नई दिल्ली. अगर आप सोचते हैं कि कुत्ते या किसी जानवर के काटने के बाद सिर्फ रेबीज वैक्सीन लगवा लेना ही जिंदगी की गारंटी है तो आप एक बड़े खतरे की जद में हैं. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो आपकी इसी मासूम सोच का फायदा उठाकर बाजार में मौत बेच रहा था. दिल्ली के मुखर्जी नगर से संचालित हो रहे एक इंटर-स्टेट रैकेट ने 6 करोड़ रुपये की नकली और री-लेबल्ड दवाओं का जाल बिछा रखा था. इसमें सबसे डरावना पहलू यह है कि इसमें रेबीज वैक्सीन, सांप के जहर का एंटीसीरम और इंसुलिन जैसी लाइफ सेविंग दवाओं के नकली वर्जन बेचे जा रहे थे. यानी जिसे आप जीवनदान समझकर लगवा रहे थे वह महज पानी या घातक केमिकल भी हो सकता है.
मुखर्जी नगर में चल रही थी मौत की फैक्ट्री
दिल्ली पुलिस ने मुखर्जी नगर की इंदिरा विकास कॉलोनी में छापा मारकर किंगपिन मनोज कुमार जैन समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है. यहां से जो बरामद हुआ वह किसी भी बीमार व्यक्ति के लिए डरावना सपना है:
· सरकारी दवाओं की चोरी: प्रयागराज से सरकारी सप्लाई की दवाओं को चुराकर उनके लेबल हटाए जाते थे और उन पर नए कमर्शियल लेबल लगाकर दिल्ली-NCR और नॉर्थ-ईस्ट भारत में बेचा जाता था.
· बरामदगी का अंबार: 6 करोड़ की दवाओं में 7900 हेपबेस्ट टैबलेट, 6000 एज़िथ्रोमाइसिन, 18,000 ज़ीरोडोल-SP और 953 वायल रेबीज वैक्सीन शामिल हैं.
· नकली मैन्युफैक्चरिंग: यहां न सिर्फ री-लेबलिंग हो रही थी बल्कि ह्यूमन एल्ब्यूमिन जैसी महंगी और जरूरी दवाओं को अवैध रूप से बनाया भी जा रहा था.
· नेटवर्क: यह गिरोह हवाला के जरिए पैसों का लेनदेन कर रहा था और इनका जाल दिल्ली से लेकर कोलकाता और गुवाहाटी तक फैला था.
फेक मेडिसिन यानी सीधा मर्डर
नकली दवा का मतलब सिर्फ पैसे की ठगी नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या है.
1. रेबीज और स्नेक वेनम: रेबीज एक ऐसी बीमारी है जिसका लक्षण दिखने के बाद इलाज नामुमकिन है. अगर किसी को नकली वैक्सीन लगी तो उसे लगेगा कि वह सुरक्षित है लेकिन अंदर ही अंदर वायरस उसकी जान ले लेगा.
2. ह्यूमन एल्ब्यूमिन और इंसुलिन: किडनी, लिवर और डायबिटीज के मरीज इन दवाओं पर पूरी तरह निर्भर होते हैं. नकली एल्ब्यूमिन शॉक या ऑर्गन फेल्योर का कारण बन सकता है.
3. सिस्टम में सेंध: सरकारी सप्लाई की दवाओं का सिस्टम से बाहर आना और फिर री-लेबल होकर बाजार में बिकना हमारे डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क की बड़ी सुरक्षा चूक को दर्शाता है.
पकड़ी गई दवाओं की लिस्ट और उनका काम
| क्र.सं. | दवा का नाम / ब्रांड | मात्रा (बरामदगी) | मुख्य उपयोग |
|---|---|---|---|
| 1 | अभयराब (रेबीज वैक्सीन) | 953 वायल | कुत्ते/जानवर के काटने पर रेबीज से बचाव |
| 2 | स्नेक वेनम एंटीसीरम | 55 वायल | सांप के काटने का इलाज |
| 3 | इंसुलिन (ग्लारिटस/बासालॉग) | 315 कार्ट्रिज | डायबिटीज/ब्लड शुगर कंट्रोल |
| 4 | ह्यूमन एल्ब्यूमिन (अल्बुरेल/एल्बुसेल) | 1416 यूनिट | लीवर/किडनी की गंभीर स्थिति, शॉक का इलाज |
| 5 | लेनवाटोल/लेनवाकास्ट | 14,100 कैप्सूल | कैंसर (थायरॉइड, लिवर) और अस्थमा का इलाज |
| 6 | ज़ीरोडोल-SP | 18,000 टैबलेट | दर्द निवारक और सूजन कम करने के लिए |
| 7 | हेपबेस्ट (टेनोफेविर) | 7,900 टैबलेट | हेपेटाइटिस-B का इलाज |
| 8 | एज़िथ्रोमाइसिन 500mg | 6,000 टैबलेट | बैक्टीरियल इन्फेक्शन/एंटीबायोटिक |
| 9 | विटामिन D3 इंजेक्शन | 1,500 इंजेक्शन | हड्डियों की मजबूती और विटामिन कमी दूर करना |
| कुल मार्केट वैल्यू | लगभग 6 करोड़ रुपये | ||
सवाल-जवाब
क्या केवल रेबीज वैक्सीन पर भरोसा करना सुरक्षित है?
नहीं, यदि वैक्सीन नकली है तो वह कोई सुरक्षा नहीं देगी. हमेशा दवा का बैच नंबर चेक करें और विश्वसनीय अस्पताल या अधिकृत फार्मेसी से ही दवा लें.
यह गिरोह सरकारी दवाओं के साथ क्या खेल कर रहा था?
यह गैंग सरकारी अस्पतालों की दवाओं के ओरिजिनल लेबल हटाकर उन पर महंगे ब्रांड्स के लेबल लगा देता था ताकि उन्हें ऊंचे दामों पर निजी दुकानों में बेचा जा सके.
नकली दवा की पहचान कैसे की जा सकती है?
पैकेजिंग की स्पेलिंग, धुंधली प्रिंटिंग, बिना QR कोड का लेबल और असामान्य रूप से कम कीमत नकली दवा के संकेत हो सकते हैं.
इस रैकेट का व्यापार कहां-कहां फैला था?
इस गिरोह की सप्लाई चेन दिल्ली-NCR के अलावा कोलकाता, गुवाहाटी, इंफाल और उत्तर-पूर्वी भारत के कई हिस्सों तक फैली हुई थी.
