नई दिल्ली. हॉकी विश्व कप के दूसरे राउंड के पहले और बेहद अहम मुकाबले में भारतीय पुरुष हॉकी टीम को एक करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है. एक ऐसे मैच में जहां जीत दर्ज करना भारत के लिए टूर्नामेंट में अपनी उम्मीदें जिंदा रखने के लिए अहम था, वहां मौजूदा ओलंपिक चैंपियन नीदरलैंड्स ने अपने स्तर के अनुरूप शानदार खेल दिखाते हुए भारत को 3-1 से हरा दिया. यह ‘करो या मरो’ का मुकाबला था, जिसमें भारतीय टीम ने शुरुआत तो अच्छी की, लेकिन अंततः डच टीम के आक्रामक खेल, तेज गति और बेहतरीन फिनिशिंग के सामने उन्हें हार स्वीकार करनी पड़ी.
मैच की शुरुआत दोनों ही टीमों ने बेहद सधी हुई रणनीति के साथ की. पहले और दूसरे क्वार्टर में भारतीय टीम ने डच आक्रमण का डटकर सामना किया. नीदरलैंड्स, जो अपनी तेज पासिंग और आक्रामक हॉकी के लिए जाना जाता है, लगातार भारतीय डिफेंस को भेदने का प्रयास कर रहा था. हालांकि, भारतीय रक्षकों ने गजब का संयम और बेहतरीन तालमेल दिखाया.
भारत सेमीफाइनल की रेस से लगभग बाहर हो गया है.
हाफ टाइम का हूटर बजने तक स्कोर 0-0 की बराबरी पर था. पहले 30 मिनट का खेल पूरी तरह से नीदरलैंड्स के फॉरवर्ड्स और भारत के डिफेंडर्स के बीच एक शतरंज के खेल जैसा लग रहा था. यह एक अच्छा संकेत था कि भारत ने ओलंपिक चैंपियंस को गोल करने से रोके रखा था, लेकिन आक्रमण के मोर्चे पर भारत भी कोई खास कमाल नहीं कर पा रहा था.
नीदरलैंड्स ने तोड़ा गतिरोध
ब्रेक के बाद जब दोनों टीमें मैदान पर लौटीं, तो नीदरलैंड्स के इरादे स्पष्ट थे. उन्होंने अपनी गति को और बढ़ा दिया. भारतीय खिलाड़ियों ने शुरुआत में कुछ काउंटर अटैक किए, लेकिन वे डी के अंदर जाकर मौकों को भुनाने में नाकाम रहे. मैच का पहला टर्निंग पॉइंट 41वें मिनट में आया. लगातार दबाव बना रही डच टीम को आखिरकार सफलता मिल ही गई. नीदरलैंड्स के खिलाड़ी डुको टेलजेनकम्प (Duco Telgenkamp) ने भारतीय डिफेंस की चूक का फायदा उठाया और एक शानदार फील्ड गोल दागकर अपनी टीम को 1-0 की महत्वपूर्ण बढ़त दिला दी. इस गोल ने भारतीय खेमे पर दबाव काफी बढ़ा दिया.
गोल की झड़ी और उम्मीदों का टूटना
मैच का अंतिम और चौथा क्वार्टर बेहद रोमांचक और नाटकीय रहा. 1-0 से पिछड़ने के बाद भारतीय टीम ने बराबरी का गोल दागने के लिए आक्रामकता दिखाई, जिससे उनके खुद के डिफेंस में काफी जगह बन गई. नीदरलैंड्स जैसी विश्व स्तरीय टीम इसी मौके की तलाश में थी. 51वें मिनट मिनट में तेजेर्प हीओडेमेकर्स (Tjep Heodemakers) ने एक बेहतरीन मूव बनाते हुए गेंद को नेट में उलझा दिया. यह नीदरलैंड्स का दूसरा फील्ड गोल था और स्कोर 2-0 हो गया.
52वें मिनट में भारतीय टीम ने रिएक्ट किया. भारत को एक पेनल्टी कॉर्नर मिला और कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाते हुए एक तेजतर्रार ड्रैग-फ्लिक से गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचा दिया. स्कोर 2-1 हो गया और मैच में रोमांच लौट आया. 55वें मिनट का गोल निर्णायक साबित हुआ. भारतीय फैंस की उम्मीदें अभी जगी ही थीं कि डच खिलाड़ियों ने काउंटर अटैक का बेहतरीन नमूना पेश किया. थिहज वैन डैम (Thijs van Dam) ने नीदरलैंड्स की तरफ से तीसरा फील्ड गोल दागा. इसी के साथ स्कोर 3-1 हो गया और भारत की वापसी के सारे रास्ते बंद हो गए.
कहां चूका भारत?
मैच के आंकड़ों पर गौर करें तो नीदरलैंड्स की जीत का सबसे बड़ा कारण उनकी फॉरवर्ड लाइन की चपलता रही. डच टीम के तीनों गोल मैदानी (फील्ड) गोल थे, जो उनके बेहतरीन टीम वर्क को दर्शाते हैं. वहीं, भारतीय टीम एक बार फिर सिर्फ पेनल्टी कॉर्नर और अपने कप्तान हरमनप्रीत सिंह पर निर्भर नजर आई. विश्व स्तरीय टीमों के खिलाफ सिर्फ सेट-पीस के भरोसे मैच नहीं जीते जा सकते. 52वें मिनट में गोल करने के बाद भारत के पास मोमेंटम था, लेकिन अंतिम क्षणों में रक्षापंक्ति की चूक से उन्होंने 55वें मिनट में तीसरा गोल खा लिया और मैच पूरी तरह हाथ से निकल गया. पहले दो क्वार्टर खाली जाने के बावजूद नीदरलैंड्स ने धैर्य नहीं खोया. उन्होंने भारतीय टीम को गलतियां करने पर मजबूर किया और अपनी रणनीति पर अडिग रहे.
आगे की राह
इस हार के साथ एफआईएच विश्व कप के दूसरे राउंड में भारत की आगे की राह मुश्किल हो गई है. कोच और टीम मैनेजमेंट को अपनी आक्रामक रणनीति की तुरंत समीक्षा करनी होगी, खासकर फील्ड से गोल बनाने के मौकों को भुनाने के मामले में.
