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दिल्ली की सड़कों पर हर दिन लगने वाले भीषण जाम से लोगों को राहत दिलाने के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने 1790 करोड़ रुपये के आधुनिक आईटीएमएस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है. यह सिस्टम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित होगा. दिल्ली के 42 प्रमुख कॉरिडोर्स पर स्मार्ट अडैप्टिव सिग्नल्स लगाए जाएंगे. यह सिस्टम ट्रैफिक का दबाव देखकर खुद सिग्नल बदलेगा. इसके साथ ही एम्बुलेंस को ग्रीन कॉरिडोर देकर तुरंत रास्ता निकालने में भी मदद मिलेगी.
Delhi ITMS AI Traffic System: दिल्ली में 1790 करोड़ का एआई ट्रैफिक सिस्टम मंजूर, जाम से मिलेगी मुक्ति. (AI Generated Image)
नई दिल्ली: केंद्रीय कैबिनेट ने दिल्ली की ट्रैफिक व्यवस्था को बदलने के लिए 1,790 करोड़ रुपये के इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) को मंजूरी दी है. यह हाईटेक प्रोजेक्ट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक पर काम करेगा. दिल्ली के 42 प्रमुख ट्रैफिक कॉरिडोर को इस आधुनिक नेटवर्क से जोड़ा जाएगा. अब चौराहों पर लाल बत्तियां फिक्स टाइमिंग के हिसाब से नहीं चलेंगी. जिस तरफ वाहनों का दबाव ज्यादा होगा, वहां एआई अपने आप ग्रीन सिग्नल का समय बढ़ा देगा. दुर्घटना होने पर राहत दल को तेजी से मौके तक पहुंचाने में मदद मिलेगी. गंभीर मरीजों को ले जा रही एंबुलेंस को ग्रीन कॉरिडोर देकर प्राथमिकता से रास्ता दिया जाएगा.
दिल्ली की सड़कों पर फिलहाल 1,529 ट्रैफिक सिग्नल फिक्स टाइमिंग के हिसाब से चलते हैं. किसी चौराहे पर अचानक जाम लगने पर ये सिग्नल खुद समय एडजस्ट नहीं कर पाते. ऐसी स्थिति में ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को मैन्युअली व्यवस्था संभालनी पड़ती है. शहर में रेड लाइट और ओवरस्पीड कैमरे पहले से लगे हैं. हालांकि, ये अलग-अलग सिस्टम के तौर पर काम करते हैं. दिल्ली में अभी ऐसा सेंट्रलाइज्ड सिस्टम नहीं है, जो सिग्नल कंट्रोल और रूट डायवर्जन को एक साथ जोड़ सके. इसी वजह से कई इलाकों में लंबा जाम लग जाता है.
दिल्ली ट्रैफिक ITMS: कैसे काम करेगा यह सिस्टम?
- नया आईटीएमएस प्रोजेक्ट सिग्नल कंट्रोल और लाइव ट्रैफिक जानकारी को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाएगा.
- नए अडैप्टिव ट्रैफिक सिग्नल को पूरे कॉरिडोर में आपस में सिंक किया जाएगा.
- सड़क पर वाहनों का दबाव बढ़ते ही सिस्टम जाम की पहचान करेगा.
- इसके बाद जिस दिशा में वाहनों की कतार लंबी होगी, वहां सिग्नल का ग्रीन टाइम अपने आप बढ़ाया जाएगा.
- सिस्टम के जरिए लोगों को जाम और पार्किंग से जुड़ी रियल टाइम जानकारी भी फोन पर मिल सकेगी.
कब तक काम करना शुरू करेगा यह AI सिस्टम?
इस विशाल प्रोजेक्ट को 24 महीनों के भीतर तीन फेज में लागू किया जाएगा. प्रोजेक्ट तैयार होने के बाद अगले पांच साल तक इसके मेंटेनेंस की जिम्मेदारी भी तय रहेगी.
- पहले फेज में 12 महीनों के दौरान 5 कॉरिडोर और 250 स्मार्ट सिग्नल के साथ मेन कमांड सेंटर तैयार किया जाएगा.
- दूसरे फेज में 6 महीने के भीतर 7 कॉरिडोर और 222 स्मार्ट सिग्नल के साथ डिजास्टर रिकवरी सेंटर बनाया जाएगा.
- तीसरे फेज में 6 महीने के अंदर 30 कॉरिडोर और 620 स्मार्ट सिग्नल का काम पूरा किया जाएगा.
तकनीकी कंसलटेंट के तौर पर सी-डैक इस पूरे प्रोजेक्ट में तकनीकी मदद देगा. प्रोजेक्ट की निगरानी के लिए केंद्रीय गृह सचिव और दिल्ली पुलिस कमिश्नर के नेतृत्व में तीन कमेटियां काम करेंगी.
पूरे नेटवर्क की सुरक्षा के लिए सिक्योर डेटा सेंटर और एन्क्रिप्टेड नेटवर्क की व्यवस्था होगी. इससे दिल्ली की सड़कों पर ट्रैफिक मैनेजमेंट के साथ कानून व्यवस्था बनाए रखने में भी पुलिस को मदद मिलेगी.
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दीपक वर्मा की गिनती डिजिटल मीडिया के सबसे तेज और उभरते हुए चेहरों में होती है. वह न्यूज18 हिंदी के साथ डिप्टी न्यूज एडिटर के तौर पर जुड़े हैं. दीपक ने अपने करियर में कई बड़े मुकाम हासिल किए हैं…
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