नोएडा ग्राउंड रिपोर्ट: डूब क्षेत्र में पाई-पाई जोड़कर बनाया आशियाना, अब बिजली-पानी को तरसे लोग, अनशन पर महिलाएं

Noida News: दिल्ली-एनसीआर में सिर छिपाने की एक अदद छत पाने के लिए बिहार, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से आए कामगारों ने बरसों तक दिन-रात पसीना बहाया. अपनी गाढ़ी कमाई की पाई-पाई जोड़कर कुछ लाख रुपये जुटाए और प्रॉपर्टी डीलरों के सुनहरे दावों के झांसे में आकर जमीन खरीद ली. घर बनकर तैयार हुआ, तो हकीकत का कड़वा घूंट सामने आया जिसे आशियाना समझा, वह सरकारी कागजों में ‘डूब क्षेत्र’ निकला. आज आलम यह है कि यहां न पीने का साफ पानी है और न ही बिजली का कनेक्शन. अधिकारियों और भूमाफिया की पुरानी साठगांठ का खामियाजा भुगतते सैकड़ों परिवार अब स्थानीय किसानों के साथ मिलकर सड़कों पर अनशन करने को मजबूर हैं.

अनशन से बिगड़ी तबीयत, अस्पताल से लौटकर फिर धरने पर डटीं महिलाएं
धरना स्थल पर मौजूद हालात प्रशासनिक दावों की जमीनी पोल खोलते हैं. बीते दो हफ्तों से चल रहे इस आंदोलन में महिलाएं भी अग्रिम मोर्चे पर हैं. भूख-प्यास के कारण कई महिलाओं की तबीयत बिगड़ चुकी है. अनशन पर बैठीं वर्षा बताती हैं कि बीते दिनों उनकी तबीयत इतनी ज्यादा खराब हो गई थी कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. डॉक्टर ने थोड़ा-थोड़ा खाने की सलाह दी है, लेकिन वह ठीक होते ही दोबारा धरना स्थल पर आ डटीं.

वर्षा का कहना है, ‘हमने लाखों रुपये लगाकर अपना घर बनाया है. आज बुनियादी बिजली-पानी तक नहीं है. जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, हम पीछे नहीं हटेंगे. इलाके में लाइट न होने के कारण साल में 5 से 10 मामले ऐसे आते हैं, जब अंधेरे में जहरीले जीव-जंतु लोगों को काट लेते हैं. कइयों की तो इससे जान भी जा चुकी है.’ वहीं कॉलोनी निवासी मुन्नी कहती हैं कि जीवन भर की सारी कमाई इस मकान में झोंक दी, लेकिन यहां कोई सुविधा नहीं मिली. फिलहाल सोलर पैनल लगाकर किसी तरह काम चलाया जा रहा है, लेकिन रोजमर्रा की जिंदगी भारी जद्दोजहद में कट रही है.

छिजारसी-चोटपुर की तर्ज पर कुलेसरा तक बिजली मीटर देने की मांग
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे किसान विकल यादव का कहना है कि जब डूब क्षेत्र में आने वाली चोटपुर और छिजारसी कॉलोनियों को बिजली के मीटर दिए जा सकते हैं, तो बाकी बस्तियों के साथ भेदभाव क्यों? विकल यादव के मुताबिक, ‘डूब क्षेत्र कुलेसरा तक फैला है, जहां 4 से 5 लाख की आबादी बसती है. अकेले आंबेडकर कॉलोनी से कुलेसरा डूब क्षेत्र तक ही ढाई से तीन लाख लोग रहते हैं. इन सभी परिवारों को भी बिजली कनेक्शन मिलने चाहिए.’

धरने की अगुवाई कर रहे किसान नेता सुखबीर खलीफा ने कहा कि अतीत में जो गलतियां अधिकारियों या सिस्टम की लापरवाही से हुईं, अब उन्हें सुधारने का वक्त है. अधिकारी सिर्फ नियमों का हवाला देकर पल्ला नहीं झाड़ सकते. किसान और उनके परिवारों की महिलाएं पूरी मजबूती के साथ इन बाशिंदों के साथ खड़ी हैं और मांगें पूरी होने तक यह आंदोलन जारी रहेगा.

जनप्रतिनिधियों के दखल से कहीं जगी उम्मीद, कहीं 8-10 दिन की मोहलत
स्थानीय लोगों के अनुसार, चोटपुर और छिजारसी कॉलोनी में जब लाखों लोग सड़कों पर उतरे थे, तब स्थानीय विधायक पंकज सिंह और सांसद डॉ. महेश शर्मा की पहल पर वहां बिजली कनेक्शन मुहैया कराने की प्रक्रिया शुरू हुई. इधर, आंदोलनकारियों का कहना है कि हाल ही में अधिकारियों के साथ उनकी बैठक हुई है, जिसमें प्रशासन ने मामले के समाधान के लिए 8 से 10 दिन का समय मांगा है. प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि वे तय समयसीमा का इंतजार कर रहे हैं; यदि ठोस समाधान नहीं निकला, तो आंदोलन का अगला कदम और अधिक कड़ा होगा.

रजिस्ट्री का खेल और प्रशासनिक पेच
डूब क्षेत्र में रहने वाले लोगों का दावा है कि उन्होंने बाकायदा रजिस्ट्री कराकर ही प्लॉट खरीदे थे. हालांकि, जानकारों के मुताबिक यह रजिस्ट्री मूल रूप से ‘खेती की जमीन’ के आधार पर कराई गई थी. भूमाफिया ने नियमों की अनदेखी कर खेती की जमीन पर छोटे-छोटे रिहायशी प्लॉट काट दिए और लोगों को छल लिया. विडंबना यह भी है कि छले जाने के बावजूद अब तक किसी भी पीड़ित नागरिक ने संबंधित प्रॉपर्टी डीलर या भूमाफिया के खिलाफ पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई है.

दूसरी ओर, नोएडा प्राधिकरण का स्पष्ट रुख है कि डूब क्षेत्र में किसी भी तरह का निर्माण अवैध है. प्राधिकरण लगातार लोगों से अपील कर रहा है कि वे इस क्षेत्र में जमीन की खरीद-फरोख्त से बचें और अपनी गाढ़ी कमाई न फंसाएं. प्रशासन का तर्क है कि अवैध रूप से बसाई गई इन अनधिकृत बस्तियों को यदि आधिकारिक नागरिक सुविधाएं दी जाती हैं, तो यह सीधे तौर पर अवैध निर्माणों को कानूनी मान्यता देने जैसा होगा.

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