नई दिल्ली: फैटी लिवर को लेकर लोगों के मन में कई सवाल रहते हैं. क्या बिना मोटापे के भी फैटी लिवर हो सकता है? क्या सिर्फ अल्ट्रासाउंड से इसका पता चल जाता है? क्या ब्लैक कॉफी या लिवर डिटॉक्स टी सच में फायदा करती है? ऐसे ही सवालों पर गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. यूनिक त्यागी ने जरूरी जानकारी साझा की. फैटी लिवर आजकल सिर्फ ज्यादा वजन वाले लोगों की समस्या नहीं रह गई है. डॉ. यूनिक त्यागी के मुताबिक, पतले या सामान्य वजन वाले व्यक्ति को भी फैटी लिवर हो सकता है.
शुरुआत में पता भी नहीं चलता
फैटी लिवर की शुरुआती स्टेज में अक्सर कोई खास लक्षण दिखाई नहीं देते. कई बार किसी दूसरी बीमारी की जांच के दौरान अल्ट्रासाउंड या लिवर टेस्ट में इसका पता चलता है. कुछ लोगों को पेट के दाहिने हिस्से में हल्का भारीपन या दर्द महसूस हो सकता है. हालांकि, इसे फैटी लिवर का पक्का लक्षण नहीं माना जा सकता.
Grade-1 Fatty Liver को नजरअंदाज न करें
अगर अल्ट्रासाउंड में Grade-1 fatty liver सामने आता है, तो घबराने की जरूरत नहीं है. लेकिन इसे अनदेखा भी नहीं करना चाहिए. एक्सपर्ट के अनुसार, शुरुआती स्टेज में लाइफस्टाइल में बदलाव करके लिवर में जमा फैट को कम किया जा सकता है. इसके लिए वजन को नियंत्रित करना, रोजाना शारीरिक गतिविधि करना, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल में रखना और संतुलित डाइट लेना जरूरी है.
सिर्फ अल्ट्रासाउंड ही काफी नहीं
लिवर फंक्शन टेस्ट में कुछ मरीजों के लिवर एंजाइम बढ़े हुए मिल सकते हैं. वहीं, अल्ट्रासाउंड में फैटी लिवर दिखाई दे सकता है. लेकिन बीमारी कितनी आगे बढ़ी है और लिवर में फाइब्रोसिस का जोखिम कितना है, यह जानने के लिए डॉक्टर जरूरत के हिसाब से दूसरे टेस्ट भी लिख सकते हैं. दोबारा जांच कब करानी है, यह मरीज की स्थिति और जोखिम के आधार पर डॉक्टर तय करते हैं.
लिवर डिटॉक्स के नाम पर कुछ भी न लें
डॉ. यूनिक त्यागी ने लिवर क्लीनिंग टी और बिना सलाह लिए सप्लीमेंट लेने को लेकर भी सावधान किया. उनके मुताबिक, ऐसा कोई जादुई सप्लीमेंट नहीं है, जो फैटी लिवर को ठीक कर दे. विटामिन या मिनरल सप्लीमेंट तभी लेना चाहिए, जब शरीर में उसकी कमी हो या डॉक्टर किसी खास मेडिकल वजह से इसकी सलाह दें. कुछ हर्बल या डिटॉक्स प्रोडक्ट उल्टा लिवर को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं.
डाइट में इन चीजों पर दें ध्यान
डाइट में सब्जियां, फल और फाइबर वाली चीजों को जगह देना फायदेमंद हो सकता है. वहीं मीठे पेय, ज्यादा चीनी और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट का सेवन कम करना चाहिए. एक्सपर्ट ने संतुलित डाइट और नियमित एक्सरसाइज को साथ लेकर चलने पर जोर दिया.
ब्लैक कॉफी कोई जादुई इलाज नहीं
ब्लैक कॉफी को लेकर भी लोगों में काफी क्रेज है. कुछ रिसर्च में कॉफी को लिवर हेल्थ से जुड़े फायदे से जोड़ा गया है. लेकिन सिर्फ कॉफी पीने से फैटी लिवर ठीक नहीं होता. अगर कॉफी में ज्यादा चीनी या क्रीम डाली जा रही है, तो इससे अतिरिक्त कैलोरी बढ़ सकती है. इसलिए इसे इलाज का विकल्प नहीं माना जा सकता.
बिना डॉक्टर की सलाह न लें ये दवाएं
Semaglutide जैसी दवाओं और Mounjaro जैसी दवाओं को लेकर भी लोग सवाल करते हैं. एक्सपर्ट के मुताबिक, कुछ दवाएं वजन कम करने में मदद कर सकती हैं और इससे लिवर में जमा फैट पर भी असर पड़ सकता है. लेकिन इन्हें केवल डॉक्टर की सलाह और प्रिस्क्रिप्शन के अनुसार ही लेना चाहिए. हर मरीज के लिए इन दवाओं की जरूरत या फायदा एक जैसा नहीं होता.
