आने वाले दिनों में दिल्ली का रंग बदल जाएगा. राजधानी की सड़कों पर न धुआं होगा और न ही आवाज जबकि गाड़ियां सरपट दौड़ेंगी. दिल्ली सरकार की इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) पॉलिसी के लागू होने के महज तीन महीने में ही ऐसा असर दिखने लगा है. आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में लागू पॉलिसी के तहत मिल रही सब्सिडी के चलते राजधानी में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर के रजिस्ट्रेशन में 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. जबकि कॉमर्शियल फोर व्हीलर में यह 80 फीसदी से ज्यादा है.
1 जुलाई को शुरू हुई इस पॉलिसी का मकसद 2030 तक दिल्ली के कुल वाहनों में कम से कम 30 प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहन करना है. ऐसे में तीन महीने में दिख रहे असर से अच्छी उम्मीद पैदा हो रही है.अब तक दिल्ली ईवी सब्सिडी पोर्टल पर 6,225 लोगों ने सब्सिडी के लिए आवेदन किया है.
टू-व्हीलर पर खास फोकस
अधिकारियों के अनुसार, जुलाई से सितंबर के बीच इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर के रजिस्ट्रेशन पिछले तीन महीने (अप्रैल-जून) की तुलना में 30 प्रतिशत बढ़े हैं. दिल्ली में कुल वाहनों में टू-व्हीलर की संख्या लगभग दो-तिहाई है, इसलिए पॉलिसी में इन पर खास ध्यान दिया गया है. हालांकि टू व्हीलर के रजिस्ट्रेशन की संख्या बढ़ने के पीछे एक वजह ये भी है कि दिल्ली की ईवी पॉलिसी के तहत अप्रैल 2028 से नए पेट्रोल-डीजल (ICE) टू-व्हीलर के रजिस्ट्रेशन पर पूरी तरह रोक लगा दी जाएगी. ऐसे में लोग अभी से ईवी के लिए रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं.
कितनी मिल रही सब्सिडी
दिल्ली की ईवी पॉलिसी के तहत 2.25 लाख रुपये तक की कीमत वाले इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर 60 हजार रुपये सब्सिडी दी जा रही है, हालांकि यह सब्सिडी एकमुश्त न होकर तीन साल में मिलेगी.
पहले साल में 10,000 रुपये प्रति किलोवाट-आवर (अधिकतम 30,000 रुपये)
दूसरे साल में 6,600 रुपये प्रति किलोवाट-आवर (अधिकतम 20,000 रुपये)
तीसरे साल में 3,300 रुपये प्रति किलोवाट-आवर (अधिकतम 10,000 रुपये)
इन वाहनों के रजिस्ट्रेशन में भी बढ़ोतरी
आंकड़े बताते हैं कि चार-पहिया माल वाहनों (गुड्स व्हीकल) के सब्सिडी के लिए रजिस्ट्रेशन में सबसे ज्यादा 83 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.
इलेक्ट्रिक कारों के रजिस्ट्रेशन में 27 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई.
थ्री-व्हीलर में 18 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई.
जबकि टू-व्हीलर्स के रजिस्ट्रेशन में 30 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है.
पूरी राजधानी में बढ़ाए जा रहे चार्जिंग स्टेशन
दिल्ली सरकार ने चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने के लिए 456 जगहों की पहचान की थी. इनमें से 382 जगहों को केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है. इन जगहों को दोपहिया, तिपहिया और चारपहिया वाहनों के हिसाब से अलग-अलग बांटा गया है.
दिल्ली ट्रांस्को लिमिटेड इस काम के लिए नोडल एजेंसी बनाई गई है. वह जगह चुनने, बिजली की जरूरत तय करने और काम को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संभाल रही है.
बिजली मंत्री और ईवी पॉलिसी पर बने मंत्रियों के समूह के अध्यक्ष आशीष सूद ने कहा, “असली ईवी क्रांति सिर्फ सब्सिडी से नहीं आ सकती. इसके लिए मजबूत और भरोसेमंद चार्जिंग सिस्टम चाहिए, जिससे लोगों को रेंज की चिंता न रहे.”
केपीएमजी की मदद से काम तेज
सरकार ने प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (पीएमयू) के रूप में ग्लोबल कंसल्टेंसी केपीएमजी को भी साथ जोड़ लिया है. अधिकारियों के अनुसार, केपीएमजी के आने के बाद सभी जगहों का दोबारा आकलन पूरा हो चुका है. अब 160 से 180 तैयार जगहों के लिए जल्द ही टेंडर निकाला जाएगा.
सरकार का कहना है कि बिजली की उपलब्धता, ग्रिड की क्षमता और अलग-अलग तरह के वाहनों के लिए खास चार्जिंग पॉइंट बनाने पर जोर दिया जा रहा है. इससे दोपहिया, तिपहिया और कमर्शियल वाहनों का इलेक्ट्रिक में बदलाव आसान होगा.
