसला आता है कि डिप्रिवेशन पॉइंट्स देकर अतिरिक्त अंक जोड़ना सही नहीं था तो उस स्थिति को दोबारा ठीक करना मुश्किल हो सकता है.यानी एक बार बड़ी संख्या में छात्रों का दाखिला हो जाने के बाद अगर व्यवस्था को गलत पाया गया तो पूरी प्रक्रिया को वापस पहले की स्थिति में लाना आसान नहीं होगा.इसी वजह से कोर्ट ने फिलहाल अंतरिम रोक लगाना उचित समझा.
अगली सुनवाई तक JNU को क्या करना होगा?
कोर्ट ने JNU को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक डिप्रिवेशन पॉइंट्स के आधार पर दाखिले को अंतिम रूप न दिया जाए.इसके अलावा विश्वविद्यालय को इस व्यवस्था के आधार पर आगे की कोई कार्रवाई करने से भी रोक दिया गया है.इसका मतलब यह है कि फिलहाल अदालत ने डिप्रिवेशन पॉइंट्स की व्यवस्था को पूरी तरह खत्म नहीं किया है बल्कि मामले पर अंतिम फैसला आने तक इससे जुड़े एडमिशन को आगे बढ़ाने पर रोक लगाई है.
क्या JNU के सभी PG एडमिशन रुक गए हैं?
यहां अंतर समझना जरूरी है. कोर्ट की रोक विशेष रूप से डिप्रिवेशन पॉइंट्स के आधार पर होने वाले दाखिलों और आगे की कार्रवाई पर है.अभी यह कहना सही नहीं होगा कि JNU के हर PG कोर्स में दाखिले की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह रद्द या खत्म कर दी गई है. अदालत ने फिलहाल जिस व्यवस्था को चुनौती दी गई है उसी के आधार पर दाखिले को अंतिम रूप देने से रोका है.
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वर्तमान में न्यूज़18 हिंदी (Network18 Digital)में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पिछले 16 वर्षों से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. इस दौरान प्रिंट, डिजिटल और टेलीविजन मीडिया में काम कर…
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