बच्चों को समझाएं पैसों की अहमियत, एक्सपर्ट ने बताया इसका महत्व और तरीका

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माता-पिता अपने बच्चों की हर जरूरत पूरी करने की कोशिश करते हैं लेकिन, कई बार कुछ दिक्कतें होने पर जब माता पिता उनकी इच्छाओं को पूरा नहीं कर पाते तो बच्चे गलत कदम भी उठा लेते हैं. ऐसे मामले काफी ज्यादा बढ़ते हुए देखने को मिले हैं. ऐसे में हम आपको…..

दिल्ली: आजकल बच्चों की छोटी-छोटी जरूरतों और इच्छाओं पर माता-पिता बिना ज्यादा सोचे खर्च कर देते हैं. कभी ₹50 का स्नैक, कभी ₹200 की पेस्ट्री तो कभी ₹300 का बाहर का खाना लेकिन क्या बच्चों को यह समझाया जाता है कि पैसे सिर्फ खर्च करने के लिए नहीं, बल्कि भविष्य के सपनों को पूरा करने के लिए भी जरूरी हैं इकनॉमिस्ट आकाश जिंदल के मुताबिक, बच्चों को बजट और सेविंग सिखाने का तरीका ऐसा होना चाहिए, जिससे वे इसे पाबंदी नहीं बल्कि अपने भविष्य की तैयारी समझें.

आज बचाओगे तो कल अपने काम आएगा, इस सोच से समझाएं
आकाश जिंदल बताते हैं कि अगर बच्चा रोजाना ₹200 की पेस्ट्री या पैटीज खाने पर खर्च करना चाहता है, तो उसे सीधे रोकने के बजाय यह समझाना चाहिए कि यही पैसा अगर लगातार बचाया जाए, तो भविष्य में बड़ी जरूरत पूरी करने में मदद कर सकता है. बच्चों को उदाहरण देकर बताया जा सकता है कि जब वे 18-19 साल के होंगे और कानूनी तौर पर बाइक चलाने की उम्र में पहुंचेंगे, तब यही बचत बाइक खरीदने के काम आ सकती है.उन्हें यह भी समझाया जा सकता है कि बाइक सिर्फ उनकी सुविधा के लिए नहीं होगी, बल्कि परिवार के भी काम आएगी. मां को सामान लाना हो या दादा-दादी को डॉक्टर के पास ले जाना हो, तो वे बाइक से मदद कर सकेंगे. इस तरह बच्चा खुद महसूस करेगा कि आज की छोटी बचत कल उसके और परिवार के लिए उपयोगी साबित हो सकती है.

बच्चों के सपनों को सेविंग से जोड़ना जरूरी
एक्सपर्ट के अनुसार, बच्चों को यह भी बताया जाना चाहिए कि अगर वे आगे चलकर डॉक्टर, इंजीनियर या आईएएस अधिकारी बनना चाहते हैं, तो उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में काफी खर्च हो सकता है. कॉलेज की फीस, किताबें, कोचिंग और दूसरी शैक्षणिक जरूरतों के लिए आर्थिक तैयारी पहले से होना जरूरी है.अगर बच्चा छोटी उम्र से ही पैसे बचाने की आदत डालता है, तो भविष्य में पढ़ाई के दौरान आर्थिक दबाव कम हो सकता है. वरना कई बार पढ़ाई पूरी होते ही आर्थिक जिम्मेदारियों के कारण बच्चों को अपने मनचाहे करियर के बजाय तुरंत नौकरी करने का फैसला लेना पड़ सकता है.

बचत को बोझ नहीं, अपने लक्ष्य का हिस्सा बनाएं
आकाश जिंदल का कहना है कि बच्चों को सेविंग के लिए प्रेरित करते समय उनसे उनके सपनों के बारे में बात करनी चाहिए. उन्हें समझाएं कि अगर वे आज थोड़ा कम खर्च करेंगे, तो कल अपने बड़े लक्ष्य के लिए ज्यादा तैयार रहेंगे. जब बच्चे यह समझने लगते हैं कि बचाया हुआ पैसा उनकी बाइक, पढ़ाई या भविष्य के किसी बड़े सपने में काम आ सकता है, तो वे खुद बजट बनाने और खर्च सोच-समझकर करने के लिए प्रेरित होते हैं. यही आदत आगे चलकर उन्हें आर्थिक रूप से जिम्मेदार बनाने में मदद करती है.

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Rajneesh Singh

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