गाजियाबाद: दिल्ली से करीब 25 किलोमीटर दूर गाजियाबाद का राजनगर एक्सटेंशन बाहर से देखने पर किसी पॉश इलाके से कम नहीं लगता. यहां ऊंची-ऊंची इमारतों में हजारों परिवार रहते हैं और कई फ्लैटों की कीमत करोड़ों रुपये तक है. लेकिन इन सोसाइटियों से बाहर निकलते ही लोगों की परेशानी शुरू हो जाती है. कहीं सड़क पर बड़े गड्ढे हैं तो कहीं बारिश का पानी भरा हुआ है. खराब सड़कों और कनेक्टिविटी की वजह से रोजाना आने-जाने वाले लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है.
राजनगर एक्सटेंशन में 90 से ज्यादा सोसाइटी हैं और यहां बड़ी संख्या में लोग रहते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि घर खरीदते समय उन्हें बेहतर सड़क, कनेक्टिविटी और सुविधाओं की उम्मीद थी. लेकिन कई साल बीतने के बाद भी सोसाइटी के बाहर की सड़कों की हालत नहीं सुधरी. लोगों का सवाल है कि जब घरों की कीमत करोड़ों में है और लोग टैक्स भी दे रहे हैं तो उन्हें सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए बार-बार शिकायत क्यों करनी पड़ रही है.
2017 में जमा पूंजी लगाकर खरीदा था फ्लैट
राजनगर एक्सटेंशन निवासी अनिल शर्मा ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2017 में अपनी जिंदगी की जमा पूंजी लगाकर यहां फ्लैट खरीदा था. दिल्ली के नजदीक होने की वजह से उन्हें उम्मीद थी कि यह इलाका आगे चलकर अच्छी तरह विकसित होगा. लेकिन आज भी सोसाइटी से बाहर निकलते ही खराब सड़कें और गड्ढे दिखाई देते हैं.
उनका कहना है कि फ्लैट की रजिस्ट्री के समय टैक्स दिया जाता है, लेकिन सड़क जैसी जरूरी सुविधा के लिए लोगों को परेशान होना पड़ रहा है. कई साल पहले जो सड़कें बनी थीं, उसके बाद न तो नई सड़कें बनाई गईं और न ही पुरानी सड़कों की ठीक से मरम्मत हुई. बारिश के दिनों में गड्ढों में पानी भर जाता है, जिससे दोपहिया वाहन चलाना भी मुश्किल हो जाता है. लोगों की ओर से कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन समस्या अभी भी बनी हुई है.
400 मीटर की सड़क पार करना भी मुश्किल
स्थानीय निवासी प्रशांत गोयल ने बताया कि वह करीब 12 साल से राजनगर एक्सटेंशन में रह रहे हैं. घर खरीदते समय इलाके की अच्छी कनेक्टिविटी और सुविधाओं की बात कही गई थी, लेकिन जमीन पर तस्वीर अलग है. उन्होंने बताया कि उनकी सोसाइटी के गेट से मुख्य सड़क तक करीब 400 मीटर का रास्ता है. इतनी छोटी दूरी में ही सड़क पर इतने गहरे गड्ढे हैं कि वाहन चलाना मुश्किल हो जाता है. बारिश के समय स्थिति और खराब हो जाती है. पानी भरने के बाद सड़क और गड्ढे का पता तक नहीं चलता. उनका कहना है कि करोड़ों रुपये के फ्लैट वाले इलाके में लोगों के लिए अच्छे पार्क तक नहीं हैं और खराब सड़कों के कारण हादसे का खतरा भी बना रहता है.
दिल्ली जाने वालों की परेशानी ज्यादा
प्रतीक त्यागी ने बताया कि राजनगर एक्सटेंशन में उनके दो फ्लैट हैं. घर खरीदते समय उन्हें बेहतर सड़क और कनेक्टिविटी की उम्मीद थी, लेकिन सोसाइटी से बाहर निकलते ही गड्ढों से सामना होता है. हल्की बारिश में भी कई जगह पानी भर जाता है. उनका कहना है कि दिल्ली में नौकरी करने वाले लोगों के लिए परेशानी और बढ़ जाती है. कई बार दिल्ली से गाजियाबाद पहुंचने के बाद राजनगर एक्सटेंशन के अंदर घर तक पहुंचने में ही काफी समय लग जाता है. लोगों को कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की ओर से आश्वासन मिला, लेकिन सड़क की स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नजर नहीं आया.
मास्टर प्लान में दिखाई गई थीं कई सड़कें
स्थानीय निवासी दीपांशु मित्तल ने बताया कि राजनगर एक्सटेंशन को घर खरीदने के लिहाज से भले ही पॉश इलाका माना जाता हो, लेकिन बुनियादी सुविधाओं की स्थिति अभी भी ठीक नहीं है. उनके मुताबिक वर्ष 2011 के मास्टर प्लान में तीन मुख्य सड़कों के साथ कई आपस में जुड़ी सड़कों का भी प्रावधान था, लेकिन समय के साथ कई रास्ते खत्म हो गए. उन्होंने बताया कि जो सड़कें मौजूद हैं, उनकी हालत भी खराब है. बारिश के बाद बड़े-बड़े गड्ढों में पानी भर जाता है और लोगों को काफी परेशानी होती है. उनका कहना है कि लोगों ने करोड़ों रुपये खर्च कर घर खरीदे हैं और टैक्स भी दे रहे हैं, लेकिन सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए भी लगातार शिकायत करनी पड़ रही है.
लोगों का सवाल, आखिर कब सुधरेंगी सड़कें?
राजनगर एक्सटेंशन के लोगों की परेशानी सिर्फ गड्ढों तक सीमित नहीं है. खराब सड़क, जलभराव और कमजोर कनेक्टिविटी का असर रोजाना के सफर पर पड़ रहा है. लोगों का कहना है कि इलाके में बड़ी-बड़ी सोसाइटियां और महंगे फ्लैट तो बन गए, लेकिन उनके बाहर की बुनियादी सुविधाएं उसी तेजी से विकसित नहीं हो पाईं. अब स्थानीय लोगों की मांग है कि संबंधित विभाग सड़क की स्थिति का जायजा लेकर जल्द मरम्मत कराए, ताकि बारिश के दिनों में जलभराव और गड्ढों से होने वाली परेशानी खत्म हो सके.
