जंतर-मंतर बवाल और 'प्लेन क्लोज' पुलिसिंग पर पूर्व CP ने कह दी बड़ी बात, बिना वर्दी वाले पुलिस को पीट दिया तो क्या होगा?

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जानिए जंतर-मंतर बवाल और ‘प्लेन क्लोज’ पुलिसिंग पर क्यों छिड़ी बहस?

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Delhi Jantar Mantar Protest : जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक के प्रदर्शन के दौरान सादी वर्दी यानी ‘प्लेन क्लोज’ में तैनात पुलिसकर्मियों से हाथापाई और मार-पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो पर कुछ लोग पुलिस को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं तो पुलिस अधिकारी पब्लिक को कोस रहे हैं. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या इंटेलिजेंस इनपुट लेने के लिए सादी वर्दी में तैनात पुलिसवालों को भीड़ पर लाठी बरसाने का अधिकार प्राप्त है? या फिर यह गैरकानूनी है? क्या कहते हैं दिल्ली के पूर्व पुलिस कमिश्नर और कानून के जानकार?

दिल्ली जंतर-मंतर प्रोटेस्ट पर पूर्व सीपी ने क्या कहा?

दिल्ली में बीते सोमवार से कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के बाद बवाल मचा हुआ है. दिल्ली में सोमवार को एक अभूतपूर्व स्थिति को देखने को मिली, जब जंतर-मंतर पर नीट पेपर मामले में पर्यावरणवादी सोनम वांगचुक और कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन के दौरान सादी वर्दी में तैनात कुछ पुलिसवाले प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग करते दिखे. हालांकि कुछ वीडियो में प्रदर्शनकारियों के तरफ से भी हमला हुआ. लेकिन जब प्रदर्शनकारियों के चपेट में ‘प्लेन क्लोज’ यानी सादे वर्दी में तैनात पुलिसवाले आ जाते तो वह फिर अपना आई-कार्ड दिखाते और भीड़ फिर छोड़ देती. सोमवार को दिल्ली में नीट एग्जाम को लेकर जो प्रोटेस्ट हुआ, उसमें आक्रोशित भीड़ ने कई ‘प्लेन क्लोज’ वाले पुलिसकर्मी को पहचान नही सके, जब लाठी बरसाते तो भीड़ उग्र हो जाती. हालांकि, जब वह शख्स अपना पहचान पत्र दिखाता, तो पब्लिक उसे छोड़ देती. ऐसे में बड़ा सवाल क्या है पुलिस का ‘प्लेन क्लोज’ फ़ॉर्मूला, जिसमें कई पुलिस वाले दिल्ली में पिट गए?

दिल्ली में सोमवार को जंतर-मंतर पर जो प्रोटेस्ट हुए, उसके बाद सबसे बड़ा कानूनी सवाल यह खड़ा हो गया है कि ‘अगर बिना किसी बैज या यूनिफॉर्म के सादी वर्दी में तैनात पुलिसकर्मी जनता पर हमला करता है और जवाब में जनता पलटवार करती है, तो क्या इसे ऑन-ड्यूटी पुलिस पर हमला माना जाएगा?” कानून की नजर में आत्मरक्षा का अधिकार भारतीय न्याय संहिता और पूर्ववर्ती आईपीसी की धाराएं में भी हैं. देश के हर नागरिक को आत्मरक्षा यानी प्राइवेट डिफेंस का अधिकार देती हैं. कानून के जानकारों और आपराधिक मामलों के वरिष्ठ वकीलों के अनुसार, इस पूरे मामले को दो अलग-अलग पहलुओं से देखा जाना जरूरी है.

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