नई दिल्ली: पीएचडी करने का सपना हर किसी का होता है, क्योंकि यह डिग्री आपके लिए हर क्षेत्र में आगे बढ़ने और तरक्की के रास्ते खोल देती है. पीएचडी में क्या कोई उम्र सीमा होती है और पीएचडी कौन कर सकता है. इसे कब करना चाहिए. इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए जब देश के जाने-माने और मशहूर दिल्ली की नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में इंग्लिश के प्रोफेसर डॉ. प्रोफेसर डॉ. प्रसन्नान्शु से लोकल 18 की टीम ने खास बातचीत की.
प्रोफेसर डॉ. प्रोफेसर डॉ. प्रसन्नान्शु ने बताया कि पीएचडी करने की कोई भी उम्र सीमा नहीं होती है. इसे किसी भी उम्र का स्टूडेंट कर सकता है, लेकिन सबसे बड़ा जो नियम है वह यही है कि पीएचडी वही कर सकता है, जिसके पास मास्टर्स डिग्री हो यानी जिसने ग्रेजुएशन के बाद पोस्ट ग्रेजुएशन किया हो. वही पीएचडी डिग्री कर सकता है. यह पूरे 3 साल का कोर्स होता है, जिसमें 6 सेमेस्टर होते हैं. मास्टर्स के बाद ही पीएचडी में आप आवेदन कर सकते हैं.
मास्टर्स में होने चाहिए इतने अंक
प्रोफेसर डॉ. प्रसन्नान्शु ने खास बातचीत में बताया कि पीएचडी करने का एक नियम यह भी है कि आपके मास्टर्स में कम से कम 55 प्रतिशत अंक होने चाहिए. अगर आपके मास्टर्स में 55 प्रतिशत अंक हैं, तभी आप पीएचडी में आवेदन कर सकते हैं. इसके अलावा पीएचडी करने के लिए एक खास नियम यह भी है कि अगर किसी ने नेट (UGC NET) क्वालीफाई कर लिया है तो वो भी पीएचडी के लिए आवेदन कर सकता है. उन्होंने बताया कि पीएचडी सेंट्रल, स्टेट, प्राइवेट ओर डीम्ड यूनिवर्सिटी करवाती हैं. सरकारी यूनिवर्सिटी से पीएचडी करना सस्ता होता है. जबकि प्राइवेट से करना थोड़ा महंगा हो सकता है.
क्या पीएचडी में भी होते हैं फेल
प्रोफेसर डॉ. प्रसन्नान्शु ने खास बातचीत में बताया कि पीएचडी की डिग्री एक रिसर्च डिग्री है. इसमें कोर्स वर्क के दौरान अगर कोई फेल हुआ तो हो सकता है, लेकिन पीएचडी में फेल जैसा कुछ नहीं है. इसमें आपको थीसिस (PhD Thesis) लिखकर जमा करना होता है. उस थीसिस को तीन एग्जामिनर के पास भेजा जाता है, जिनके पास तीन विकल्प होते हैं या तो उसे एक्सेप्ट करें या फिर उसमें परिवर्तन की सलाह दें और या फिर रिजेक्ट करें. अगर थी थीसिस आपकी पास हो गई तो उसके बाद मौखिक परीक्षा होती है उसमें उन तीन एग्जामिनर में से एक एग्जामिनर बैठता है और सवाल करता है.
वहीं, एक सवाल यह भी उठता है कि आखिर पीएचडी करने में कुछ लोगों को 5 साल तो कुछ लोगों को 10 साल का वक्त क्यों लग जाता है. इसके कुछ व्यक्तिगत कारण हो सकते हैं. दूसरा कारण यह भी होता है कि जब आपकी सुपरवाइजर से सही बॉन्डिंग ना हो या फिर आपने कोई ऐसा विषय चुन लिया जिसको आप संभाल नहीं पा रहे हैं या समझ नहीं पा रहे हैं. इन वजहों से कई बार लोगों को पीएचडी करने में कई साल का वक्त लग जाता है.
पीएचडी करने के फायदे
प्रोफेसर डॉ. प्रसन्नान्शु ने बताया कि पीएचडी करने के बाद स्टूडेंट के नाम के आगे डॉक्टर लग जाता है. जिससे रिसर्च का क्षेत्र हो या फिर कोई भी नौकरी उसमें आपको ऊंचा पद मिलने की संभावना हो जाती है. साथ में ही आपकी तरक्की के रास्ते हर क्षेत्र के लिए खुल जाते हैं, पीएचडी यानी डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी, इसलिए पीएचडी डिग्री को बहुत महत्व दिया गया है. इसके अलावा पीएचडी करने के बाद यूनिवर्सिटी और कॉलेज में पढ़ाने की राह भी आसान हो जाती है, जिसे बेहद सुरक्षित और खास प्रोफेशन माना जाता है. अगर आप कॉलेज या यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर बनने का सपना देख रहे हैं तो यकीनन आपको पीएचडी करनी चाहिए.
