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Ganesh Chaturthi 2026: दिल्ली के कनॉट प्लेस में महाराष्ट्र एम्पोरियम में 100 साल पुरानी परंपरा से बनी इको-फ्रेंडली गणपति मूर्तियां प्रदर्शित की गई हैं. महाराष्ट्र की सपना जाधव इन्हें पहली बार दिल्ली लेकर आई हैं. ये मूर्तियां पेपर पल्प और प्राकृतिक मिट्टी से बनी हैं, जो पर्यावरण के अनुकूल हैं.
नई दिल्ली: गणपति बप्पा के स्वागत में अब बस एक दिन बाकी है. ऐसे में दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित महाराष्ट्र एम्पोरियम में इस बार गणपति की कुछ खास और अनोखी मूर्तियां लोगों का ध्यान खींच रही हैं. महाराष्ट्र से आईं ये मूर्तियां न सिर्फ देखने में खूबसूरत हैं, बल्कि पर्यावरण के लिहाज से भी खास हैं. इन मूर्तियों को इको-फ्रेंडली तरीके से तैयार किया गया है, ताकि गणेश उत्सव के बाद पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे.
महाराष्ट्र की पारंपरिक कला का दिल्ली में प्रदर्शन
इन खास गणपति मूर्तियों को लेकर महाराष्ट्र से दिल्ली पहुंचीं सपना जी ने बताया कि उन्हें यह मंच महाराष्ट्र लघु उद्योग विकास महामंडल की ओर से मिला है. उन्होंने इसके लिए संबंधित अधिकारियों का आभार जताया. सपना जाधव पहली बार दिल्ली आई हैं. यहां लोगों से मिल रहे प्यार और सहयोग से काफी खुश हैं.उन्होंने बताया कि दिल्ली में भी लोग इको-फ्रेंडली गणपति बप्पा को लेकर काफी उत्साहित हैं. अलग-अलग आकार और डिजाइन की मूर्तियां लोगों को पसंद आ रही हैं.
100 साल पुरानी कला से तैयार होती हैं मूर्तियां
सपना के मुताबिक, इन मूर्तियों को तैयार करने की कला करीब 100 साल पुरानी है. यह परंपरा महाराष्ट्र के रायगढ़ और पेण इलाके से जुड़ी हुई है. पेण को गणपति की मूर्तियां बनाने के लिए खास तौर पर जाना जाता है. इसी पारंपरिक कला को आगे बढ़ाते हुए अब पर्यावरण के अनुकूल मूर्तियां तैयार की जा रही हैं. इन मूर्तियों में पारंपरिक डिजाइन के साथ-साथ नए प्रयोग भी देखने को मिल रहे हैं. यही वजह है कि ये गणपति आम मूर्तियों से कुछ अलग नजर आते हैं.
पेपर पल्प और प्राकृतिक मिट्टी से तैयार मूर्तियां
इन इको-फ्रेंडली गणपति मूर्तियों को पेपर पल्प और खास तरह की मिट्टी से तैयार किया जाता है. सपना जी ने बताया कि इन्हें बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री पर्यावरण के लिए सुरक्षित है. मूर्तियों में इस्तेमाल किए जाने वाले रंग भी इको-फ्रेंडली हैं. इन्हें महिला कारीगरों की टीम तैैयार करती है. मूर्तियों का वजन भी उनके आकार के हिसाब से अलग-अलग है. कुछ मूर्तियां करीब 4 किलो की हैं, जबकि बड़ी मूर्तियों का वजन लगभग 15 किलो तक है.
15 मिनट में शुरू हो जाता है रंग भरने का काम
सपना ने बताया कि पहले मूर्तियों को रंगने की शुरुआती प्रक्रिया में करीब एक घंटे तक का समय लगता था, लेकिन अब तकनीक और अनुभव के चलते यह काम लगभग 15 मिनट में शुरू कर दिया जाता है. मूर्तियों को सजाने और अंतिम रूप देने में उनके आकार और डिजाइन के हिसाब से समय लगता है. इन मूर्तियों को तैयार करने में महिला कारीगरों की भी अहम भूमिका है. महाराष्ट्र से आई टीम दिल्ली में भी इन्हीं पारंपरिक तरीकों से मूर्तियों को अंतिम रूप दे रही है.
1200 रुपये से शुरू होकर 25 हजार तक कीमत
महाराष्ट्र एम्पोरियम में रखी गई गणपति मूर्तियों की कीमत अलग-अलग आकार के हिसाब से तय की गई है. यहां करीब 6 इंच की मूर्ति की कीमत 1200 रुपये से शुरू हो रही है. वहीं 8 इंच की मूर्ति लगभग 2100 रुपये और 10 इंच की मूर्ति करीब 3100 रुपये में उपलब्ध है. इसके अलावा बड़ी और विशेष डिजाइन वाली मूर्तियों की कीमत 25 हजार रुपये तक बताई गई है. यहां छोटे से लेकर करीब 30 इंच तक के गणपति बप्पा के विकल्प मौजूद हैं.
विट्ठल माउली की मूर्ति भी खास आकर्षण
सपना अपने साथ गणपति के अलावा महाराष्ट्र की धार्मिक परंपरा से जुड़ी एक खास मूर्ति भी लेकर आई हैं, जिसे ‘विट्ठल माउली’ कहा जाता है. यह पंढरपुर के भगवान विट्ठल से जुड़ी कलाकृति है. पारंपरिक पोशाक और खास रूप में तैयार की गई यह मूर्ति भी लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है.
दिल्ली में पहली बार लेकर आईं ये खास मूर्तियां
सपना ने बताया कि यह उनका दिल्ली का पहला दौरा है. उन्होंने कहा कि दिल्ली के लोगों ने उन्हें महाराष्ट्र जैसा ही प्यार दिया है. यहां लोगों ने खाने-पीने से लेकर हर तरह से सहयोग किया और अपनापन दिखाया.
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अमित रंजन वर्तमान में News18 में बिहार, झारखंड और दिल्ली से जुड़ी खबरों के समन्वय और संपादन का कार्य देख रहे हैं. खोजी पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है. राजनीति, शिक्षा, खेल, क्राईम और मौसम जैसे विषयों …
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