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Inspector Subhash Yadav 100 crore CBI Case: सीबीआई ने दिल्ली पुलिस के नार्कोटिक्स सेल में तैनात रहे अरबपति इंस्पेक्टर सुभाष यादव की जमानत याचिका खारिज करा दी है. आरोपी पर पद का दुरुपयोग कर 100 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग और रिश्वतखोरी का आरोप है. 12 मई को द्वारका में हुई छापेमारी के दौरान उसके दफ्तर से 48 लाख रुपये नकद मिले थे. इस हाई-प्रोफाइल मामले के वित्तीय लेन-देन में दिल्ली पुलिस के तीन आईपीएस (IPS) अधिकारी भी सीबीआई के रडार पर आ चुके हैं.
सीबीआई मामले की जांच कर रही है.
यह कहानी दिल्ली पुलिस के एक ऐसे कुबेर की है, जिसने खाकी की आड़ में नोटों का वो पहाड़ खड़ा किया जिसकी चमक ने बड़े-बड़े सूरमाओं की आंखें चौंधिया दीं. द्वारका के नारकोटिक्स सेल की बंद दीवारों के पीछे जब ड्रग्स और अपराध के सिंडिकेट से वसूली की फाइलें खुलनी शुरू हुईं तो जांच एजेंसी सीबीआई के भी होश उड़ गए. यह सिर्फ एक इंस्पेक्टर की गिरफ्तारी का मामला नहीं है बल्कि यह दिल्ली के पॉश इलाकों से लेकर सत्ता के गलियारों तक फैले उस नेक्सस की दास्तान है जिसमें तीन-तीन बड़े आईपीएस (IPS) अफसरों की वर्दी पर भी दाग लगने शुरू हो गए हैं. जब सीबीआई ने कोर्ट के कटघरे में इस अरबपति इंस्पेक्टर सुभाष यादव की पूरी कुंडली खोलकर रख दी तो अदालत के कमरे में मौजूद लोग भी सन्न रह गए. सबूतों को मिटाने और गवाहों को खरीदने की ताकत रखने वाले इस रसूखदार सिस्टम के मुखिया की जमानत याचिका को कोर्ट ने एक झटके में खारिज कर दिया.
सीबीआई ने अदालत के सामने पुरजोर दलील दी. पब्लिक प्रॉसिक्यूटर विकास अत्रि ने कहा कि यदि इस बेहद प्रभावशाली और रसूखदार आरोपी को जमानत दी गई तो वह केस से जुड़े अहम गवाहों को प्रभावित कर सकता है और करोड़ों रुपये के इस घोटाले के सबूतों को पूरी तरह नष्ट कर सकता है. कोर्ट ने सीबीआई की इन दलीलों को बेहद गंभीर मानते हुए आरोपी को राहत देने से साफ इनकार कर दिया.
रिश्वतखोरी से बनाया 100 करोड़ का साम्राज्य
जांच में सामने आया है कि इंस्पेक्टर सुभाष यादव ने पुलिसिया रौब और नार्कोटिक्स सेल में अपनी तैनाती का फायदा उठाकर अवैध रूप से करोड़ों रुपये की चल-अचल संपत्तियां खड़ी की थीं. सीबीआई के मुताबिक यह पूरा मामला करीब 100 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग और महा-रिश्वतखोरी से जुड़ा हुआ है. शुरुआती तफ्तीश में ही इंस्पेक्टर के पास से अकूत बेनामी संपत्तियों के दस्तावेज और भारी वित्तीय लेन-देन के सबूत मिले हैं.
द्वारका रेड और 48 लाख कैश की इनसाइड स्टोरी
इस पूरे मामले का पर्दाफाश इस साल 12 मई को हुआ था, जब सीबीआई ने दिल्ली के द्वारका इलाके में एक गुप्त सूचना के आधार पर बेहद बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया था. सीबीआई की टीम ने जब नार्कोटिक्स सेल के दफ्तर और ठिकानों पर छापा मारा तो वहां से करीब 48 लाख रुपये की भारी-भरकम नकदी बरामद हुई थी. इस रेड के दौरान सीबीआई ने सुभाष यादव के साथ तैनात कांस्टेबल अजय को मौके से ही दबोच लिया था, लेकिन शातिर इंस्पेक्टर सुभाष यादव उस वक्त चकमा देकर फरार होने में कामयाब हो गया था.
3 आईपीएस अफसर भी आए सीबीआई के रडार पर
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब जांच का दायरा दिल्ली पुलिस के शीर्ष अधिकारियों तक पहुंच गया. बताया जा रहा है कि 12 मई को हुई रेड वाले दिन ही सुभाष यादव सीबीआई की हिटलिस्ट में आ चुका था लेकिन तत्कालीन जिले के डीसीपी समेत कुल तीन आईपीएस अधिकारियों की कथित सिफारिश और रसूख के चलते उसे अस्थाई तौर पर राहत मिल गई थी. हालांकि, सीबीआई ने जब इस 100 करोड़ के सिंडिकेट के वित्तीय लेन-देन (मनी ट्रेल) की गहराई से जांच की तो इन आईपीएस अफसरों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई. अब जांच एजेंसी इन तीनों आईपीएस अधिकारियों को भी रडार पर लेकर विस्तार से तफ्तीश कर रही है, जिससे आने वाले दिनों में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं.केस के 5 बड़े अपडेट्स जमानत खारिज: सीबीआई कोर्ट ने इंस्पेक्टर सुभाष यादव की जमानत अर्जी को सख्त दलीलों के बाद नामंजूर किया. 100 करोड़ का घोटाला: आरोपी पर रिश्वतखोरी और पद का दुरुपयोग कर 100 करोड़ से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है. आईपीएस अधिकारियों पर शिकंजा: दिल्ली पुलिस के 3 तत्कालीन आईपीएस (IPS) अधिकारी और एक पूर्व डीसीपी भी सीबीआई जांच के दायरे में हैं. दफ्तर से मिला था कैश: 12 मई को द्वारका में हुई छापेमारी के दौरान इंस्पेक्टर के ऑफिस से 48 लाख रुपये नकद बरामद हुए थे. कांस्टेबल पहले ही गिरफ्तार: इस घूसकांड में शामिल कांस्टेबल अजय को सीबीआई पहले ही सलाखों के पीछे भेज चुकी है.
सवाल-जवाब
सीबीआई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर सुभाष यादव की जमानत याचिका क्यों खारिज की?
सीबीआई ने कोर्ट में दलील दी कि आरोपी इंस्पेक्टर सुभाष यादव बेहद रसूखदार है और वह जेल से बाहर आते ही मामले के अहम गवाहों को डरा-धमका सकता है व सबूतों को प्रभावित कर सकता है. इस दलील को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने जमानत खारिज कर दी.
इस रिश्वतकांड में दिल्ली पुलिस के बड़े अधिकारियों (IPS) की क्या भूमिका सामने आ रही है?
जांच में पता चला है कि 12 मई को जब सीबीआई ने रेड की थी, तब जिले के एक पूर्व डीसीपी और कुछ अन्य तत्कालीन आईपीएस अधिकारियों ने कथित तौर पर आरोपी इंस्पेक्टर को बचाने के लिए सिफारिश की थी. अब 100 करोड़ के इस बड़े लेन-देन में सीबीआई इन तीनों आईपीएस अफसरों की भूमिका की जांच कर रही है.
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डिजिटल पत्रकारिता में खबरों की गहरी समझ रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. 16 वर्षों से सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में इन्होंने अपनी कलम से जटिल विषयों को …और पढ़ें
