Satya Niketan Building Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन में PG की इमारत गिरने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. सत्य निकेतन हादसे पर पुलिस ने खुलासा किया कि दुकान बनाने के चक्कर में इमारत ढह गई. पुलिस के मुताबिक, ग्राउंड फ्लोर यानी भूतल पर दुकान बनाने के लिए एक दीवार तोड़ी गई थी. इसके बाद इमारत का ढांचा कमजोर हुआ और पूरी बिल्डिंग ढह गई. हादसे में 7 लोगों की मौत हुई थी. मामले में PG संचालक समेत अब तक पांच लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. पुलिस निर्माण कार्य और किरायेदारी से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कर रही है. पुलिस के मुताबिक, यह जानकारी श्रमिक ठेकेदार सनोज कुमार से पूछताछ में सामने आई है.
दिल्ली पुलिस ने बताया कि दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को ढह गई इमारत में ‘पेइंग गेस्ट’ (पीजी) का संचालन करने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया है. यह इस मामले में अब तक हुई पांचवीं गिरफ्तारी है. पुलिस ने बताया कि आरोपी की पहचान भजनपुरा निवासी 31 वर्षीय सुधांशु लवनीश के तौर पर हुई है. इससे एक दिन पहले मंगलवार को इमारत में मरम्मत का काम करा रहे ठेकेदार सनोज कुमार को उत्तर प्रदेश के कासगंज से गिरफ्तार किया गया था.
पुलिस के सामने कैसे आया यह राज
पुलिस के एक अधिकारी के मुताबिक, पूछताछ में सनोज ने दावा किया है कि भूमिगत तल को समतल करने का काम किया जा रहा था और भूतल पर दुकान बनाने में बाधा बन रही एक दीवार को तोड़ दिया गया, जिसके बाद इमारत ढह गई. सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर को मरम्मत के दौरान एक इमारत गिरने से सात लोगों की मौत हो गई थी. इस इमारत का इस्तेमाल छात्रों के लिए पीजी आवास के रूप में किया जा रहा था। इमारत के मलबे से 12 लोगों को निकाला गया था.
कौन-कौन अरेस्ट
इससे पहले पुलिस ने भवन ढहने के सिलसिले में इमारत की मालकिन 75 वर्षीय उर्मिला गुप्ता, वायु सेना से सेवानिवृत्त 81 साल के उनके पति हरिराम गुप्ता और उनके बेटे महेश गुप्ता (52) को गिरफ्तार किया था. पुलिस ने बताया कि महेश, सुधांशु और सनोज को एक अदालत में पेश किया गया जिसने उन्हें दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है.
किसने लीज पर लिया था
अधिकारी के अनुसार, सुधांशु ने पूछताछ में बताया कि है कि उसने अपने दोस्त शुभम त्यागी के साथ, ‘हॉस्टल डेज़’ के नाम से पीजी संचालन के लिए सत्य निकेतन क्षेत्र में इस इमारत की चार मंजिलें अगस्त 2025 में 1.05 लाख रुपये महीने के किराये पर पट्टे पर ली थी. उसने पुलिस को यह भी बताया कि उसके इलाके में सात पीजी चल रहे हैं और इमारत की जर्जर हालत के कारण उन्होंने इसे कम दरों पर किराये पर लिया था.
पुलिस ने बताया कि सुधांशु को इस बात की जानकारी थी कि निर्माण कार्य से पूरी इमारत पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है. इसके बावजूद उसने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया और निर्माण कार्य को लेकर अनभिज्ञ बना रहा. अधिकारी के मुताबिक, मोती बाग में रहने वाले श्रमिक ठेकेदार सनोज कुमार (35) ने पूछताछ में बताया है कि करीब 10 दिन पहले महेश गुप्ता ने इमारत में मरम्मत के काम के लिए उसे रखा था.
उसने पुलिस को बताया कि भूमिगत तल को भूतल के समतल करने का काम किया जा रहा था. इसके लिए भूमिगत तल में करीब तीन ट्रक मलबा भरा गया और इस काम के लिए महेश द्वारा उसे प्रतिदिन 2800 रुपये का भुगतान किया जा रहा था. अधिकारी के मुताबिक, उसने पुलिस को बताया कि एक दीवार भूतल पर दुकान बनाने की जगह में बाधा बन रही थी और घटना वाले दिन उन्होंने जगह बनाने के लिए इस दीवार को हटा दिया और इमारत यह भार नहीं झेल सकी तथा ढह गई.
पुलिस सूत्रों ने बताया कि त्यागी फिलहाल फरार है और उसका पता लगाने के प्रयास जारी हैं. जांचकर्ता किराएदारों के साथ हुए समझौते की जांच कर रहे हैं जिसके तहत पीजी संचालित किया जा रहा था. पुलिस सूत्रों के अनुसार, दस्तावेज़ में लिखा है कि पीजी संचालक किरायेदारों के साथ होने वाली किसी भी जनहानि या खतरे के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे.
इसमें कथित तौर पर यह भी कहा गया है कि छात्रावास सीलिंग, आग, भूकंप, भारी बारिश और अन्य प्राकृतिक आपदाओं सहित उसके नियंत्रण से परे परिस्थितियों के कारण व्यक्तिगत चोट, हानि या सामान की क्षति के लिए मुआवजे का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं होगा. समझौते में कहा गया है कि निर्धारित अवधि से पहले छात्रावास छोड़ने वाले किरायेदार छात्रावास शुल्क या सुरक्षा राशि को वापस पाने के हकदार नहीं होंगे. इसमें कहा गया है कि पीजी आवास बुक करने के लिए भुगतान की गई पंजीकरण राशि वापस नहीं की जाएगी.
समझौते में छात्रावास शुल्क और सुरक्षा राशि वापस नहीं किए जाने से संबंधित प्रावधान भी थे. इसमें संचालकों को अनुशासनहीनता, दुर्व्यवहार, बकाया राशि का भुगतान न करने या अन्य नियमों के उल्लंघन के मामले में किरायेदारों को हॉस्टल से बाहर निकालने का अधिकार दिया गया था. समझौते के अनुसार, माता-पिता और अभिभावकों को किरायेदारों के कमरे में प्रवेश करने से प्रतिबंधित किया गया था.
