गन्ने की खोई और पराली से बनीं ये प्लेट-कटोरियां, पूरी तरह इको-फ्रेंडली, गरम खाना भी नहीं करेगा नुकसान

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गन्ने की खोई और पराली से बनीं ये प्लेट-कटोरियां, गरम खाना भी नहीं करेगा नुकसान

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ग्रेटर नोएडा की एक कंपनी ने गन्ने की खोई और पराली से इको-फ्रेंडली बर्तन बनाए हैं। इनमें गरम खाना खाने से सेहत को नुकसान नहीं होगा। इस्तेमाल के बाद फेंकने पर यह मिट्टी में मिल जाते हैं। इससे किसानों को पराली की अच्छी कीमत मिल रही है।

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नई दिल्लीः प्लास्टिक में खाना खाने से लोगों की सेहत को नुकसान हो रहा है, यह रिसर्च कई बार सामने आ चुकी है. प्लास्टिक में गर्म खाना खाने से, गर्म पानी पीने से और गर्म चाय पीने से लोगों के शरीर में कैंसर विकसित हो रहा है. प्लास्टिक पर्यावरण को भी बड़ी संख्या में नुकसान पहुंचता है, क्योंकि प्लास्टिक को डीकंपोज होने में कई साल लग जाते हैं. ऐसे में अब प्लास्टिक का विकल्प खोजा जा चुका है.

प्लास्टिक की कटोरियां और प्लेट को रिप्लेस करने के लिए ग्रेटर नोएडा स्थित एक कंपनी ने गन्ने के गूदा और पराली से प्लेट और कटोरियों के साथ ही तमाम डिस्पोजल बर्तनों को बनाना शुरू किया है. जिसे एक बार इस्तेमाल करके आप फेंक देंगे तो पर्यावरण को भी नुकसान नहीं होगा और इसमें आप गर्म खाना भी खा सकते हैं. इससे आपकी सेहत को भी किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं होगा. दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान यह कंपनी अपने प्रोडक्ट को लेकर पहुंची तो देखने वाले देखते रह गए और लोगों ने जमके तारीफ की.

ऐसे तैयार हुए हैं प्लेट-कटोरियां
कंपनी की ओर से आए हुए को-फाउंडर भूपेंद्र पटेल ने बताया कि 2016 में कंपनी ने ऐसे बर्तन बनाने शुरू किए थे. प्लांट ग्रेटर नोएडा में लगाया गया है. इसके अलावा इंदौर और गुजरात में भी है. उन्होंने बताया कि सरकार प्लास्टिक का विकल्प खोज रही है, लेकिन प्लास्टिक की इंडस्ट्री बहुत बड़ी है. ऐसे में इस पर पूरी तरह से बैन लगा पाना थोड़ा कठिन है. इसीलिए बीच-बीच में बैन लगता है और फिर हट जाता है. ऐसे में उन्होंने सोचा कि क्यों ना प्लास्टिक के बर्तनों का विकल्प खोजा जाए.

इसी विकल्प के तहत गन्ने का गूदा और किसानों से ली गई पराली से बर्तनों को बनाना शुरू किया, जिसमें आप गर्म खाना भी खा सकते हैं. इसमें गर्म खाना खाने से किसी भी तरह का कोई पार्टिकल आपके शरीर के अंदर नहीं जाएगा जिससे कैंसर नहीं होगा. पर्यावरण को भी से फायदा होगा क्योंकि अगर आप इसे फेंक देंगे तो यह दो से तीन दिन के अंदर अपने आप ही डीकंपोज होकर मिट्टी में मिल जाएगा.

किसानों को भी हो रहा फायदा
भूपेंद्र पटेल ने बताया कि डिस्पोजल प्लेट और बर्तनों को बनाने में किसानों से पराली भी खरीदी जा रही है, क्योंकि हमेशा ही देखा जाता है कि किसान पराली को जलाते हैं, जबकि इस पराली का इस्तेमाल भारत देश के लोग अलग-अलग चीजों में कर सकते हैं. लोगों ने अब करना शुरू भी कर दिया है. बहुत सारे लोग पराली से बहुत कुछ बना रहे हैं. ऐसे में उनकी कंपनी भी पराली से इन बर्तनों को बना रही है. यह बर्तन पूरी तरह से पर्यावरण और सेहत के लिए फायदेमंद है. पर्यावरण और सेहत को किसी भी तरह का कोई नुकसान इन बर्तनों से नहीं होगा. किसानों से पराली खरीदी जा रही है, जिससे किसानों को भी फायदा हो रहा है. अच्छे दामों पर पराली किसानों से खरीदी जा रही है.

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Prashun Singh

प्रसून सिंह को मीडिया में 7 साल काम करने का अनुभव है. खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रोचक अंजाद में पेश करना खासियत है. दैनिक भास्कर अखबार में इंटर्नशिप के साथ करियर की शुरुआत हुई.

इसके बाद ETV Bharat (बिहार)…

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