नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली के कालकाजी स्थित आस्था कुंज पार्क में एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ चाकू और बंदूक की नोक पर खौफनाक गैंगरेप की वारदात सामने आई. पीड़िता अपने जन्मदिन पर कालकाजी मंदिर में दर्शन करने के बाद अपने दोस्त के साथ पार्क में बैठी थी. तभी वहां पहुंचे दरिंदों ने इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया.
इस घटना के बाद दिल्ली के अन्य पार्कों, खासकर जहां प्रेमी जोड़े (कपल) पहुंचते हैं, वहां सुरक्षा के क्या इंतजाम हैं? क्या पुलिस और गार्ड अब संदिग्धों पर कार्रवाई कर रहे हैं? इसकी हकीकत जानने के लिए जब ग्राउंड रिपोर्टिंग की गई, तो दिल्ली के सबसे मशहूर ‘मिलेनियम पार्क’ (इंद्रप्रस्थ पार्क) में चौंकाने वाले खुलासे हुए. दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) का यह पार्क करीब 70 एकड़ में फैला हुआ है। यहां चारों तरफ घना जंगल और पेड़-पौधे हैं.
70 एकड़ के घने पार्क में सिर्फ एक गार्ड
ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान सबसे पहले यह बात सामने आई कि पार्क के प्रवेश द्वार पर कोई भी सुरक्षाकर्मी तैनात नहीं था. प्रवेश पूरी तरह निशुल्क होने के कारण कोई भी बिना किसी रोक-टोक के अंदर दाखिल हो सकता है. मेन गेट से लेकर 70 एकड़ में फैले पूरे पार्क, घने जंगलों और एक्सरसाइज ग्राउंड तक एक भी गार्ड गश्त करता नजर नहीं आया.
पार्क के दूसरे छोर यानी निकास द्वार पर सिर्फ एक सुरक्षाकर्मी बैठा मिला. वह भी ड्यूटी के नाम पर बैठकर मोबाइल चलाने में व्यस्त था. दोपहर 1:00 बजे से लेकर शाम 5:00 बजे के बीच पार्क के अंदर 26 से ज्यादा प्रेमी जोड़े बैठे नजर आए. इसी दौरान कुछ संदिग्ध लोग भी घूमते दिखे, जो कपल्स पर गंदी टिप्पणियां कर रहे थे और उन्हें घूर रहे थे. इसके बावजूद पार्क के अंदर किसी सुरक्षाकर्मी या पुलिसकर्मी को तैनात नहीं किया गया था. पार्क के बाहर पुलिस की गश्ती गाड़ी (पेट्रोलिंग) कुछ देर के लिए दिखी, लेकिन अंदर कोई चेकिंग नहीं हुई.
‘पहले भी मिल चुके हैं शव, नशेड़ियों का जमावड़ा’
पार्क के पीछे स्थित कॉलोनी के निवासी शिवकुमार बीते 20 वर्षों से यहां रोजाना एक्सरसाइज करने आते हैं. उन्होंने बताया कि कालकाजी गैंगरेप की खबर के बाद उन्हें उम्मीद थी कि यहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम होंगे. हालांकि, धरातल पर कुछ भी नहीं बदला.
शिवकुमार ने बताया कि पार्क में प्रेमी जोड़े आते ही हैं, लेकिन उनके साथ-साथ जेबकतरे, नशेड़ी और आपराधिक प्रवृत्ति के लोग भी खुलेआम घूमते हैं. यहां पहले भी कई गंभीर हादसे हो चुके हैं और पार्क से शव तक बरामद किए जा चुके हैं. गार्ड्स कभी पार्क के अंदर राउंड नहीं लगाते और सिर्फ गेट पर बैठे रहते हैं. सुबह और शाम के वक्त यह पार्क बेहद असुरक्षित हो जाता है. ऐसे समय में यहां आने वाले लोगों के साथ लूटपाट या महिलाओं के साथ अनहोनी की पूरी आशंका बनी रहती है.
समीप ही पुलिस चौकी, फिर भी पार्क के अंदर गश्त शून्य
कई सालों से पार्क में आ रहे एक अन्य स्थानीय नागरिक महेश कुमार साहू ने बताया कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी मिलेनियम पार्क में पुलिस की कोई सीधी गश्त देखने को नहीं मिली. उन्होंने बताया कि पार्क के ठीक बगल में ‘सराय काले खां पुलिस चौकी’ स्थित है. पुलिस की गाड़ी सिर्फ बाहर सड़क से निकल जाती है, लेकिन कभी किसी पुलिसकर्मी ने पार्क के अंदर जाकर स्थिति का जायजा लेने की जहमत नहीं उठाई.
महेश कुमार साहू के अनुसार, सुबह, शाम और रात के समय यहां बड़ी संख्या में नशेड़ी और बदमाश जमा होते हैं. पार्क के घने हिस्सों में बैठकर नशा किया जाता है, जिससे यह पूरी जगह बेहद खतरनाक बन जाती है. प्रेमी जोड़ों को अक्सर इन असामाजिक तत्वों द्वारा परेशान किया जाता है. हालांकि, लोक-लाज के डर से पीड़ित शिकायत दर्ज कराने से बचते हैं. वहीं, अगर कोई शिकायत की भी जाए, तो पार्क के सुरक्षाकर्मी उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं करते हैं.
बता दें कि कालकाजी की भयावह घटना के बावजूद दिल्ली का इतना बड़ा और लोकप्रिय पार्क आज भी भगवान भरोसे ही चल रहा है.
