दिल्ली का अनोखा इको फ्रेंडली घर, मलिकपुर गांव में बिना सीमेंट के बना 60 साल पुराना मकान, AC के बिना भी रहता ठंडा

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दिल्ली का अनोखा इको फ्रेंडली घर, मलिकपुर गांव में 60 साल पुराना मकान

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Delhi Anokha Ghar Malikpur Gaon: दिल्ली भारत का एक ऐसा शहर है, जो सबसे विकसित माना जाता है. यहां कंक्रीट और सीमेंट की बड़ी-बड़ी इमारतें हैं. इस घनी आबादी और प्रदूषित शहर में एक घर ऐसा भी है. जहां आप पहुंचेंगे तो आपको ऑक्सीजन की कमी नहीं मिलेगी. क्योंकि यहां पेड़ पौधों की भरमार है. घर के अंदर इतने पेड़ पौधे लगे हुए हैं कि आपको यह घर किसी गार्डन से कम नहीं लगेगा. यह घर पूरी तरह से इको फ्रेंडली है. इस प्राकृतिक घर को बिना सीमेंट से बनाया गया है. ऐसे में इस भीषण गर्मी में भी बिना एयर कंडीशनर के यह घर ठंडा रहता है. एलपीजी गैस की कितनी भी किल्लत क्यों ना हो जाए यहां पर न सिर्फ खाना परिवार अपने लिए बनाता है. बल्कि आस पड़ोस के लोगों को बनाकर दिया जाता है.

ताकि जिनके यहां एलपीजी गैस नहीं है. वह भी भूखे ना रहें. इस प्राकृतिक घर में एलपीजी गैस का इस्तेमाल होता ही नहीं है. सिर्फ चूल्हे का इस्तेमाल होता है. यह घर दिल्ली के मलिकपुर गांव में स्थित है और इसके मालिक सुमित डागर हैं, जिनसे खास बातचीत की गई. सुमित डागर नेशनल अवॉर्डी हैं और प्राकृतिक किसान कहलाते हैं. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनसे मिल चुके हैं.

प्राकृतिक किसान सुमित डागर ने बताया कि उनका घर 50 से 60 साल पुराना है. जब यह घर बन रहा था तो सिर्फ एक मिस्त्री को लिया गया था. बाकी पूरे घर को बनाने में परिवार के ही लोगों ने अपना योगदान दिया था. उन्होंने बताया कि इस घर में लाल ईंटों का ही इस्तेमाल किया गया है. जो कि पक्की ईंटे होती हैं. जो हर घर में इस्तेमाल होती हैं, लेकिन उन ईंटों के बीच में सीमेंट नहीं भरी गई है. बल्कि मिट्टी भरी गई है.

यह मिट्टी कोई सामान्य मिट्टी नहीं, बल्कि उनके घर के ठीक पीछे एक तालाब है. उस तालाब की मिट्टी को लेकर के ईंटों के बीच में लगाया गया है. पूरे घर को मिट्टी से ही बनाया गया. यही नहीं, इस घर में मिट्टी की पुताई और जो लेप लगाया गया है. वह भी मिट्टी का ही है. यही वजह है कि भीषण गर्मी में भी यह घर ठंडा रहता है. उनके घर में एक भी एयर कंडीशनर नहीं है, फिर भी घर पूरी तरह से ठंडा रहता है.

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उन्होंने बताया कि घर की छत पर भी सीमेंट या कंक्रीट का इस्तेमाल नहीं हुआ है. सुमित ने बताया कि उन्होंने अपने घर में गाय पाल रखी है. गाय रोज गोबर देती है, इसीलिए घर में एलपीजी गैस का इस्तेमाल नहीं होता है. घर में तीन चूल्हे बने हुए हैं. जिस पर पूरे परिवार का खाना बनता है और आसपास अगर किसी के घर में एलपीजी गैस की समस्या होती है तो उन्हें भी यहां से खाना परोसा जाता है.

सुमित ने बताया कि उनके घर में सैकड़ों पौधे लगे हैं. बाहर से कोई आता है तो उसे यह घर नहीं, बल्कि एक गांव का एहसास कराता है. पौधों में तुलसी का पौधा यहां लगाया गया है. इसके अलावा पालक का पौधा है और तमाम ऑक्सीजन देने वाले पौधे हैं. दिल्ली में चाहे जितना भी प्रदूषण क्यों ना हो जाए. यहां पर प्रदूषण नहीं पहुंच पाता है. क्योंकि उनके घर में इतने पौधे हैं, जो हर वक्त ऑक्सीजन देते हैं.

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